डॉ. कामिनी व्यास रावल की ग़ज़लें | Dr. Kamini Vyas Poetry

छंद-मनहरण घनाक्षरी

कण्ठ शोभे सर्प माला ,शिव  पिये  विष प्याला
बेल पत्र अति प्रिय
त्रिशूल वो धारी है ।

सोम शिव  सिर सोहे, संग गंगा मन मोहे
डमरू लिए हाथ में
नंदी की सवारी है।

शिव पूजे वर मिले , शिव कृपा सृष्टि चले 
धन धान भर देते
भोला वो भंडारी है ।

हर पीड़ा हर हरे , हर काम हर करें
हर  बाधा हरो प्रभु
विनती हमारी है ।

किशन बाँसुरी तूने जब भी बजाई

किशन बाँसुरी तूने जब भी बजाई
तिरी राधिका भी चली दौड़ी आई

नहीं और कुछ देखने की तमन्ना
तुम्हारी जो मूरत है मन में समाई

हुई राधिका सी मैं भी बाबरी अब
कथा भागवत माँ ने जब से सुनाई

रहे भक्त तेरी शरण में सदा जो
भंवर से उसी की है नैया बचाई

किया नाश‌ तुमने अधर्मी का जग में
सदा सत्य की राह सबको दिखाई

दिया कर्म का ज्ञान सारे जगत को
चहूँओर ऐसी अलख है जगाई

लगी नाचने कामिनी होश खोकर
अजब साँवरे तुमने लीला रचाई

यूँ भरोसा न सब पर किया कीजिए

यूँ भरोसा न सब पर किया कीजिए
कौन है दोस्त दुश्मन पता कीजिए

ठेस लगने न पाये कभी दोस्त को
ध्यान इस बात का भी रखा कीजिए

रूठ जाये अगर दोस्त तो आप ख़ुद
खैरियत उसकी जा कर लिया कीजिए

नाज हो दोस्ती पर सदा ही हमें
साथ इक दूसरे का दिया कीजिए

मुश्किलें ज़िन्दगी में कभी आ गई
राह में राहबर बन मिला कीजिए

कामिनी ये कहे दोस्तों दोस्ती
फर्ज है बस वफा से अदा कीजिए

आ गई है बहार सावन में

आ गई है बहार सावन में
बाजे दिल के सितार सावन में

लग गये वो भी आज इठलाने
उन पे भी है ख़ुमार सावन में

सौंधी धरती की हो गई ख़ुशबू
पड़ते ही इक फुहार सावन में

देखकर इन हॅंसी फ़िज़ाओं को
दिल हुआ बेक़रार सावन में

काग़ज़ी कश्तियां चलाते थे
मिल के बचपन के यार सावन में

तुम ज़रा बज़्म में सुना दो अब
गीत कुछ खुशगवार सावन में

कामिनी तुम संभालो दिल अपना
हो न जाये शिकार सावन में

प्यार के रंग चेहरे पे छाने लगे

वो जो दिल के मुहल्ले में आने लगे
प्यार के रंग चेहरे पे छाने लगे

होली होली है कह कर मेरे हमनवा
रंग मुझ पर गुलाबी उड़ाने लगे

जो हमें रोज छुप -छुप कभी देखते
जाम वो अब नजर के पिलाने लगे

नाच गाने लगे है सभी आज तो
मौज में ढोल ताशे बजाने लगे

देखकर रंग की यह बहारे सनम
ख़्वाब सतरंगी से झिलमिलने लगे

चाहते हो अगर जानो-दिल से हमें
क्यूँ हमारी वफा आज़माने लगे

जैसे राधा किशन खेलते रंग थे
उस बहाने कभी तो बुलाने लगे

आई कान्हा की टोली जब गाँव में
पर्व हिलमिल के सब ही मनाने लगे

कामिनी छोड़ दो गम की बातों को अब
आपके साथ हम मुस्कुरना लगे

डॉ कामिनी व्यास रावल

(उदयपुर) राजस्थान

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • झूठा ज़रूर निकलेगा | Jhutha Zaroor Nikalega

    झूठा ज़रूर निकलेगा ( Jhutha Zaroor Niklega ) तेरा ये फ़ैसला झूठा ज़रूर निकलेगा कुसूरवार जो था बेकुसूर निकलेगा यक़ीं है शोख का इक दिन ग़ुरूर निकलेगा वो मेरी राह से होकर ज़रूर निकलेगा पलट रहा है वरक़ फिर कोई कहानी के न जाने कितने दिलों का फ़ितूर निकलेगा पिला न साक़िया अब और जाम…

  • तीर बरसाता है पर नायक नहीं है

    तीर बरसाता है पर नायक नहीं है तीर बरसाता है पर नायक नहीं हैशायरी करता है संहारक नहीं है अनकहे अध्याय इंसा क्या पढ़ेगाज़िंदगी जीता है संचालक नहीं है वेदना ही वेदना है शायरी मेंवृक्ष यह भी कोई फलदायक नहीं है वो जो दौलत के लिए रिश्ते ही छोड़ेआदमी तो है मगर लायक़ नहीं है…

  • ज़िंदगी खुल के जियो | Zindagi Khul ke Jiyo

    ज़िंदगी खुल के जियो ( Zindagi Khul ke Jiyo ) ज़िंदगी खुल के जियो बस ये भरोसा करकेएक दिन मौत बुला लेगी इशारा करके कौन ऋण इनका चुका पाया है इस दुनिया मेंअपने माँ बाप को छोड़ो न किनारा करके आपकी दीद को हर रोज तड़पते हैं हमथक गए चाँद का हर रात नज़ारा कर…

  • मुलाक़ात कीजिए | Mulaqaat Kijiye

    मुलाक़ात कीजिए ( Mulaqaat Kijiye ) काबू में पहले अपने ये जज़्बात कीजिएफिर चाहे जैसे हमसे मुलाक़ात कीजिए जिस में ख़ुशी हो आप की वोही करेंगे हमज़ाहिर तो अपने आप ख़यालात कीजिए फ़ुर्क़त की धूप सहने- चमन को जला न देशिकवे भुला के प्यार की बरसात कीजिए अफ़साना मत बनाइये छोटी सी बात कामुद्दे की…

  • हमेशा इश्क में

    हमेशा इश्क में हमेशा इश्क में ऊँची उठी दीवार होती हैनज़र मंज़िल पे रखना भी बड़ी दुश्वार होती है सभी उम्मीद रखते हैं कटेगी ज़ीस्त ख़ुशियों सेनहीं राहत मयस्सर इश्क़ में हर बार होती है । बढ़े जाते हैं तूफानों में भी दरियादिली से वोदिलों को खेने वाली प्रीत ही पतवार होती है नहीं रख…

  • छोड़ो ना | Chhodo Na

    छोड़ो ना ( Chhodo na )   साल नया तो झगड़ा अपना यार पुराना छोड़ो ना मिलना जुलना अच्छा है तुम बात बनाना छोड़ो ना। भूल गए जो रूठ गए जो नज़रें फेरे बैठे हैं यादों में घुट घुट कर उनकी अश्क़ बहाना छोड़ो ना। दरिया, सहरा, सागर ,बादल ,कैद किया सब जुल्फ़ों में औरों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *