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होलिया में होले छेड़खानी | Holiya me Hole
ByAdminहोलिया में होले छेड़खानी रगड़ा न गलवा हमार, अबहिन कोरी बा चुनरिया। रगड़ा न गलवा हमार, अबहिन कोरी बा चुनरिया। कोरी बा चुनरिया हो,कोरी बा चुनरिया, कोरी बा चुनरिया हो,कोरी बा चुनरिया, रगड़ा न गलवा हमार, अबहिन कोरी बा चुनरिया। लाले-लाले होंठवा कै हमरी ललइया, बनके भंवरवा न लूटा ई मलइया। न लूटा ई…

श्मशान | Shamshan par Bhojpuri Kavita
ByAdmin” श्मशान ” भोजपुरी कविता ( Shamshan ) चार कंधा पे पड़ाल एगो लाश रहे फूल ,पईसा के होत बरसात रहे राम नाम सत्य ह सब केहू कहत जात रहे केहु रोआत रहे केहू चिल्लात रहे भीड़ चलत रहे ओके साथ मे जे समाज से अलग रहे, आज हांथ में आग ले सब कुछ…

जंगल | Jungle par Bhojpuri kavita
ByAdmin” जंगल “ ( Jungle ) जंगल हऽ देश के थाथी जे में रहे हाथी गाछ, पेड़ बरसाती चिता, शेर अउर कई गो जाती जंगल हऽ देश के थाथी जे में रहे सब जानवर के निवास सब चिड़ियन के रहे वास जड़ी बुटी के सब प्रजाती जंगल हऽ देश के थाथी सब फल के…

हडिया | Haria Bhojpuri Kahani
ByAdmin” हडिया ” ( Haria ) एगो गांव में एगो लड़की रहे उ बहुत सुन्दर रहे लेकिन उ बहुत झगडाईन रहे । गांव के सारा लोग ओकरा से परेशान रहे। रोज-रोज उ केहु ना केहु से झगड़ा फंसा लेत रहे । ओके घर वाला लोग भी बहुत परेशान रहे ओके ठिक करेके सारा उपाय अपना…

बुढ़िया | Budhiya Bhojpuri Kavita
ByAdminबुढ़िया ( Budhiya ) दूर झोपड़ी में रहे, बहुत अन्हार। ओमे से आवत रहे, मरत दिया के प्रकाश! चारों ओर सन्नाटा ,कईले रहे प्रहार। लागत रहे पेड़ पौधा अउर सब के लागल बा बुखार ना कवनो पत्ता हीलत रहे,जाने कौन रहे बात? हवा भी मोड़ लेले रहे मुंह, चलत रहे समय इतना ऐतना खराब।…

अनहार | Anhar par Bhojpuri Kavita
ByAdmin“अनहार, दिया आऊर आस “ ( Anhar, diya aur aas ) दीया जला देहनी हऽ ओहिजा काहे से उहवा रहे अनहार जहवां से कइगो राही गुजरे जाने कब केहू उहवा जाए हार एगो, दुगो, तिन गो, नाही चार, उहवा से राही गुज़रेला हर बार मगर केहु न जाने किस्मत के कब कहवां के खा…

