बाबा रामसा पीर दरबार | Baba Ramsa Peer Darbar

बाबा रामसा पीर दरबार

( Baba Ramsa Peer Darbar ) 

 

लोक आस्था परम केंद्र ,बाबा रामसा पीर दरबार

शेखावाटी स्वर्ण नगरी नवलगढ़,
शोभित लोक देवता रामदेव जी धाम।
पूर्ण सर्व भक्तजन मनोकामनाएं ,
अनूप सांप्रदायिक सौहार्द पैगाम ।
भाद्रपद शुक्ल दशमी लक्खी मेला,
सर्वत्र बाबा कृपा वृष्टि अपार ।
लोक आस्था परम केंद्र, बाबा रामसा पीर दरबार ।।

मंदिर भव्य पुरात्तन इतिहास,
अहम अलौकिकता ओतप्रोत ।
साक्षात दर्शन बाबा रामदेव,
ठाकुर नवल सिंह आभा श्रोत ।
सन सत्रह सौ चौहत्तर शुभ तिथि,
बाबा स्तुति स्थल मूर्त आकार ।
लोक आस्था परम केंद्र, बाबा रामसा पीर दरबार ।।

लीलण राम देव बाबा घोड़ा,
अद्भुत अनुपम व विशेष ।
रुग्ण बाबा समाधिस्थ बेला,
पदार्पण नवलगढ आनंद अशेष ।
परम सांस पुण्य नवल धरा,
तदंतर अविरल भक्ति रस धार ।
लोक आस्था परम केंद्र, बाबा रामसा पीर दरबार ।।

नगर सेठ उपमित बाबा दर पर,
भक्तजन दर्शन असीम सैलाब ।
सुबह शाम मनमोहनी आरती,
यथार्थ बनते अंतर ख्वाब ।
भाद्रपद नवमी अप्रतिम संध्या,
घोड़े नमन संग ज्योत चमत्कार ।
लोक आस्था परम केंद्र, बाबा रामसा पीर दरबार ।।

 

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

यह भी पढ़ें :-

नई संसद का श्री गणेश | Nai Sansad

Similar Posts

  • आश्चर्य नहीं होता | Roohi Quadri Kavita

    ” आश्चर्य नहीं होता “ ( Ashcharya nahi hota )   “आश्चर्य नहीं होता” आश्चर्य नहीं होता…. जब देखती हूं तुम्हें असहज परिस्थितियों में भी सहजता से मुस्कुराते हुए। हार -जीत के मन्थन से परे, परिवार के सुख के लिए अपने सपनों को गंवाते हुए। आश्चर्य नहीं होता….. जब तुम रखती हो अपनी अभिलाषाओं की…

  • हे जग के करतार | Jag ke Kartar

    हे जग के करतार ( He jag ke kartar )   हे जग के करतार, जग का पालनहारा, लौटा दो मुस्कान लबों की, सुनो सांवरा प्यारा ।   घट घटवासी अंतर्यामी, हाल पता है सारा, मंझधार में डूबी नैया, प्रभु लगा दो किनारा।   कुदरत कई रंग बदलती, क्यों लीला करते हो, सबको जीवन देने…

  • मेहनत | Mehnat

    मेहनत! ( Mehnat )   बिना मेहनत के कुछ हो नहीं सकता, पृथ्वी गति न करे, तो दिन निकल नहीं सकता। मेहनत से ही चलता है किस्मत का सिक्का, मेहनत बिना जीवन संवर नहीं सकता। मेहनत की खुशबू से है धरा महकती, उड़ें न भौरा तो कली तक पहुँच नहीं सकता। सजा रहता है झूठ…

  • भारतीय संविधान | Samvidhan par kavita

    भारतीय संविधान ( Bhartiya samvidhan )    कोटि कोटि कंठो से निकली एक यही स्वर धारा है सबसे न्यारा सबसे प्यारा सुसंविधान  हमारा  है,   शत् शत् नवल प्रणाम तुम्हें एक तुम्हीं सहारा है बहते दरिया में नावों का सुंदर एक किनारा है ,   समता का अधिकार दिया यह शिक्षा का उजियारा है नारी…

  • राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस | Rashtriya Upbhokta Divas

    राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस ( Rashtriya upbhokta divas )    बाजारवाद पर अंकुश,उपभोक्ता संचेतना से सही कीमत उत्तम सामग्री सेवा, हर उपभोक्ता परम अधिकार । पटाक्षेप अवांछित भ्रामक बिंदु, वंदन वैध व्यापार व्यवहार । गुणवत्ता संग उचित मूल्य अहम, क्षतिपूर्ति प्रदत्त नियम अवहेलना से । बाजारवाद पर अंकुश,उपभोक्ता संचेतना से ।। हिंद राष्ट्र उपभोक्ता हित, संरक्षण…

  • अरमान 2024 के | Arman 2024 ke

    अरमान 2024 के ( Arman 2024 ke )   जीवन में सुख हर्ष हो, गुजरे कुछ यूँ साल। अब के सावन में भरें, कुएँ बावड़ी ताल।। छुएँ बुलंदी ख़्वाहिशें, पूरे हों सब ख़्वाब। अंतस में सबके सदा, खिलते रहें गुलाब।। मुखड़े पर मुस्कान हो, मन में रहे उमंग। जीवन भर उड़ते रहें, हँसी ख़ुशी के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *