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शौक | Shauk
ByAdminशौक ( Shauk ) जले हैं हाथ हमारे चिरागों से आग की लपटों से खेलने का शौक नहीं उठे हैं सवाल नजरों पर भी हमारे जज्बातों से खेलने का हमे शौक नहीं यकीनन होने लगी है दिल से दिल्लगी किसी के ख्वाबों से खेलने का हमें शौक नहीं जहां बिकने लगी हो चाहतें अब…

पहली बारिश | Kavita
ByAdminपहली बारिश ( Pehli Baarish ) बचपन की यादों को समेट रही हूं पहली बारिश की यादे सहेज रही हूं बारिश का पानी सखी सहेली कागज की नाव छपाक सी मस्ती बेफिक्र ज़माना वक्त सुहाना हौले हौले से सपने भीग जाना पिता की मुस्कान मां को चिंता पहली बारिश का अहसास अनोखा ना…

यूनिट एक सौ पैंसठ | Unit 165 par kavita
ByAdminयूनिट एक सौ पैंसठ ( Unit 165 ) काल का भी होगा नही १६५ पर आघात, क्यों कि हम पर है महाकालेश्वर का हाथ। निकले है हम सभी वतन सुरक्षा के लिए, ईश्वर को भी पता है हम करते नही घात।। उम्मीद का दीपक हमने बुझने नही दिया, कई चट्टानें चक्रव्यूह यू ही पार…

समय के साथ | Kavita Samay ke Sath
ByAdminसमय के साथ ( Samay ke Sath ) रहता है वक्त जब मुट्ठी में तब बढ़ जाता है अभिमान कुंजी ताली हाथ में अपने दुनिया लगती धूल समान बदल जाती सब बोली भाषा जुड़ती जाती नित नव आशा चल पड़ते हैं तब पाने को गगन बढ़ती रहती मन की अभिलाषा नज़रों से हो जाता…

इश्क़ का कर्जा | Ishq ka Karz
ByAdminइश्क़ का कर्जा ! ( Ishq ka karz ) अपनी लौ से तपाए ये कम तो नहीं, आए गाहे – बगाहे ये कम तो नहीं। सुर्ख होंठों से मिलता रहे वो सुकूँ, दूर से ही पिलाए ये कम तो नहीं। मेरे तलवों से कितने बहे हैं लहू, आ के मरहम लगाए ये कम तो…

शंकर दयाल सिंह | Shankar Dayal Singh par kavita
ByAdminशंकर दयाल सिंह ( Shankar Dayal Singh ) भगवती कृपा प्रसाद पाया शंकर दयाल नाम भवानीपुरा में जन्मे शंकर कीर्तिमान सरनाम साहित्य कमल पंखुड़ी सा सौरभ लुटाता रहा सांसद रहकर सत्ता में परचम लहराता रहा राष्ट्रप्रेम भरा दीवाना देश प्रेम को जीता था जीवन की धूप छांव प्रेम सुधा रस पीता था संस्कृति सनातन…

