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कलयुग | Kalyug par Bhojpuri Kavita
ByAdmin” कलयुग “ ( Kalyug ) धधक-धधक अब धधक रहल बा चिंगारी अब भड़क रहल बा लोगन में बा फुटल गुस्सा हर जान अब तड़प रहल बा कहीं आवाज अउर कहीं धुलाई धरती पे अब लालिमा छाइल जान प्यारा हऽ सबके भाई फिर काहे बा गुस्सा आइल कहीं ना बा कवनो लेखा जोखा भाई…

श्मशान | Shamshan par Bhojpuri Kavita
ByAdmin” श्मशान ” भोजपुरी कविता ( Shamshan ) चार कंधा पे पड़ाल एगो लाश रहे फूल ,पईसा के होत बरसात रहे राम नाम सत्य ह सब केहू कहत जात रहे केहु रोआत रहे केहू चिल्लात रहे भीड़ चलत रहे ओके साथ मे जे समाज से अलग रहे, आज हांथ में आग ले सब कुछ…

लड़कपन | Ladakpan par Bhojpuri kavita
ByAdminलड़कपन ( Ladakpan ) देखऽ-देखऽ ठेला वाला आइल ओपे धर के मिठाई लाइल दु पइसा निकाल के देदऽ जवन मन करे मिठाई लेलऽ खुरमा खाजा रसगुल्ला राजा इमरति अउर चन्दकला बा ताजा बर्फी, hमलाई हऽ मिठाई के भाई बुनिया सेव अउर गुलाब जामुन गाजा आवे ला खाये में खुबे माजा बाबु जी गइल बाने…

बेचारा | Bechar Bhojpuri Kavita
ByAdminबेचारा ( Bechara ) जब से गरीबी के चपेट में आइल भूख, दर्द, इच्छा सब कुछ मराइल खेलें कुदे के उम्र में जूठा थाली सबके मजाइल का गलती, केके कइलक बुराई जे इ कठीन घड़ी बा आइल ना देह भर के पावेला जामा ठंडा, गमी, बरसात सब आधे पे कटाइल ठिठुर-ठिठुर गावेला गाना जल्दी-जलदी…

समोसा | Samosa par Bhojpuri Kavita
ByAdminसमोसा ( Samosa ) आज खड़ा रहनी हम बजार में भिंड भरल रहे अउर सबे रहे अपना काम में दुकानदार चिललात रहे हर चिज़ के दाम के तले एगो लइका ले उडल कवनो समान के चोर चोर कह सभे चिल्ला उठल का चोरइले रहे ना केहु के पता चलल उ लइका आवाज सुन डेरा…

मजबूर | Bhojpuri kavita majboor
ByAdminमजबूर ( Majboor ) खुन के छिट्टा पडल, अउर पागल हो गइल ना कवनो जुर्म कइलक, कवन दुनिया में खो गइल जब तक उ रहे दिवाना, शान अउर पहचान के सब केहू घुमत रहे, लेके ओके हाथ पे आज समय अ्इसन आइल बा, लोग फेंके ढेला तान के कहां गइल मानवता, सभे हंसे जोर…

