बेहाल हर घड़ी | Behal har Ghadi

बेहाल हर घड़ी

( Behal har ghadi )

 

बेहाल हर घड़ी बड़ी बेचैन जान है
ये इश्क जानिए कि कड़ा इम्तिहान है।

हैं मस अले तमाम ख़फा तिस पे वो हुए
सर पर उठा के रखा हुआ आसमान है।

सब मानते वो शख़्स नहीं ठीक है मगर
हर दिल अज़ीज़ यूं है के मीठी ज़ुबान है।

दिल जब हुआ फ़िदा किसी पे कब पता किया
क्या शान बान और कैसा ख़ानदान है।

हो लाख दूरियां हों ख़लिश फासले भी हों
कुछ तो अभी बचा हमारे दरमियान है।

इस कारोबारे इश्क़ में हासिल भी क्या हुआ
कुछ आह अश्क़ दिल पे ज़ख़्म का निशान है।

हो जायेगा ये फ़ैसला बस थोड़ी देर में
अब आख़िरी गवाह दे चुका बयान है।

 

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

ज़मीरों की तिज़ारत | Zamiron ki Tijarat

Similar Posts

  • दोस्त या दुश्मन | Dost ya Dushman

    दोस्त या दुश्मन ( Dost ya dushman )    लबों पे है तबस्सुम , दिल में नफ़रत बीज बोते है अदब ऐसा अग़र, ना वो कभी भी दोस्त होते हैं ॥ मिलाते हाथ यूँ ,लगती तबीयत जोशजन उनकी घुमाते पीठ पीछे साजिशे – मोती पिरोते  हैं ॥ फ़रेबी रग में इनके इस क़दर ख़ाता हिलोरे…

  • बेमानी | Bemani

    बेमानी ( Bemani )   हक़ीक़त दिलों की यहाँ किसने जानी है, गहराई जितनी उतनी उलझी कहानी है। अक्सर सूरत में छिप जाते है किरदार वरन हर मुस्कुराते चेहरे की आँख में पानी है। अपने ही किस्से में मशगूल रहे इस कदर एहसासों की अनकही बातें किसने जानी है। हरी हो टहनी तो सह लेती…

  • बदलते हैं | Best Ghazal Lines in Hindi

    बदलते हैं ( Badalte hain )   बदलती शाम सुबहें और मौसम भी बदलते हैं बुरे हालात हों तो दोस्त हमदम भी बदलते हैं। लगाता ज़ख़्म वो हर बार हंस हंस के मुझे यारों नयी हर चोट पर हर बार मरहम भी बदलते हैं। कभी थी सल्तनत जिनकी वो पसमंजर में हैं बैठे बड़ी हैरत…

  • खामोशी | Khamoshi Shayari

    खामोशी ( Khamoshi )    नहीं कुछ भी है कहने को तो ओढ़ी आज खामोशी ज़रा सुनिए तड़पते दिल की है आवाज़ खामोशी। समंदर सी है गहरी जलजले कितने समेटे है छुपाए है हज़ारों ग़म हज़ारों राज़ खामोशी। नहीं लब से कहा उसने मगर सब कुछ बयां करती वो उसका हाले दिल बदले हुए अंदाज़…

  • वो नहीं | Ghazal Wo Nahi

    वो नहीं ( Wo Nahi ) ये असल है वो नहीं ये नकल है वो नहीं घास वो गेहूं है ये ये फ़सल है वो नहीं आदमी दोनों हैं पर ये सरल है वो नहीं फर्क दोनों में है क्या ये तरल है वो नहीं फूल हैं दोनों “कुमार” ये कमल है वो नहीं कुमार…

  • लम्हा भर है जिंदगी | Zindagi pe Shayari

    लम्हा भर है जिंदगी ( Lamha bhar hai zindagi )    सबसे तू हँस बोल ले प्यारी भवर है जिंदगी साँस के बस एक झोंके का सफ़र है जिंदगी जिंदगी जी ले जी भर मत सोच ज्यादा अब इसे क्या पता वर्षों की है या लम्हा भर है जिंदगी खोज ले पल हसरतों के कुछ…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *