बचपन का गाँव

बचपन का गाँव | Bachpan ka Gaon

बचपन का गाँव

ठण्डी-ठण्डी छांव में
उस बचपन के गाँव में
मैं-जाना चाहती हूँ।
तोडऩा चाहती हूँ
बंदिश चारों पहर की।
नफरत भरी ये
जिन्दगी शहर की॥
अपनेपन की छाया
मैं पाना चाहती हूँ।
उस बचपन के गाँव में
मैं-जाना चाहती हँ हूँ॥
घुट-सी गयी हूँ
इस अकेलेपन में
खुशियों के पल ढूँढ रही
निर्दयी से सूनेपन में
इस उजड़े गुलशन को
मैं महकाना चाहती हूँ।
उस बचपन के गाँव में
मैं-जाना चाहती हूँ।
प्रेम और भाईचारे का
जहाँ न संगम हो।
भागे एक-दूजे से दूर
न मिलन की सरगम हो॥
उस संसार से अब
मैं छुटकारा चाहती हूँ।
उस बचपन के गाँव में
मैं-जाना चाहती हूँ।

Priyanka

प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार,
उब्बा भवन, आर्यनगर, हिसार (हरियाणा)-127045

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • कर्तव्य बोध | Hiaku Kartavya Bodh

    कर्तव्य बोध ( Kartavya bodh )   कर्तव्य बोध जीवन में हमको मार्ग दिखाते कर्म शुभ हो भाव विमल सारे यश दिलाते उन्नति पथ बढ़ते रहो सदा प्रगति पाते सम्मान सदा बुजुर्गों का करना आशीष पाते छोटों को प्यार बड़ों का हो आदर सद्गुण आते शिक्षक सदा संस्कार सिखलाते सम्मान पाते रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन…

  • आपकी समझ | Aapki Samajh

    आपकी समझ ( Aapki samajh )   घर से निकलने से पहले और लौट आने के बाद देख लिया करो खुद को वक्त के आईने में जीवन की समझ आसान होगी कल के रास्ते सुगम होंगे हर नया रिश्ता और मुलाकात खुलकर सामने नही आते मध्यान्ह तक कहानी को समझना ही होता है दूसरे पटाक्षेप…

  • कमल कुमार सैनी की कविताएं | Kamal Kumar Saini Poetry

    सब एक जैसे ही है सब एक जैसे ही हैहांसब एक जैसे ही हैसब कहते हीं सही हैहोता भी यही हैमनोविज्ञान कहता हैलगभग भावनाओं का जालसभी मेंसमान रहता हैमेरे वाला/मेरे वालींअलग हैं यह वहम हैसब उसी हाड़ मांस किबनावट हैये जो बाहरी रंग हैये सिर्फ सजावट हैकुछ में चमक हैकुछ में फिकापन है सब्र अब…

  • रंगीन है मौसम | Rangeen hai Mausam

    रंगीन है मौसम ( Rangeen hai Mausam )   रंगीन है मौसम रंगीला है आलम फूलों से कलियों से कुछ रंग ले उधार इंतजार में तेरे मैं बैँठी तन मन संवार धीरे से हौले से चोरी से सबसे छुपते से ज़रा सा रंगवा लो खुदको थोड़ा सा रंग जाओ मुझको विरह की बदरंगियों को इँद्रधनुषी…

  • फूलों सा मुस्काता चल | Hindi Poetry

    फूलों सा मुस्काता चल ( Phoolon sa muskata chal )   फूलों सा मुस्काता चल, राही गीत गाता चल। मंजिल  मिलेगी  खुद, कदम  बढ़ाना  है।   आंधी तूफान आए, बाधाएं मुश्किलें आए। लक्ष्य  साध  पथ  पर, बढ़ते  ही जाना है।   नेह मोती बांट चलो, हंस हंस खूब मिलो। अपनापन  रिश्तो  में, हमको  फैलाना है।…

  • अष्ट दीप दान

    अष्ट दीप दान आदि लक्ष्मी अर्पित करें, प्रथम दीप का दान।ह्रदय बुद्धि शीतल करें, और बढ़ाएँ मान।। 1।। धन लक्ष्मी को दीजिये, दूजा दीपक दान।भौतिक सुख सम्पन्नता, मान और सम्मान।। 2।। कौशल प्रतिभा ज्ञान का, दीप तीसरा दान।विद्या लक्ष्मी जान कर, मनुज बढ़ाया मान।। 3 ।। अन्न बिना जीवन नही, अर्पित लक्ष्मी धान ।चौथा दीपक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *