देश से | Desh se
देश से ( Desh se ) हर अदू भागते ही रहे देश से जुल्म का हर निशाँ ही मिटे देश से लौट आये वो अपने वतन भारत में दूर परदेश में ही गये देश से प्यार के फूल हर घर खिले ऐ लोगों नफ़रतों के कांटे ही जले देश से हो न मासूम पर…
देश से ( Desh se ) हर अदू भागते ही रहे देश से जुल्म का हर निशाँ ही मिटे देश से लौट आये वो अपने वतन भारत में दूर परदेश में ही गये देश से प्यार के फूल हर घर खिले ऐ लोगों नफ़रतों के कांटे ही जले देश से हो न मासूम पर…
हमरे देशवा कै दुनिया में मान बा! ( Hamre deshwa ke duniya me maan ba ) हमरे देशवा कै दुनिया में मान बा, हम सब कै जान बा ना। ( 2 ) आन -बान -शान इसकी अजब निराली, बहती जो नदिया ऊ अमृत कै प्याली। पूरी दुनिया में सबसे जवान बा, हम सब कै…
तू कौन है तू क्या है ( Tu kaun hai tu kya hai ) कैसे बतावू तु कोन हे मेरे लिए, तु क्या है मेरे लिए || बचपन का रंगबिरंगी किस्सा है तु दिल के करीब का हिस्सा है तु कड़कती धूप मे छाव है तु, मेरे लिए एक गाँव हैं तु — ऐ…
मैं फक्र से कहता है ( Main phakr se kahata hai ) मेरे पास भी दोस्त है, अंधेरी रातो मे खड़ा मेरा प्यार है, मुझे रोशनी देता वह चाँद है ।। हाँ मै चाँदनी नहीं, मैं तो फूल ह जिसे पाने उसने काटो से रिश्ता जोड़ा है । मेरे पास दोस्तों की महफिल नही…
दोस्ती ( Dosti ) कुछ कही अनकही बातों की दास्तान है दोस्ती, आज के जमाने में भी इंसानियत की पहचान है दोस्ती, पहले त्याग और समर्पण की मिसाल थी दोस्ती, आज तो मतलब के रिश्तों से बदनाम है दोस्ती, सही दोस्त अगर मिल गया तो ईश्वर का दूसरा नाम है दोस्ती, वरना तो इसकी…
मित्र वही ( Mitra wahi ) मित्र वही जो खुल कर बोले हिय की बात भी मुंह पर खोले नहीं छुपाए कोई बात देता हर सुख दुख में साथ प्यार का मधुरस दिल में घोले, मित्र वही जो खुल कर बोले। हर दुःख को वह अपना,समझे बात बड़ी हो पर ना उलझे…
अवसर ( Avsar ) अतीत को हवा तो नही दी जाती पर,अतीत को भुलाया भी नही जाता उड़े हों वक्त के परखच्चे जहां उसे भी तो राख मे दबाया नही जाता माना बदलाव नियम है प्रकृति का तब भी तो ढलना ढालना होता है न चाहे यदि बदलना कभी एक तो दूसरे को भी…
पुस्तक ( Pustak ) गिरने मत दो झुकने मत दो गिरे अगर तो उसे उठा लो, मुड़ने मत दो फटने मत दो मुड़े अगर तो उसे सधा लो, भीग भीग कर गल न जाए जल वर्षा से उसे बचा लो, कट ना…
गुस्ताखी ( Gustakhi ) कलियों के भीतर यूं ही , आ नही जाती महक समूचे तने को ही , जमीं से अर्क खींचना होता है चंद सीढ़ियों की चढ़ाई से ही, ऊंचाई नही मिलती अनुभवों के दौर से गुजर कर ही, सीखना होता है सहयोग के अभाव मे कभी, मंजिल नही मिलती अकेले के…
अपनें घर का वैद्य ( Apne ghar ka vaidya ) इन घरेलू नुस्खों को सब लोग आजमाकर देखना, अपने अपने घर का वैद्य आप ख़ुद ही बन जाना। हालात चाहें कैसे भी हो न बीमारियों से घबाराना, सवेरे जल्दी-उठकर हल्के व्यायाम ज़रुर करना।। खाॅंसी में काली-मिर्च और शहद मिलाकर चाटना, जलने पर मैथीदानें का…