Sanvedanaen

संवेदनाएं | Sanvedanaen

संवेदनाएं

( Sanvedanaen ) 

 

जिम्मेदारियों के बोझ से
जब दब जाती है जिंदगी
सपने रह जाते हैं सपने ही
तब न रात होती है न दिन निकलता है

सुबहोशाम मे फर्क ही नहीं होता
दुनियावी भीड़ के माहौल मे
किसी अपने को तलाशती नजर
भटकती ही रह जाती है
पर ,कोई अपना नहीं मिलता

खत्म हो जाते हैं अपने बेगनों के फर्क
जो थाम ले हाथ मुसीबत मे
वही अपना सा लगता
किसी उम्मीद के नाम पर भी
नदी पर करना आसान हो जाता है

संवेदनाएं व्यक्त करनेवाले लोग
अक्सर तमाशाई ही होते हैं
पीठ पीछे का उनका उपहास
हो तो जाता है जानलेवा ,किंतु
मजबूरियां खामोश कर देती हैं

जब बढ़ जाता है जिम्मेदारी का बोझ
स्वयं को अकेले ही ढोने का साहस ही
आता है काम अपने

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

खोखले शब्द | Khokhale Shabd

Similar Posts

  • श्री गुरु नानक देव जी | Guru Nanak par kavita

    श्री गुरु नानक देव जी ( Shri Guru Nanak Dev Ji )    प्रथम गुरुवर आप है गुरु नानक सिख समुदाय, सभी की ज़ुबान पर आपका नाम पहला आय। वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह, बिना गुरु के मंजिल तक कोई पहुॅंच नही पाय।।   कल्याणचन्द पिता थें जिनके व तृप्ता थी माता,…

  • चरित्रहीन | Charitraheen

    चरित्रहीन ( Charitraheen ) “घर आकर बताता हूँ”जब जब उसने कुछ पूछना चाहाहमेशा यही उत्तर मिलाऔर फिर कभी ना वो समय आयाना ही उसे कुछ बताया गया।उसे कभी नहीं लगा किवह भी किसी की ज़िंदगी का हिस्सा है।दोनों कभी नहीं बन पायेएक दूसरे के सहभागी,बस एक दूसरे को ज़िम्मेदारी बनढोते रहे।बिना ये सोचे किएक समय…

  • नमामि गंगे | Namami Gange

    नमामि गंगे ( Namami Gange ) नमामि गंगे , नमामि गंगे ।हर हर गंगे , हर हर गंगे ।आओ गंगा में, डुबकी लगायें ।तन और मन , को शुद्ध बनायें ।गंगाजल की ,यह शीतलता ।करती दूर ,ह्रदय की मलिनता ।आओ शुद्ध करें ,इस जल को ।कैसे भी बस , स्वच्छ यह जल हो ।जय हो…

  • शादी की सालगिरह | Shaadi ki Salgirah par Kavita

    शादी की सालगिरह ( Shaadi ki salgirah )    आज हमारी है साथियों वो शादी की सालगिरह, जोड़ी सलामत रहें हमारी दुआएं देना इस तरह। कभी ना उतरे हम दोनों का चढ़ा प्रेम का बुखार, खुशियों का यह सांसारिक मिलन रहें इस तरह।। ग़म का साया कभी न आएं खुशियों बीच हमारे, हर दिन नई…

  • मन की पुकार | Man ki Pukar

    मन की पुकार हर धड़कन तेरे नाम से धड़कती है,तेरी यादों की लौ दिल में चमकती है।आज भी तेरी हंसी का दीवाना हूँ मैं,तुझसे बेशुमार प्यार निभाना चाहता हूँ मैं। तेरे कदमों की आहट अब भी सुनाई देती है,मेरे ख्वाबों में हर रात तू ही दिखाई देती है।तेरे बिना हर लम्हा अधूरा सा है मेरा,आज…

  • शिखा खुराना जी की कविताएँ | Shikha Khurana Hindi Poetry

    आपरेशन सिंदूर आओ सिंदूर मिटाने वालों, लहू से प्यास बुझाने वालों।सिंदूर की ताकत तुम अब देखोगे, सिंदूर को लहू बनाने वालों। घर में घुसकर तुम्हारे तुम्हें सबक सिखाने आएं हैं।जांबाज हमारे आसमान से तुमपर आग बरसाएं हैं। हिंदुस्तान क्या कर सकता है,आज तुम्हें दिखाते हैं।मासूमों की मर्मर हत्याओं का मज़ा तुम्हें चखाते हैं। बहुत सहा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *