Author: Admin

  • मुलाक़ात लिखना | Mulaqaat Likhna

    मुलाक़ात लिखना ( Mulaqaat likhna )   रही कैसी अपनी मुलाक़ात लिखना जो तुम कह न पाये वो जज़्बात लिखना मनाना है कैसे नया साल मोहसिन इशारे में अपने ख़यालात लिखना जुदाई में मेरी अकेले में दिलबर जो आँखों से होती है बरसात लिखना नज़र में हैं मेरी तुम्हारे ही मंज़र किये ऐसे कैसे तिलिस्मात…

  • सफ़र-ए-हमरंग | Safar-e-Hamrang

    सफ़र-ए-हमरंग ( Safar-e-Hamrang )   नए साल मे प्लानिंग कर कुछ ऐसा हम कर जाएं, लक्ष्य पाने की दिशा में आगे हम सब बढ़ते जाएं। अपनी कमियों को बाहर कर अच्छाईयां अपनाएं, जुड़ें जोड़ें साहित्य से हम सब संकल्प ये उठाएं।। ईमानदारी से कोशिशकर यह रचना हम रच जाएं, अपने आप से नए वर्ष का…

  • तिलक करें नववर्ष हम मंगल गाएंगे | Tilak Karen

    तिलक करें नववर्ष हम मंगल गाएंगे ( Tilak karen nava varsh ham mangal gayenge )   नए दौर में हम नए तराने गीत सुनाएंगे। झूम-झूमके आओ सारे खुशी मनाएंगे। नए साल में नई उमंगे रस बरसाएंगे। प्यार भरे अनमोल मोती खूब लूटाएंगे। स्वागत अभिनंदन है पलके बिछाएंगे। तिलक करें नववर्ष हम मंगल गाएंगे। पुष्प थाल…

  • मुबारक हो नया साल | Mubarak ho Naya Saal

    मुबारक हो नया साल ( Mubarak ho Naya Saal )   मुस्कानों का मौसम छानेवाला है, नया साल अब आनेवाला है। उगेंगे पेड़ों में नये बसंत के पत्ते, पर्यावरण का कद भी बढ़नेवाला है। कोहरा औ सर्दी से काँप रहा सूरज, बर्फबारी से पर्वत ढंकनेवाला है। अम्न का पैगाम कोई आकर तो बोए, आँखों से…

  • कैसे लिखू | Kaise Likhoon

    कैसे लिखू ( Kaise Likhoon )   कैसे लिखू प्रेम गीत जब वर्दी खून से भीगे है कैसे देखूं बसंत के फूल जब आंख अश्रु से भीगे हैं कैसे भेजूं मैं प्रियसी को फूल जो मेरे भाई को चढ़ने है कैसे लिखू प्रेम गीत जब हृदय का रोना जारी है कैसे गाऊं मै प्रेम गीत…

  • ओढ़े पीली ओढ़नी धरा हरसाई | Odhe Pili Odhni

    ओढ़े पीली ओढ़नी धरा हरसाई ( Odhe pili odhni dhara harasaee )   धरती ओडी पीली ओढ़नी, सरसों भी लहराई है। मस्त पवन की चली बहारें, धरा खूब हरसाई है। धरा खूब हरसाई है लहलहाते खेत झूमते, कलियां भी मुस्काती है। हरी भरी केसर क्यारी, वादियां मंगल गाती है। वृक्ष लताएं मौज मनाएं, घर में…

  • वक्त का क्या | Waqt ka Kya

    वक्त का क्या #CenturyGettingYoung 2024   वक्त का क्या , न थमेगा न थमा है दीवार पर लगा कैलेंडर मगर हर साल तो बदलता है इसकी रफ्तार का अंदाज़-ए-बयां कुछ और दिल की धड़कन सा कभी तेज़ कभी मद्धम कभी रवां सा है कुछ यादें कुछ निशानियाँ कुछ करम अता कर जाता कुछ चेहरे जवां…

  • कितने | Kitne

    कितने ( Kitne )    पेड़ों से पत्ते बिछड़ गये कितने इस जग उपवन से उजड़ गये कितने सारा दिन अब ये चला रहे हैं फ़ोन इस युग के बच्चे बिगड़ गये कितने पहले हर कोई,गुनाहों से था दूर इस पथ को अब तो पकड़ गये कितने सबकी फ़रियादें,कहाँ सुनेगा रब इस दर पर माथा…

  • मंथन | Manthan

    मंथन ( Manthan )   पत्थरों से टकराकर भी लहरों ने कभी हार नही मानी बदल देती है उसे भी रेत के कणों मे चलती नहीं शिलाखंड की मनमानी ज्वार भाटा का होना तो नियति है अमावस और पूनम की रात होगी ही सागर की गहराई पर नाज है उन्हें हौसले में कमी लहरों ने…

  • शत् शत् वंदन हीरा बा | Shat Shat Vandan Heera Ba

    शत् शत् वंदन हीरा बा ( Shat Shat Vandan Heera Ba )   १०० वर्षों की जीवन यात्रा आप पूरी कर पाई, प्रधानमंत्री की माॅं होकर भी घमंड़ ना दिखाई। अनुशासित ज़िंदगी जिकर सबको है समझाई, दामोदरदास मूलचन्दजी संग विवाह ये रचाई।। सदा रहेंगे भारतीय आपके राजमाता आभारी, दिया ऐसा कोहिनूर जिन्होंने हिन्द को हमारी।…