दो दोहे | Aazam ke Dohe
दो दोहे
( Do dohe )
रख दिल में तू अहिंसा,
दुश्मन से मत हार ॥
लड़ दुश्मन से तू सदा,
बनकर बिन तलवार ॥

( Do dohe )
शायर: आज़म नैय्यर
योग पर रचित दोहे मन लगाकर योग करें,जीने की है कला।मजहब से ऊपर योग,होगा सबका भला। सूरज को करना नमन,ये योगों का सार।तनाव मुक्त होंगे सब,मिला हमें उपहार।। मिट जाएगी थकावट,मिलता है आराम।दुनिया की पहचान है,बने योग से काम।। वजन घटाए आपका,रोज करेंगे योग।संकल्प सबको लेना,मेरा यह अनुरोध।। करे योग – रहे निरोग,सेहत का है…

पहले जैसे अब नहीं पहले जैसे अब नहीं, घर चौबारा गेह!गली गाँव बातें कहाँ, मुस्काता वह नेह? नयन टुकटुकी बाँध कर, पथ को रहे निहार!वह रिमझिम बारिश कहाँ, गया कहाँ वह प्यार? दीपों की टिमटिम मदिर, मलिन वदन का फूल!भँवरों का गुंजन नहीं, कहाँ सरित का कूल? चित्र उकेरे भित्ति पर, याद करूँ हर बैन।बरगद…

राम के दोहे ( Ram ke Dohe ) घट-घट में रावण बसे, करे राम का जाप ! द्वेष भाव मन से मिटा, राम मिलेंगे आप !! राम जगत के देव है, देते सबको नाम ! मूरख प्राणी है चला, देने उनको धाम !! राम नाम की लहर में, तरते दुर्जन आम !…

दुर्लभ ( Durlabh ) दुर्लभ है मां बाप भी, मिलते बस एक बार। सेवा कर झोली भरो, करो बड़ों को प्यार। मिले दुर्लभ औषधियां, बड़े जतन के बाद। असाध्य व्याधियां मिटे, हरे हृदय विषाद। कलाकृति पुराणिक हो, बहुमूल्य समझ जान। दुनिया में दुर्लभ सभी, रचता वो भगवान। अब तो दुर्लभ हो…

स्वाध्याय ( Svadhyaya ) स्वाध्याय जो नित्य करें, मनन करें सुविचार। चित उज्जवल पावन बने, बहे नेह रसधार। उर उजियारा हो सखे, जगे ज्ञान यशदीप। महके चमन जीवन का, मधुर बजे संगीत। पठन अरू पाठन करे, मनन करे दिन-रात। बुध्दिबल यश वैभव बढ़े, मिले सुधीजन साथ। रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन नवलगढ़ जिला झुंझुनू ( राजस्थान…

राखी का त्यौहार चरणों अपने राखिये, मूरख हमको जान । प्रथम राखी आपको, परम पिता भगवान ।। रेशम की डोरी लिए, कुमकुम रोली साथ । रक्षा वचन में बांधती, बहना राखी हाथ ।। राखी सबको बांधिये, गैर सखा हो कोय । जनक, तनय या तात सम, रिश्ता जोई होय ।। राखी के त्यौहार में, रखना…
