Aatmhatya Nahi Karne Doonga

आत्महत्या नही करने दूंगा | Aatmhatya Nahi Karne Doonga

आत्महत्या नही करने दूंगा

( Aatmhatya nahi karne doonga ) 

 

आत्महत्या नहीं करने दूंगा
मैं किसी को मरने नहीं दूंगा।।

लडूंगा हर उस परस्थिति से
जिसके आगे हार जाते हैं लोग,
मैं झुकने की सहमति नहीं दूंगा
हार में भी जीत है जानते हैं सभी
में समाधान कोई निकाल लूंगा
पर संघर्ष पथ से अब नही डीगूंगा ।।

आत्महत्या नही करने दूंगा
मैं किसी को मरने नहीं दूंगा ।।

चलते ही जाना जिंदगी नही बस
कर्म भूमि पर अडिग होकर ही
अपना कर्म करना भी पड़ता है
बाधा कोई भी आए मार्ग में
उससे पार निकालना पड़ता है
मैं हर उस बाधा को पार करूंगा
सहियोगी बन कर कर्म करूंगा ।।

आत्महत्या नही करने दूंगा
मैं किसी को मरने नहीं दूंगा ।।

 

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

dubeyashi467@gmail.com

यह भी पढ़ें :-

वृंदावन | Vrindavan

Similar Posts

  • संयुक्त परिवार हमारा | Sanyukt Parivar

    संयुक्त परिवार हमारा ( Sanyukt parivar hamara )    बच्चों-जवानों बुजुर्गों से भरा है आंगन सारा, संस्कारो से जुड़ी हमारी जिसमे विचारधारा। तुलसी पूजन की हमारी यह पुरानी परम्परा, ऐसा है खुशियों-भरा संयुक्त परिवार हमारा।। करते है आदर-सत्कार एवं अतिथि की सेवा, दूध दही पिलाकर इनको करवाते है कलेवा। दादा और दादी का घर में…

  • शिक्षा का महत्व | Shiksha ka mahatva par kavita

    शिक्षा का महत्व  ( Shiksha ka mahatva )   उच्च विचार अंतर्मन दौड़े, ऊंची उड़े उड़ान। प्रगति पथ पर बढ़ चले, उन्नति के सोपान।   स्वप्न सुनहरे सच हो, चले विकास की लहर। सुविधाओं से संपन्न हो, हर गांव हर शहर।   शिक्षा का सूरज दमके, निर्माण हो भरपूर। चहुमुखी विकास करें, हो हर शख्स…

  • धीरे धीरे | Dheere Dheere

    धीरे धीरे ( Dheere dheere )    होता है प्यार ,मगर धीरे धीरे उठती है नजर,मगर धीरे धीरे चढ़ता है खुमार,मगर धीरे धीरे होता है इजहार,मगर धीरे धीरे…. खिलती है कली,मगर धीरे धीरे आते हैं भंवरे ,मगर धीरे धीरे होती है बेकरारी ,मगर धीरे धीरे बढ़ता है इंतजार ,मगर धीरे धीरे…. लरजते हैं होठ,मगर धीरे…

  • रमाकांत सोनी की कविताएं | Ramakant Soni Hindi Poetry

    जलजला हूं जलजला हूं आग की भांति जला हूं।सच्चाई की डगर पे अब बढ़ चला हूं।हौसलों से लिखूं संघर्षों की कहानी।आंधियों तूफानों में निर्भय पला हूं। काव्य रस घोलती कलम सयानी।भावों की धारा बहती उर सुहानी।कुंदन बन सांचे में तपकर ढला हूं।महफिलों में कारवां लेकर चला हूं। वीरों का गुणगान गाता हूं गीतों में।प्रीत भी…

  • सब संसार में | Kavita Sab Sansar Main

    सब संसार में ( Sab Sansar Main )   तांबे की जमी होगी आफताब सर पर होगा हश्र के मैंदा में जब हमारा मिलना होगा होगी न जरूरत कहने की कुछ रब से सारा हिसाब पन्नों मे लिखा अपना होगा कर लो नफ़रत या मुहब्बत पूजा अर्चना या इबादत जाने जाओगे सिर्फ इंसान के नाम…

  • तेरी याद – मेरी कविता

    तेरी याद – मेरी कविता सुनो दिकु… आज जब तेरी खबर मुझ तक आई,आँखें भीग गईं, रूह मुस्काई।सुना — आज भी वही जज़्बा है,दिकुप्रेम तेरे दिल में भी ज़िंदा है। रोक रखा है तुझे वक़्त और क़समों ने,तेरे फ़र्ज़ और रिश्तों ने।तू चाहकर भी कुछ कह नहीं पाती,पर तेरी ख़ामोशी मुझसे बात है कर जाती।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *