बावरा मन

Romantic Poetry In Hindi -बावरा मन

बावरा मन

( Bawara Man )

 

 

बावरा   मन   मेरा,  हर  पल  ढूंढे   तुमको।
नैना द्वारे को  निहारे, एकटक देखे  तुमको।

 

प्रीत  कहते  है  इसे, या  कि कोई रोग है ये।
जो  झलकता तो नही, दर्द  का संयोग है ये।

 

कहना चाहूं कह न पाऊं, ऐसा  मनरोग है ये।
झांझरी सा मन ये बाजे, देख ले जैसे तुमको।

 

मन  में  कुछ  साज  बजे, अनकही सी  बात  कहे।
चुभती  है   ये  पुरवाई,  प्रीत  न आग लगायी।

 

कैसा  संयोग  हुआ  है, तुझसे  ही  रोग  लगा है।
चाँदनी रात गीत मल्हार,ना कुछ भी भाये मुझको।

 

चढता  यौवन  का  नशा,  दर्द  मे भी है  मजा
पढ ले जज्बात अगर,  शेर  लिखता है व्यथा।

 

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

??
शेर सिंह हुंकार जी की आवाज़ में ये कविता सुनने के लिए ऊपर के लिंक को क्लिक करे

 

यह भी पढ़ें : 

Hindi Kavita -भारत का गौरव

Similar Posts

  • मजदूर का स्वप्न | Majdoor par kavita

    मजदूर का स्वप्न ( Majadoor ka swapan )   ऊंची ऊंची अट्टालिका है , बड़े-बड़े यह भवन खड़े हैं l चारों और यह भरे पड़े हैं, मेरे हाथों से ही बने हैं l।   कितने भवनों का निर्माता, खून पसीना मैं बहाता। मेरे घर के हाल बुरे हैं, पत्नी बच्चे भूखे पड़े हैं l।  …

  • Corona par Kavita | दबंग कोरोना

    दबंग कोरोना ( Dabang Corona )   ये हाल है और पूछते हैं कि क्या हाल है? अरे यह कोरोना है दबंग हैं सब इससे तंग है। धर लेता तो नहीं देखता धनी निर्धन सरकारों की भी परीक्षा लेता है देखो वह झूठ कितना बोलता है उनकी पोल पट्टी सब खोलता है अफसरों की हनक…

  • फूलों सा मुस्काता चल | Hindi Poetry

    फूलों सा मुस्काता चल ( Phoolon sa muskata chal )   फूलों सा मुस्काता चल, राही गीत गाता चल। मंजिल  मिलेगी  खुद, कदम  बढ़ाना  है।   आंधी तूफान आए, बाधाएं मुश्किलें आए। लक्ष्य  साध  पथ  पर, बढ़ते  ही जाना है।   नेह मोती बांट चलो, हंस हंस खूब मिलो। अपनापन  रिश्तो  में, हमको  फैलाना है।…

  • मिलन की चाह | Chhand milan ki chah

    मिलन की चाह ( Milan ki chah )   मनमीत आओ मेरे, मिलन की घड़ी आई। चाहत की शुभवेला, दौड़े चले आइए।   मौसम सुहाना आया, रूत ने ली अंगड़ाई। मिलन को प्रियतम, प्रेम गीत गाइए।   खुशबू ने डाला डेरा, महका दिल हमारा। लबों पे तराने प्यारे, मधुर सुनाइए।   दिल में उमंगे छाई,…

  • Kavita Papi pet ke khatir | पापी पेट की खातिर

    पापी पेट की खातिर ( Papi pet ke khatir )   वो चिड़िया रोज सवेरे है आती करने चीं चीं चीं चीं मधुर स्वर लहरियां उसकी मेरे मीठे स्वप्न पर,भारी है पड़ती। जाग जाता हूं फटाफट उसके लिए दाना पानी रख आता हूं फुदक फुदककर है खाती कभी जलपात्र में नहाती मानो मुझे हो रिझाती…

  • हैप्पी न्यू ईयर

    हैप्पी न्यू ईयर     हैप्पी न्यू ईयर बोल उठी गांव शहर की हर गलियां नव वर्ष आते ही खिल उठी गांव शहर की हर गलियां फूल खिल महक उठी जगत की गांव शहर की हर गलियां , गुलाबों ने भी है तोड़ी अपनी अपनी चुप्पियां,  सौगात इजहार कर गया है गांव शहर की हर…

6 Comments

  1. शेर जी आप तो इतनी खूबसूरत कविता लिखते है यह गौरव को बात है। वाह वाह आपने तो कमाल ही कर दिया।

Leave a Reply to ओम प्रकाश सिंह Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *