Aazam ke dohe

दो दोहे | Aazam ke Dohe

दो दोहे

( Do dohe )

 

रख दिल में  तू अहिंसा,
दुश्मन से मत हार ॥
लड़ दुश्मन से  तू सदा,
बनकर बिन तलवार ॥

 

छोड़ो नफ़रत फ़ूल बन ,
कर मत बातें खार ॥
कर ले सबसे दोस्त तू,
दिल से अपने प्यार॥

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें : –

खुशियों से ही गरीब हूं मैं | Ghazal

Similar Posts

  • वायदों का झांसा | दोहा

    वायदों का झांसा ( Waydon ka jhansa )   वायदों का झांसा देते नेता जुमले बाज़! जान चुकी जनता इन्हें पोल खुली है आज!! देंगे सबको कहता था पंद्रह पंद्रह लाख! सिंहासन पर बैठ गया चुरा रहा अब आंख!! सत्ता में गुंडे -मवाली बैठे नेताओं संग! भ्रष्ट्रचारी ही लड़ रहे भ्रष्ट्रचार की जंग!! मंदिर -मस्जिद…

  • प्रभु श्रीराम पर दोहे | Prabhu Shri Ram Par Dohe

    प्रभु श्रीराम पर दोहे ( Prabhu Shri Ram Par Dohe )   कल्प-कल्प अवतार ले,किए विविध प्रभु कर्म। नित प्रति लीला गान से,रघुवर निभता धर्म।।1 रघुवर लीला गान सुन,कवि रचता नव काव्य। श्रेय मिला जग में उसे,हुआ सहज संभाव्य।।2 युगों-युगों होता रहा,पाप पुण्य का खेल। लेखा जोखा की नियति, राम कराएँ मेल।।3 छोड़ द्वंद्व मन…

  • कलियुग का दोहा | Kalyug ka Doha

    कलियुग का दोहा ( Kalyug ka Doha )   फूल रोपिए शूल पाईए झूठ बोलिए सुख रहिए जान लीजिए माल पाइए भला कीजिए बुरा झेलिये पानी मिलायिये रबड़ी खाइये फ़रेब कीजिए कुबेर अरजिए आंचल फैलायिये अस्मिता गंवायिये ठगते रहिए दनदनाते रहिए महल ठोकिए रहम भूलिए दूसरो खाइये आपन बिसारिये देह दिखाईए द्रव्य दर्शाईये शेखर कुमार…

  • स्वाध्याय | Svadhyaya par doha

    स्वाध्याय ( Svadhyaya )   स्वाध्याय जो नित्य करें, मनन करें सुविचार। चित उज्जवल पावन बने, बहे नेह रसधार। उर उजियारा हो सखे, जगे ज्ञान यशदीप। महके चमन जीवन का, मधुर बजे संगीत। पठन अरू पाठन करे, मनन करे दिन-रात। बुध्दिबल यश वैभव बढ़े, मिले सुधीजन साथ।   रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन नवलगढ़ जिला झुंझुनू ( राजस्थान…

  • हिन्दी दिवस पर पाँच दोहे | Hindi Diwas Par 5 Dohe

    हिन्दी दिवस पर पाँच दोहे ( Hindi Diwas Par 5 Dohe ) हिन्दी मिश्री की डली, सरगम की झंकार।हिन्दी तो मनमोहिनी, अनुरागी संसार।। हिन्दी भाषा में सभी, कला ज्ञान-विज्ञान।सबसे पहले हम करें, इस भाषा का मान।। देवनागरी लिपि अथक, अनुपम अनश अनन्य।हिन्दी के उपकार से, कौन नहीं है धन्य।। दिशा-दिशा में हो रहा, हिन्दी का…

  • प्रेम | Prem Ke Dohe

    प्रेम  ( Prem )   १) प्रेम की बंसी सुमधुर,मंत्रमुग्ध करी जाए। सुध-बुध का न पता चले,एकांत समय बिताए।।   २) जीवन में प्रेम महान, कुछ न इसके समान। मान सम्मान जहां मिले,वही है स्वर्ग स्थान।।   ३) नमन से नयन मिलाओ, आंखें कर लो चार। प्रेमरोग में जो पड़े,छुट जावे संसार ।।   ४)…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *