Author: Admin

  • रुत मौत की | Rut Maut ki

    रुत मौत की! ( Rut maut ki )   रुत मौत की सजी है, आके मुझे बचा लो, वीरान हो चुके हैं, मेरे शहर को सजा दो। करने लगे हैं पत्थर आईनों की हिफाजत, चुभने लगी है उनको दिनरात की बगावत। हुआ दिल मेरा ये पत्थर, दरिया कोई बना दो, रुत मौत की सजी है,…

  • मां दुर्गे कालरात्रि | Maa Durge Kalratri

    मां दुर्गे कालरात्रि ( Maa Durge Kalratri )   रूप विकराल रुद्र श्रृंगार, उरस्थ मृदुल मंगल धार मां दुर्गे कालरात्रि आभा, अद्भुत अनुपम मनोहारी । सघन तिमिर सम वर्णा दर्शन, साधक जन अति शुभकारी । संपूर्ण ब्रह्मांड सिद्धि वृष्टि, सर्वत्र खुशियां आनंद बहार । रूप विकराल रुद्र श्रृंगार, उरस्थ मृदुल मंगल धार ।। महायोगीश्वरी महायोगिनी…

  • जड़ें | Jaden

    जड़ें ( Jaden )   जानता हूं , अपनी जरूरत मे तुम्ही तलाशते हो भगवान को भी इन्ही पत्थरों मे…. कूड़े के ढेर भी आते हैं काम खाई पाटने के गिरती हुई शाख को लाठी का सहारा भी चाहिए….. ये कंधे ही उठाए हैं बोझ तुम्हारी शानो शौकत के तुम्हे तो यह भी नही मालूम…

  • आतंक | Aatank

    आतंक ( Aatank )   सुंदर घर थे घर के अंदर नन्हे बच्चे रह गए रात के अंधेरे में राख के ढेर बस वह नन्ही कोप्ले खिल भी ना पाई मुट्ठी पूरी खुल भी ना पाई सिसकियों में दब गई मुस्कुराहट रह गई गाजा मे सिर्फ राख और विनाश त्रासदी का मंजर घर में चहकती…

  • कभी रुको जरा | Kabhi Ruko Zara

    कभी रुको जरा ( Kabhi ruko zara )   जिंदगी दौड़ती, भागती कहती है रुको थमो जरा पलट के तुम  देखो जरा पद चापो को सुनो जरा  फिर बचपन में आओ जरा  दरख़्त दरवाजे, खिड़कियां  सीढिओ को पहचानो जरा एक दिन बचपन जी लो जरा खिलखिलाहटों को सुनो जरा लगता है जैसे सब मिल गया…

  • बीमा बिना क्या जीना | Beema

    बीमा बिना क्या जीना ( Beema bina kya jeena )   आज ही कराओ अपना जीवन बीमा, जिसकी सब देश में बहुत ही महिमा। पता ना चलता पलभर का किसी का, क्या मालुम कब श्वास हो जाऍं धीमा।। ज़िन्दग़ी के साथ एवं ज़िंदगी के बाद, यह जीवन बीमा देता सभी का साथ। सिखाया है सब…

  • औरतों की मंडी | Auraton ki Mandi

    औरतों की मंडी ( Auraton ki mandi )   भारत देश के मध्य प्रदेश में औरतों की मंडी लगती है जहां औरतें जानवरों की तरह खरीदी और बेंची जाती हैं खरीदने के पहले जानवरों के अंगों को दबा दबा कर देखा जाता है वही प्रक्रिया जवान लड़कियों के साथ अपनाई जाती है गरीब मां बाप…

  • इनकार पर | Inkaar Shayari in Hindi

    इनकार पर ( Inakaar par )    जो मुकाबिल था सरे बाजार पर। रो पड़ा वो आपके इनकार पर। दम जमाने में नही जो मिटा दे, लिख गया जो इश्क की दीवार पर। फैसला समझे बिना जब कर लिया, ऐब अब क्या देखना सरकार पर। कत्ल जो इतने हुए उनका सबब तिल बड़ा कातिल खड़ा…

  • विश्व की तकदीर | Vishwa ki Taqdeer

    विश्व की तकदीर !  (नज़्म ) आग लगाकर लोग बुझाने आते हैं, दुनिया का दस्तूर निभाने आते हैं। साथ-साथ चलने का ये छलावा है मात्र, घड़ियालू आँसू बहाने आते हैं। पहले लोग करते थे फक्र रिश्तों पर, अब दरिया से कतरा चुराने आते हैं। करते हैं लोग आंसुओं का सौदा, दूसरों की जमीर गिराने आते…

  • ऐतबार रखना तू | Aitbaar Shayari

    ऐतबार रखना तू ( Aitbaar rakhna tu )   ज़रा दिल मेरी तरह बेक़रार रखना तू ? वफ़ा मुहब्बत में ही इंतिज़ार रखना तू कभी शक करना नहीं वफ़ा मुहब्बत पर वफ़ाओ पर उम्रभर ऐतबार रखना तू परायी करना नहीं तू मुझे दिल से अपने बसाकर दिल में हमेशा यार रखना तू बदल न जाना…