आजा साथी धूम मचाएं होली में

Holi Par Kavita | आजा साथी धूम मचाएं होली में

आजा साथी धूम मचाएं होली में

( Aaja Sathi Dhoom Machaye Holi Mein )

 

आजा साथी धूम मचाएं होली में,
थिरक थिरक मौज मनाएं होली में

 

भूलकर सारे राग द्वेष,
हम मिल जाएं होली में।
ढ़ोल नगाड़े ताशे की गूॅ॑जे,
प्रेम रस बरसाएं होली में।

 

आजा साथी धूम.मचाएं होली में,
थिरक-थिरक मौज मनाएं होली में

 

नीला पीला लाल गुलाबी,
रंगारंग हो जाएं होली में।
भर -भर पिचकारी मारे ऐसे,
एक दूजे को भिगाएं होली में।

 

आजा साथी धूम मचाएं होली में
थिरक-थिरक के झूमें गाएं होली में।

 

टेसू पलाश के रंग जमें हैं,
राधा किसन हर्षाए होली में।
प्रिय बसंत भी झूम रहा हैं,
मतवाला होकर होली में।

 

आजा साथी धूम मचाएं होली में
थिरक-थिरक मौज मनाएं होली में

 

तन मन ऐसे रंग लें साथी,
रंग छुटाएं न छूटे होली में।
प्रेम रंग वो चढ़ा लें मन पे,
नेह प्रीत बरसाएं होली में।

 

आजा साथी धूम मचाएं होली में,
थिरक थिरक मौज मनाएं होली में

☘️

कवयित्री: दीपिका दीप रुखमांगद
जिला बैतूल
( मध्यप्रदेश )

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