Author: Admin

  • परवरिश | Parvarish

    परवरिश ( संस्मरण )   उस दिन भी सावन का ही महिना और सोमवार का दिन था । बाबूजी (ससुर जी )शिव के अनन्य भक्त । तो उस काल विषय में माँ का पत्नी होने के नाते अनुगामिनी होना निश्चित ही था । पूरा परिवार ताल वृक्ष एक तपो भूमि है़ जयपुर से अलवर जाने…

  • पाषाण हृदय कैसे हो गए | Pashan Hriday

    पाषाण हृदय कैसे हो गए ( Pashan hriday kaise ho gaye )    किन सपनों ख्वाबों में खोए, क्या गहरी नींद में सो गए। दर्द दिल का जान सके ना, पाषाण हृदय कैसे हो गए। पहले पूछते रहते हमसे, तुम हाल-चाल सब जानते। मन की पीर ह्रदय वेदना, शब्दों की भाषा पहचानते। सब की खुशियों…

  • आत्महत्या नही करने दूंगा | Aatmhatya Nahi Karne Doonga

    आत्महत्या नही करने दूंगा ( Aatmhatya nahi karne doonga )    आत्महत्या नहीं करने दूंगा मैं किसी को मरने नहीं दूंगा।। लडूंगा हर उस परस्थिति से जिसके आगे हार जाते हैं लोग, मैं झुकने की सहमति नहीं दूंगा हार में भी जीत है जानते हैं सभी में समाधान कोई निकाल लूंगा पर संघर्ष पथ से…

  • शौर्य दिवस | Shaurya Diwas

    शौर्य दिवस ( Shaurya diwas )   क्रोधित था हर हिन्दू का मन, बाबर का जो नाम लिया। इष्ट राम का मन्दिर तोडा, दाता का अपमान किया। सुलग रही थी ज्वाला मन मे, दुष्टों का प्रतिकार किया। 6 दिसम्बर दिन था वो, जब ढाँचे को ही ढाह दिया। पल मे मटियामेट हुआ वो, बाबर का…

  • याद नहीं अब तो कुछ भी | Yaad Nahi

    याद नहीं अब तो कुछ भी ( Yaad nahi ab to kuch bhi )    याद नहीं अब तो कुछ भी बदली है तस्वीर यहां। जो मुखोटे पल-पल बदले बदली है तकदीर यहां। विश्वास प्रेम की धाराएं या बदल गई जीवन धारा। झूठ कपट ईर्ष्या मे मानव लोभ मोह में पड़ा सारा। याद नहीं अब…

  • दिल के घाव | Dil ke Ghaw

    दिल के घाव ( Dil ke ghaw )    जानता हूं तेरी हर बात मैं जानता हूं तेरे हर जज्बात मैं सुनना चाहता हूं तेरे लबों से मिटा दें दिल के हर घाव को और सुना दें मुझे जी भरकर पढ़ रहा हूं तेरी कश्मकश को पढ़ रहा हूं तेरे मन को छुपी नहीं है…

  • इन लम्हों को मत जाने दो | In Lamhon ko

    इन लम्हों को मत जाने दो ( In lamhon ko mat jane do ​)  नज़्म   जीतने की खुशी में किसी को बे-कफ़न मत करो, क़त्ल का सामान इस तरह कभी जमा मत करो। सदियों पुरानी है विश्व की सभ्यता और संस्कृति, किसी साजिश के तहत इसे छिन्न-भिन्न मत करो। साज मत बिगाड़ो तुम इस…

  • संवेदनाएं | Sanvedanaen

    संवेदनाएं ( Sanvedanaen )    जिम्मेदारियों के बोझ से जब दब जाती है जिंदगी सपने रह जाते हैं सपने ही तब न रात होती है न दिन निकलता है सुबहोशाम मे फर्क ही नहीं होता दुनियावी भीड़ के माहौल मे किसी अपने को तलाशती नजर भटकती ही रह जाती है पर ,कोई अपना नहीं मिलता…

  • अच्युतम केशव वंदन | Achyutam Keshav Vandan

    अच्युतम केशव वंदन ( Achyutam Keshav Vandan )    अच्युतम केशव वंदन से,अंतर्मन नेह सलिल धार श्री मंगल इति श्री शुभ, रग रग अलौकिक उजास । छवि अनूप मनमोहनी, रज रज मृदुल सुहास । अनुभूति संग अभिव्यक्ति, शब्द अर्थ आनंद अपार । अच्युतम केशव वंदन से,अंतर्मन नेह सलिल धार ।। पावनता अंतर्संबंध रमन, अपनत्व सरित…

  • मुस्कुराहट | Muskurahat

    मुस्कुराहट ( Muskurahat )   हजार गमों की महफिल में, तू मुस्कुराहट को न्योता दिया कर।। नम हुई आंखे तेरी, दिल को सताती है, मुकुराहट तो दिल का सुकून कहलाती है।। ऐ दोस्त , तेरी उदास आंखे, बहुत दिल में हलचल मचाती है, तू बस हंस दे, तो सारी कायनात खुशियां मनाती है।। ज़िंदगी के…