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पापा की यादें | Papa ki Yaadein
ByAdminपापा की यादें ( Papa ki Yaadein ) पूछ रहे थे तुम मुझसे आंखें क्यों भर आई है गूथ रही थी आटा में बस यू ही कहा था मैंने याद पिता की आई है बरबस ही बरस पड़ी ये अश्रु की जल धारा बनके सावन के इस मौसम में मन ने बातें दोहराई है…

महकती बहारें | kavita mehakti baharain
ByAdminमहकती बहारें ( Mehakti baharain ) फिजाओं में खुशबू फैली खिल गए चमन सारे। झूम-झूम लगे नाचने लो आई महकती बहारें। वादियों में रौनक आई लबों पे मुस्कानें छाई। प्रीत भरे तराने उमड़े मस्त मस्त चली पुरवाई। वृक्ष लताएं डाली डाली पत्ता पत्ता लहराने लगा। मस्त बहारें चली सुहानी दिल दीवाना…

Hindi Diwas Poem | मातृभाषा को समर्पित
ByAdminमातृभाषा को समर्पित ( Matri bhasha ko samarpit ) ***** ( विश्व हिंदी दिवस पर ) हे विश्व विभूषित भाषा हिंदी, संस्कृत से जन्म जो पाई, महिमा महान जग छाई।। शुत्र चतुर्दश माहेश्वर के, शिव डमरू से पाया। ऋषी पांणिनी व्याख्यायितकर, आभूषण पहनाया। बावनवर्णों से वर्णांका की शोभा हो बढ़ाई, महिमा महान जग छाई।।…

कासे कहूँ मैं बात अपने जिया की | Kaise Kahoon
ByAdminकासे कहूँ मैं बात अपने जिया की ( Kaise kahoon main baat apne jiya ki ) कासे कहूं मैं बात अपने जिया की। कही न जाए बात सबसे पिया की। आके बसे हैं सनम लो मोरे हिया में। कोई खास बात होगी मोरे पिया में। छबीली अदाएं सब चाल मस्तानी है। घुंघराले केश काले…

सुगबुगाहट | Sugbugahat
ByAdminसुगबुगाहट ( Sugbugahat ) चलना नही सीखा समय के साथ जो, वक्त ने भी कभी किया नही माफ उसे वक्त करता नही गद्दारी कभी किसी से भी आंधी के पहले ही हवाएं तेज कर देता है हो रही सुगबुगाहट जो सुनता नही उसकी चीखें दुनियां को सुनाई देती हैं यादें तो होती हैं संभलने…

जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि | Kavi ke vishay par kavita
ByAdminजहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि ( Jahan na pahunche ravi vahan pahunche kavi ) जहां नही पहुंच पाये रवि, पहुंच जाते वहां पर कवि। दिख जाती है उनकी छवि, जो होता लेखक एवं कवि।। सोच-समझकर लेता काम, लिख देता वह मन के भाव। मन की बात दर्शाता है कवि, कविता से…

