मकर संक्रांति ( हाइकु )

मकर संक्रांति ( हाइकु )

मकर संक्रांति ( हाइकु )

 

१.
संक्रांति पर्व
गुड़ तिल चुड़ा का-
महत्त्व बड़ा।

२.
उत्तरायण
सूर्य की रश्मियों में-
तेज बहुत।

३.
दिखे आकाश
पतंगबाजी कला-
उड़ाएं बच्चे।

४.
डुबकी लगे
जलधि सरोवर-
आलस्य मिटे।

५.
दान ध्यान में
दीन हीन की सेवा-
रखें अग्रणी।

६.
जीवन तणे
सूरज सा चमके-
आशीष यही।

७.
संग सबके
मिल बैठ उड़ाओ-
चिवड़ा दही।
८.
इसका मजा
सर्वोत्तम अनोखा-
न मेल कोई।
९.
बड़े बुजुर्ग
आशीर्वाद बहुत-
देते सबको।

१०.
गगन भरे
रंगीन पतंगों से-
हर्षित मन।

 

नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें :

Hindi Poem Makarsankranti – मकर संक्रांति

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