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खामोशी विरोध की भाषा | Kavita khamoshi virodh ki bhasha
ByAdminखामोशी विरोध की भाषा ( Kavita khamoshi virodh ki bhasha ) ये खामोशी, सहमति नहीं विरोध की भाषा है! यह तो मजबूरी है, सहमति में बदल जाना किसी तकलीफ देय घटना के डर से! एक वक्त आएगा सब्र का घड़ा भर जाएगा तब नही होगी कोई मजबूरी न किसी प्रकार का कोई डर तब…
वो महामानव | Dr. Bhim Rao Ambedkar par kavita
ByAdminवो महामानव ( Wo mahamanav ) वन्दन करतें बाबा आपकों हम सब बारम्बार, दिलाया आपनें ही हमें मौलिकता अधिकार। समाजिक शैक्षणिक और आर्थिक अधिकार, समान राजनीति और नागरिक के अधिकार।। आपनें ही इस प्रजातन्त्र को मजबूती है दिया, मत और मूल्य के तत्वों को प्रस्थापित किया। विद्युत-प्राधिकरण के मार्ग को प्रशस्त किया,…
प्रकृति | Prakriti par Kavita
ByAdminप्रकृति ( Prakriti ) इस प्रकृति की छटा है न्यारी, कहीं बंजर भू कहीं खिलती क्यारी, कल कल बहती नदियां देखो, कहीं आग उगलती अति कारी। रूप अनोखा इस धरणी का, नीली चादर ओढ़े अम्बर, खलिहानों में लहलाती फसलें, पर्वत का ताज़ पहना हो सर पर। झरनों के रूप में छलकता यौवन,…
आदिवासी समाज
ByAdminआदिवासी समाज संस्कृतिमें हमारीप्रेम अपार है,प्रेम से ही सुगन्धितसारा संसार आदिवासी समाजने पहलकी प्रकृतिकी, प्रकृतिके बिना खवाबोंका नकोई आकार है…”“समय आने परदिखा देना किआपने क्या किया है मानवता की खातिरजरूरत सेज़्यादा मौनआपके पक्ष कोकमज़ोरसाबित करता है…“जंगल के जीवों सेआपका उचित हैव्यवहारजिससे आपके यश काहोता है विस्तार…”“माटी ने आवाज़दी है साथियों, आजफिर एक रण लड़ा जाएप्रकृति…
क्रोध के अतिरेक से बचें | Poem on anger in Hindi
ByAdminक्रोध के अतिरेक से बचें गुस्सा हर किसी को आता है, यह स्वाभाविक भी है- लेकिन क्या आपको पता है ? यदि आप गुस्सा प्रकट नहीं करते, तो खतरे से हैं खेलते ! गुस्सा आए तो झट करें इजहार, वरना पड़ जाएंगे बीमार । पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी ने खुलासा किया है- ज्यादा देर तक न दबाएं…
हिंदी से हिंद का परचम | Hindi se Hind ka Parcham
ByAdminहिंदी से हिंद का परचम ( Hindi se Hind ka Parcham ) पढ़ूं हिंदी ,लिखूं हिंदी, मेरी पहचान है हिंदी। है माता तुल्य जन जन की, हमारी शान है हिंदी ।। दिए हिंदी नें हमको सूर ,तुलसी कबीर औ मीरा । सुमित्रानंदन भारतेंदु, प्रेमचंद सा दिया हीरा ।। सतत उत्थान हो हिंदी ,सदा सम्मान…

