लोग | Log
लोग ( Log ) जिंदा रहने के नाम पर, केवल जी रहे हैं लोग मिलने के नाम पर, केवल मिल रहे हैं लोग बेवफाई का आलम यह, खुदे से ही खुद को छल रहे हैं लोग यकीन करें किस पर, मतलबी शहर के बीच अपना कहकर, अपनों का ही गला घोट रहे हैं लोग…
विरह वेदना ( Virah Vedna ) सोहत सुघर शरीर नीर अखियन से बहे आतुर अधर अधीर पीर विरहन के कहे। चित में है चित चोर शोर मन में है भारी सालत शकल शरीर तीर काम जब मारी । शीतल सुखद समीर शरीर तपन जस जारे दाहत प्रेम की पीर हीर बिन कौन उबारे। मन…
क्या कभी आप ने देखा है, या महसूस किया है, कभी समझने की कोशिश की है, कि जब एक बहुत ही नाजुक व नन्हे पौधे को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है, वो भी जड़ से उखाड़ कर, उसे दूसरी माटी में बोया जाता है, एक वातावरण से वह नन्हा सा…
तेरी दोस्ती ( Teri Dosti ) तेरी दोस्ती से, गुलजार जिंदगी मेरी पाकर तुम्हारा साथ, जीवन सम प्रसून खिला । बोझिल सी राहों पर, आनंद भरा शकून मिला । जले नव आशा दीप , दूर सारी नैराश्य अंधेरी । तेरी दोस्ती से,गुलजार जिंदगी मेरी ।। मेरा जीवन तो जैसे, तपता रेगिस्तान था । कदम कदम…
चलो कुछ मीठा हो जाए ( Chalo kuch meetha ho jaye ) चलो कुछ मीठा हो जाए, प्यार के गीत हम गाए। अधर रसधार बरसाए, तराने मनभावन लाएं। चलो कुछ मीठा हो जाए मोती प्यार भरे लेकर, सजाएं दिलों की महफिल। खुशियां आपस में बांटे, जोड़े हम दिलों से दिल। बैठ कर दो घड़ी…
अमराई बौराई पीपल के पात झरे पलाश गये फूल। अब भी न आये वे क्या गये हैं भूल। गेंदे की कली कली आतप से झुलसी, पानी नित मांग रही आंगन की तुलसी, अमराई बौराई फली लगी बबूल। पीपल के पात झरे पलाश रहे फूल। काटे नहीं रात कटे गिन गिन कर तारे, कोयलिया कूक…
तेरी चाहत के सिवा ( Teri Chahat ke Siva ) कई काम हैं और भी जिंदगी में तेरी चाहत के सिवा वक्त की पेचीदगी ने सोचने की मोहलत ही दी कहाँ आरजू तो थी बहुत तेरी बाहों में सर रखने की कमबख्त कभी तकदीर तो कभी खामोशी भी दगा दे गई तेरे आंचल से…
याद न जाये, बीते दिनों की ( Yaad Na Jaye Beete Dinon Ki ) बैठी हूँ नील अम्बर के तले अपनी स्मृतियों की चादर को ओढ़े जैसे हरी-भरी वादियों के नीचे एक मनमोहक घटा छा जाती है। मन में एक लहर-सी उठ जाती है जैसे कोई नर्म घास के बिछौनों पर कोई मंद पवन…
बसंत पंचमी ( Basant Panchami ) ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥ हो जाये हमारा जीवन साकार ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥ चहुँ और हो बसंत जैसी बहार जीवन बने सदैव सुखकार रहे निरामय हमारे विचार ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥ निर्लिप्तता से जीवन जिये भार मुक्त हम खुद…
समस्या नहीं, समाधान बनें जब जनमानस उद्वेलित हो, अथाह नैराश्य भावों से । हिम्मत नतमस्तक होने लगे, अनंत संघर्षी घावों से । तब सकारात्मक सोच से, प्रेरणा पुंज अनूप गान बनें । समस्या नहीं, समाधान बनें ।। जब जीवन पथ पर, संकट बादल मंडराने लगे । लक्ष्य बिंदु भटकाव पर, आत्म विश्वास डगमगाने लगे…