नींद नहीं आसां

Neend par Kavita | नींद नहीं आसां

नींद नहीं आसां

( Neend Nahi Aasan )

चीज नई नहीं है,
सहज भी नहीं है।
बमुश्किल आती है,
मेहनतकशों को लुभाती है।
आरामतलबों को रूलाती है,
बमुश्किल उन्हें आती है;
अनिद्रा रोगी बनाती है।
खाते औषधि दिन रात,
फिर भी बनती नहीं बात।
बद से बदतर जब होते हालात-
तो निकलते सुबह सैर पर,
चलते दौड़ दौड़ कर।
कुछ उछल-कूद वर्जिश करते,
घंटे भर श्रम कर वापस लौटते;
दिनचर्या अपनी पूरी करते।
मांसपेशियां तब तक खिंच जाती हैं,
शरीर थककर टूट जाता है-
तब यारों स्वत: नींद आ जाती है;
मीठे सपनों में ले जाती है।
सुबह तरोताजा कर उठाती है,
मेहनत अपना कमाल दिखाती है;
अब नींद नहीं सताती है।

नवाब मंजूर

लेखकमो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें : –

Kavita Aise Manayein Holi | कुछ ऐसे मनाएं होली

Similar Posts

  • बोतल | Kavita Botal

    बोतल ( Botal ) ता-ता थैया करती बोतल लाती है बाहर l उसकी ताकधीना-धिन पर नाच रहा संसार l बोतल में है समाया सारे जग का सार l करता है गुलामी बोतल की संसार l बिन बोतल के सूना है संसार बिना बोतल नहीं नहीं है मनुज का उद्धार। बोतल के दम पर आज बच्चा…

  • जिंदगी अपनों के संग | Zindagi Apno ke Sang

    जिंदगी अपनों के संग ( Zindagi apno ke sang ) जिंदगीअपनों के संगनित नए सपनों के संगनए अलबेले रंगकभी खुशीकभी गमहर रोज एक जंगना हो तंगना दंगप्रकृति सुनाती चंगजीने का सीख सही ढंगले सब संबंध रिश्ते नाते संगपी विश्व बंधुत्व की भंगछोड़ दे सभी धपंगलूट लुटा खुशियों के रंगजी ले ओ मलंगआया था रे तू…

  • महारानी लक्ष्मी बाई | Maharani Laxmi Bai Par Kavita

    महारानी लक्ष्मी बाई ( Maharani Laxmi Bai )   आजादी की चिंगारी थी बैरियों पर भारी थी गोरों के छक्के छुड़ाए लक्ष्मी वीर नारी थी   तेज था तलवारों में ओज भरा हूंकारों में रणचंडी पराक्रमी हजारों पर भारी थी   क्रांति काल की कहानी वो झांसी की महारानी बिगुल बजाया रण का राष्ट्र पुजारी…

  • मुराद | Kavita Murad

    मुराद ( Murad )   एक तू ही नही खुदा के आशियाने मे कैद हैं और भी कई इसी अफसाने मे दर्द से हुआ है फरिग् कौन इस जमाने मे खोज ले जाकर भले अपने या बेगाने मे मन माफिक मुराद सभी को हासिल नही कैसे मान लिया कि तेरे लिए कोई मंजिल नही बेशक्,…

  • कुदरत | Kudrat

    कुदरत ( kudrat )    युगों-युगों से निसर्ग की दुनिया दीवानी, चलो आज लिखते हैं कुछ नई कहानी। बाँहें फैलाए खड़ी है ये कुदरत, छेड़ते हैं बातें कुछ उसकी रूहानी। अल्हड़ हवाएँ,वो उड़ते परिन्दे, जगह -जगह छोड़ी है अमिट निशानी। झीलों का देखो वो झलकता बदन, बातें बहुत हैं उसकी आसमानी। नदियों का बहना, नदियों…

  • सृजन के देव विश्वकर्मा | Vishwakarma ji par kavita

    सृजन के देव विश्वकर्मा ( Srijan ke dev vishwakarma )   नवसृजन के आदिदेव सृजक विश्वकर्मा महाराज। अस्त्र-शस्त्र आयुध पूजा साधक करते पूर्ण काज।   कलाकार करे ध्यान आपका झोली विद्या से भरते। भवन निर्माण कला कौशल शिल्पी साधना करते।   भित्ति चित्र काष्ठकला स्वर्ण रजत भूषण जवाहरात। मुंह बोले मूर्तिकलाये चित्रकारी की हो अनोखी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *