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भारत | Bharat par Bhojpuri Kavita
ByAdminभारत, भोजपुरी कविता ( Bharat Bhojpuri Kavita ) भारत देश हमार, जेके रुप माई समान चेहरा काशमीर, मुडी हिमालय मुकुट के पहचान बायां हाथ अरु, आसाम मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, मनिपुर,नागा अउर मुटान दाहिना हाथ गुजरात अउर राजसथान गोड कर्नाटक, आंध्रा, तमिलनाडु, केरला शितलता के प्रमाण इनके ढेरों लइका विर अउर विद्वान पंजाब अउर हिमाचल…

बेचारा | Bechar Bhojpuri Kavita
ByAdminबेचारा ( Bechara ) जब से गरीबी के चपेट में आइल भूख, दर्द, इच्छा सब कुछ मराइल खेलें कुदे के उम्र में जूठा थाली सबके मजाइल का गलती, केके कइलक बुराई जे इ कठीन घड़ी बा आइल ना देह भर के पावेला जामा ठंडा, गमी, बरसात सब आधे पे कटाइल ठिठुर-ठिठुर गावेला गाना जल्दी-जलदी…

समोसा | Samosa par Bhojpuri Kavita
ByAdminसमोसा ( Samosa ) आज खड़ा रहनी हम बजार में भिंड भरल रहे अउर सबे रहे अपना काम में दुकानदार चिललात रहे हर चिज़ के दाम के तले एगो लइका ले उडल कवनो समान के चोर चोर कह सभे चिल्ला उठल का चोरइले रहे ना केहु के पता चलल उ लइका आवाज सुन डेरा…

पागल | Pagal Bhojpuri kavita
ByAdmin” पागल “ ( Pagal ) दरद के आग बा ओके दिल में, रोये ला दिन रात देख- देख के लोग कहेला, पागल जाता बडबडात रहे उ सिधा साधा, माने सबके बात लूट लेलक दुनिया ओके, कह के आपन जात आज ना कवनो बेटा-बेटी, नाही कवनो जमात नाही पाकिट में एगो रोपया,…

रोपया | Poem on rupees in Bhojpuri
ByAdmin” रोपया “ ( Ropya ) रोपया के ना कवनो जात जे के ज्यादा उहे बाप उहे दादा उहे भाई चाहे हो कईसनो कमाई रोपया से समान मिलेला जित धरम अउर शान मिलेला रोपया से सब कुछ खरीदाला कोट कचहरी अउर न्याय बिकाला रोपया में बा अ्इसन बात रोपया के ना कवनो जात रोपया…

गिर के उठनी | Bhojpuri Kavita Gir ke Uthani
ByAdmin” गिर के उठनी “ ( Gir ke uthani ) आज उठे के समय हमरा मिलल देख हमरा के कवनो जल उठल खिंच देलक गोंड हमर ऐ तरह से गिर गइनी देख दुनिया हंस पड़ल का करती हम अभीन उठल रहनी मंजिल रहे दूर मगर अब ना सुतल रहनी देख इ हंसी अब हम…

