Abhi Hai Waqt

अभी है वक्त | Abhi Hai Waqt

अभी है वक्त

( Abhi hai waqt )

 

खौल उठना है खून ,जब
देती है दिखाई नग्न ता
वह सोच की हो या परिधान की
या हो डूबती संस्कृति और सभ्यता

पुरखों से मिली धरोहर को
निगल रही यह आधुनिकता
पुरुषत्व हीन हो रही नव पीढ़ी
गांजा चरस अफीम की विविधता

शर्म , लाज, हया सब खत्म हो रहे
आदर, लिहाज, सम्मान सब भस्म हो रहे
उठ रहीं दीवारें घर के भी भीतर भीतर
भाई-भाई के ही दुश्मन सब हो रहे

जुआ, शराब ,बलात्कार का बढ़ना
दंगे , फसाद , हिंसा अनाचार का बढ़ना
हो जाता है मन विवश देख हाल
जाने किस असुर ने चली यह चाल

भारत, रत ज्ञान मे रहा सदा
विश्वा गुरुकुल के पद आसीन रहा सदा
अब के यह भारत जाने कहां जा रहा
अभी भी है वक्त संभल जाओ कह रहा

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

रास्ते | Raste

Similar Posts

  • वाहवाही लूटने लगे | Kavita vaahavaahi lootane lage

    वाहवाही लूटने लगे ( Vaahavaahi lootane lage )   छा गए बड़े मंच पर लेकर शब्दों के माया जाल। हथकंडों से शोहरत पा छवि बनाई बड़ी कमाल।   वाकपटुता के माहिर हो वाह वाही लूटने लगे। प्रसिद्धि के चक्कर में तार दिलों के टूटने लगे।   अपार जनसमूह सारा चलती हास्य की फुहार। व्यंग्य बाण…

  • रंग | Kavita Rang

    रंग ( Rang )   रंगो की समझ हो तो तस्वीर बना दो। छंदो की समझ हो तो फिर गीत बना दो। जज्बात मे लहर हो तो प्यार तू कर ले, जो कुछ नही आता तो दिवाना बना दो।   दिल पे तुम्हारी चाहतो के जो निशान है। वो घाव बडे गहरे है और लाइलाज…

  • छोटा सा बस्ता | Kavita Chhota sa Basta

    छोटा सा बस्ता ( Chhota sa Basta )   मांँ मुझे छोटा सा बस्ता दिला दे मांँ मुझे छोटा सा बस्ता दिला दे बस्ता दिला दे मांँ,बस्ता दिला दे बस्ता ले जाऊंगी मैं स्कूल जाऊंगी मां मुझे छोटा सा बस्ता दिला दे मां मुझे छोटा सा पेन दिला दे मां मुझे छोटा सा पेन दिला…

  • गुरु नमन | Guru par kavita

    गुरु नमन ( Guru Naman )   गुरु क्या मिले जिंदगी मिल गई है। सारे जहां की खुशी मिल गई है।। अनमोल मोती भरा सिंधु सारा। दमकता सूरज गुरु भाग्य सितारा।। मिले वरदहस्त किस्मत खुल गई है। गुरु क्या मिले जिंदगी मिल गई है।। अंगुली पकड़कर रास्ता दिखलाया। दुनिया का अनुभव हमें बतलाया।। जलाया ज्ञान…

  • कोई प्रहरी | Geet Koi Prahari

    कोई प्रहरी ( Koi Prahari ) कोई प्रहरी काश लगा दे,ऐसा भी प्रतिबंध । किसी ओर से बिखर न पाये,धरती पर दुर्गंध ।। दिया हमीं ने नागफनी अरु,बबूल को अवसर क्यों बैठे हम शाँत रहे, सोचा कभी न इस पर कभी तो कारण खोजो आये,कैसे यहाँ सुगंध ।। गुलमोहर -कचनार-पकड़िया , आम -नीम-पीपल आज चलो…

  • सबके सहारे राम | Sabke Sahare Ram

    सबके सहारे राम ( Sabke Sahare Ram ) विधा कृपाण घनाक्षरी   राम राम भज मन, पुलकित तन मन। रघुवर राजाराम, लीला है अपरम्पार। राघव राम रट लो, जय श्रीराम भज लो। अवधपुरी पधारे, रघुपति करतार। जन जन प्यारे राम, सबके सहारे राम। मंझधार डूबी नैया, रामजी लगा दे पार। ऋषि मुनि ध्यानी योगी, माला…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *