बड़प्पन से बड़े होते हैं

बड़प्पन से बड़े होते हैं

बड़प्पन से बड़े होते हैं

जो बड़े कद में हो गए ऊंचे ऊंचे पद पर हो गए।
अंतर्मन विकार भरा हो तो स्वार्थ में जो खो गए।

दिल दरिया सा जो रखते बड़प्पन से बड़े होते हैं।
औरों की मदद जो करते लाखों हाथ खड़े होते हैं।

वटवृक्ष की भांति देते सबको शीतल ठंडी छांव।
ठंडी ठंडी मस्त बहारें खुशियों से झूमता है गांव।

सागर सा विशाल हृदय जो सबका करें सम्मान।
सही मायने में बड़े वही सबसे सुखी होता इंसान।

ऊंची सोच उच्च विचार ऊंचे जिनके आदर्श हुए।
इस दुनिया में वही चहेते जन मन के सहर्ष हुए।

औरों के हित लड़े मरे जो नाम अमर कर जाते हैं।
दुख दर्द में काम आए जग में बड़े वही कहलाते हैं।

बड़ी-बड़ी बातें जो करते वो बड़प्पन को क्या जाने।
अपना उल्लू सीधा कर चल दे अपने ठौर ठिकाने।

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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