Basant Panchami

बसंत पंचमी | Basant Panchami

बसंत पंचमी

( Basant Panchami )

 

ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥
हो जाये हमारा जीवन साकार
ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥
चहुँ और हो बसंत जैसी बहार
जीवन बने सदैव सुखकार
रहे निरामय हमारे विचार
ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥
निर्लिप्तता से जीवन जिये
भार मुक्त हम खुद भी बने
ना औरों का हो हमारे भार
ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥
हमको करे हमारे कृत कर्मों से
हमेशा – हमेशा ज़माना याद
सदियों तक जिन्दा रहे हमारे संवाद
ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥
खुले हमारे ज्ञान के द्वार
अपनी आत्मा अपना खुद
करे शुद्ध रूप साक्षात्कार
ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥
ना राग रहे ना द्वेष हमारे
बुझे हमेशा हमेशा के लिये
जन्म मरण की यह आग
ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥
हो जाये हमारा जीवन साकार
ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

यह भी पढ़ें:-

विश्व कैसर दिवस | Vishwa Cancer Divas

Similar Posts

  • सात्विक गौरव के है ये पल

    सात्विक गौरव के है ये पल निशांत बच्छावत के 16 वाँ जन्मदिन पर मेरे भाव- पूर्वजों के पुण्य – पुंज और आशिर्वाद के निहितार्थ वात्सल्यमय निशांत के जन्मदिन के शुभ – दिवस पर उसको स्नेहासिक्त जीवन के “प्रदीप “ पाने की शुभकामनाएँ । सात्विक गौरव के है ये पलपुरुषार्थ का मिला जो सुफलव्यक्तित्व द्वय को…

  • सरस्वती-वंदना

    सरस्वती-वंदना ( Saraswati-vandana ) ? वर्षा में … भीगे जंगल को, न अग्नि जला पाएगी। अध्ययन में… डूबे शख्स पर, न दु:ख की आंच आएगी।। तभी निखर पाएगी… “कुमार” तेरी काव्य-कला भी। विद्या-देवी सरस्वती, जब निज कृपा बरसाएगी।। ? कवि व शायर:  मुनीश कुमार “कुमार” (हिंदी लैक्चरर ) GSS School ढाठरथ जींद (हरियाणा) यह भी पढ़ें…

  • दो घोड़ों की सवारी | Kavita Do Ghodon ki Sawari

    दो घोड़ों की सवारी ( Do ghodon ki sawari )    दो अश्वों पे होकर सवार मत चलना रे प्यारे। मुंह के बल गिर जाओगे दिन में देखोगे तारे। चाहे जितनी कसो लगाम मिल ना सकेगा विराम। कोई इधर चले कोई उधर चले गिर पड़ोगे धड़ाम। दो नावों पे दो घोड़ों पे वो मंझधार में…

  • प्रथम हो शिक्षक का सम्मान | Geet shikshak ka samman

    प्रथम हो शिक्षक का सम्मान ( Pratham ho shikshak ka samman )     गुरु है गुण निधियों की खान प्रथम हो शिक्षक का सम्मान गुरु है ज्ञान का सागर सारा भरा रग रग में स्वाभिमान प्रथम हो शिक्षक का सम्मान   बहाते ज्ञान की अविरल धारा बनाते उज्जवल जीवन सारा गुरु वचनों पे हमें…

  • होलिका दहन | Poem Holika Dahan

    होलिका दहन ( Holika Dahan ) ( 2 )  करना है काम एक आज होलिका दहन में जलानी है कमी एक जो भि है निज के मन में अधर्म पर धर्म की जीत का प्रमाण समक्ष होगा करें दूर कल क्यों, आज के दिन हि प्रत्यक्ष होगा तब हि इन शुभ कामनाओं का कोई अर्थ…

  • समय की जरूरत | Samay ki Jarurat

    समय की जरूरत ( Samay ki jarurat )   जुड़ते हुए आपसी संबंधों मे कभी कभी पारंपरिक बदलाव भी जरूरी है…. समय की बदलती धारा मे चुनाव अच्छाइयों पर होना चाहिए न कि रूढ़िवादी सिद्धांतों पर….. आज की स्वच्छंद जीवन शैली मे उभरती इस नव सोच के साथ तारतम्य बनाए रखना ही शेष के लिए…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *