
Similar Posts

त्राहिमाम | Kavita Trahimam
ByAdminत्राहिमाम ( Trahimam ) प्रकृति विकृति समाया चलो इसे उबारें उमस गहन छाया चलो आंधियां लाएं सन्नाटा सघन पसरा चलो चुप्पिया॔ तोड़ें चित्कारें चरम छूती चलो चैतन्य पुकारें प्रचंड प्रलय आया चलो गीत-मीत गाएं बेसुध कराहे बसुधा चले पीयूष पिलायें मानव बना दुर्वासा चलो मनुज बनाएं स्याह सबेरा दिखता चलो सोनल चमकायें मन असुरी…

गीले नयन | Geele Nayan
ByAdminगीले नयन ( Geele nayan ) हो गये गीले नयन, बीता हुआ कुछ याद आया। मूल प्रति तो खो गई, उसका सकल अनुवाद आया। चित्र जो धुंधले हुये थे इक समय की धूल से। आ गया झोंका पवन का खिल उठे फिर झूल से। जो हुआ, कैसे हुआ सब कौन छल कर चल दिया। व्यथित…

मुस्कुराना चाहिए | Muskurana chahiye | Kavita
ByAdminमुस्कुराना चाहिए ( Muskurana chahiye ) गीत कोई प्यारा लगे तो गुनगुनाना चाहिए। देख कोई अपना लगे तो मुस्कुराना चाहिए। प्यार में शर्ते नहीं संबंध निभाना चाहिए। हंसकर सबसे मिले प्रेम जताना चाहिए। अपनापन अनमोल मोती खूब लूटाना चाहिए। पल दो पल हमको भी सदा मुस्कुराना चाहिए। आंधी तूफान आते जाते…

कथा सम्राट | Katha Samrat
ByAdmin‘कथा सम्राट’ ( Katha samrat ) सरल व्यक्तित्व के धनी नाम था धनपत राय, लमही गांव में जन्मे प्रसिद्ध कथाओं के सम्राट, संघर्षो से भरे जीवन को लेखनी में ऐसा ढाला। कालजयी हो गई फिर उपन्यासों की हरेक धारा, रचनाओं में जन- जीवन को गहराई से था उतारा। समाज की अव्यवस्थाओं पर किया कड़ा…

वसंत आया है | Basant Aaya hai
ByAdminवसंत आया है ( Basant aaya hai ) सुना है, एकबार फिर से बसंत आया है, एक बार फिर से बसन्ती बहार लाया, खेतों में फिर से पीली सरसों महक। उठी है, बगियां में नए फूलों का आगमन हुआ है, एक बार फिर से फसलें लहलहा उठी है, फिर से पेड़ों पर नए पत्तों का…

हाॅं हम है ये आदिवासी | Adivasi
ByAdminहाॅं हम है ये आदिवासी ( Han hum hai adivasi ) हाॅं हम है ये आदिवासी, खा लेते है रोटी ठंडी-बासी। रखतें हाथों में तीर-कमान लाठी, क्यों कि हम है इन वनों के ही वासी।। हाॅं हम है ये आदिवासी, बोड़ो भील कहते है सांसी। मर जाते, मार देते जो करें घाती, जंगल, ज़मीं…

