अपनी हिंदी | Apni Hindi

अपनी हिंदी

( Apni Hindi ) 

 

संस्कृत की बेटी है हिंदी
भारत माता के माथे पर
बिंदिया सी सब को भाई है!
भारत राष्ट्र के कई राज्यों से
विदेशों में गौरवान्वित होकर
हिंदी ने भारत की शान बढ़ाई है।।

हिंदी ही हमारी मातृभाषा
हिंदी ही हमारी पहचान है !
राजभाषा ,राष्ट्रभाषा हमारी
ये और यही हमारा सम्मान है
भारत को गौरवान्वित करती,
कण कण में हिंदी विद्यमान है।।

हिंदी अवशोषित करती है
सभी भाषाओं को स्वयं में,
अंग्रेजी का भी करती सम्मान है
भाषा मिलजुल कर हिंदी में रहती
संगम भी हिंदी की एक पहचान है
इसीलिए हिंदी सरल शोभायमान है।।

शुद्ध सरल और सात्विक हिंदी ही
हमारे उत्तर भारत में बोली जाती है
और राज्यों में घुल मिलकर हिन्दी,
सबके साथ मिस्री सी घुल जाती है
यही तो हमारी हिंदी का श्रेष्ठ काम है
हिंदी भाषा पर मुझे स्वाभिमान है।।

 

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

dubeyashi467@gmail.com

यह भी पढ़ें :-

कृष्ण जन्माष्टमी | Krishna Janmashtami

Similar Posts

  • वक्त कब करवट बदलें | Waqt Kab

    वक्त कब करवट बदलें ( Waqt kab karwat badle )    वक्त कब करवट बदल ले, क्या-क्या खेल दिखाता है। वक्त कहकर नहीं बदलता, समय चक्र चलता जाता है। मौसम रंग बदलता रहता, पल-पल जब मुस्काता है। कालचक्र के चक्रव्यूह में, नव परिवर्तन तब आता है। समय बड़ा बलवान प्यारे, बदलते किस्मत के तारे। गुजरा…

  • पहचान | Kavita Pahchan

    पहचान ( Pahchan )   हम खामोश ही रहे और वो बोलते चले गए शुरू हि किया था हमने बोलना और वो उठकर चले गए यही हाल है आजकल के अपनों का न गिला रखते हैं न शिकायत करते हैं माहिर हो गए हैं वो वक्त के बस बोलने की कला रखते हैं उम्मीद रख…

  • छलावा

    छलावा उस धरा सेइस धरा तकउस गगन सेइस गगन तकउस जहां सेइस जहां तकउस परिवेश सेइस परिवेश तकउस गांव सेइस शहर तकका सफर…रहा नहीं आसानजिसने बदल दिएसारे अरमान…अपनों के साथजीने का सपनाबन कर…रह जाएगा सपनाजो हो नहीं सकताअब कभी अपनाअब अपनों को…नहीं दे पाते वो सम्मानजो थे कभी जीवन की जान श्याम सुंदर यह भी…

  • तपन | Tapan

    तपन ( Tapan )    तपन है जैसे तपती रेत मे नंगे पांव की मिली न बसर जिंदगी मे किसी छांव की चलता ही रहा ,फजर से शामेरात तक मिली न सराय कोई ,शहर से गांव तक बच्चों ने कहा ,भविष्य है उनके बच्चों का बेटियों ने कह दिया ,पापा हमे भूल गए अपनों की…

  • नवरात्रि पर्व (अश्विन )

    नवरात्रि पर्व (अश्विन ) भुवाल माता पर आस्था अम्बर हैं ।यह निश्छल ,अविरल , अपलक है ।यह सत्यं-शिवं -सुन्दरं क्षेमंकर हैं ।यह आत्म पथ फलदायी सुखकर है ।भुवाल माता का स्मरण सदा सुखदायी है ।भुवाल माता पर आस्था अम्बर हैं ।जब तक रहता है नील गगन में तारातब तक छविमान दिखता लगता प्याराजब अपने उच्च…

  • यूं ना मुस्कुराया करो | Yun na Muskuraya Karo

    यूं ना मुस्कुराया करो ( Yun na muskuraya karo )    हमसे मिलकर तुम यूं ना मुस्कुराया करो। मुस्कानों के मोती यूं हम पर लुटाया करो। हंसता हुआ चेहरा मन को मोहित कर जाता। हंसी की फुलझड़ियां सबको दिखाया करो। लबों की ये मुस्कान क्या गजब ढहाती है। दिल तक दस्तक देती झंकार सुनाया करो।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *