बेहिस सफर | Behis Safar

बेहिस सफर

( Behis safar ) 

 

सफर में बीच ही कहीं ठहर के देखे चलो
खुद के करीब कितने कहीं रुक के देखे चलो

अदब के साये में कटी है जिन्दगी उनकी
बदी के साये में हम भी खिलखिलायें चलो

जो दिखे थे अपने वो अजनबी हैं सभी
वो जो दम भरते हैं उन्हें आजमायें चलो

बंद कमरों में चमक साथ देती हैं सदा
चंद चरागो को हवा में भी जलाऐं चलो

वो जिनके चेहरे थे खिले मुस्कुराये सदा
गमगीन उदासियों में भी गुनगुनाएं चलो

उन्हें ही सोचा उन्हें याद किया हर लम्हा
जरा सा धड़के हम भी जरा याद आऐं चलो

बडा बेहिस सा सफर था मुड कर देखा सबने
कभी मिला के नजर कभी नजरे बचाऐ चलो

 

लेखिका : डॉ अलका अरोडा

प्रोफेसर – देहरादून

यह भी पढ़ें :

मेरे अहसास | Mere Ehsaas

Similar Posts

  • मिला था निराली मधुर जिंदगी से

    मिला था निराली मधुर जिंदगी से भ्रमर बाग में जब मिला था कली सेमिला था निराली मधुर जिंदगी से सही और प्यारी सलाह दे रहा हूंहुनर सीख चलने का चलती घडी से कभी मैं कभी तू कभी ये कभी वोमिलेंगे कसम से नयी रोशनी से जरा गौर कर तू वहां देख प्यारेखड़ा है सफल आदमी…

  • कलाम है क्या

    कलाम है क्या ये गोल मोल मुहब्बत भरा कलाम है क्यातमाम उम्र यहीं पर तेरा क़याम है क्या कबूल कैसे मैं कर लूँ बता तेरी शर्तेंबिना ये जाने तुझे लेना मुझसे काम है क्या जो बार बार मुझे हुक्म देता रहता हैसमझ लिया मुझे तूने बता गुलाम है क्या जो हर घड़ी चला आता है…

  • हर पहर तन्हा | Har Pahar Tanha

    हर पहर तन्हा ( Har Pahar Tanha ) उनकी फ़ुर्क़त में हर पहर तन्हा।दिल ये रोता है किस क़दर तन्हा। एक दूजे की राह तकते हैं।हम इधर और वो उधर तन्हा। उनकी अदना सी एक चाहत पर।ज़ीस्त कर दी गयी बसर तन्हा। हम भी कमरे में क़ैद रहते हैं।वो भी करते हैं अब गुज़र तन्हा।…

  • कोई अब अरमान नहीं है | Arman Shayari

    कोई अब अरमान नहीं है ( Koi ab arman nahin hai )    प्यार की पहचान नहीं है कोई अब इंसान नहीं है इस जगत में कौन है ऐसा जो यहाँ मेहमान नहीं है हर कोई मायूस लगे अब चेहरों पर मुस्कान नहीं है बाप की बातें न ले दिल पर ये तेरा अपमान नहीं…

  • परी आसमान की | Pari Aasman ki

    परी आसमान की ( Pari aasman ki )    जब बात चल रही थी वहाँ आन-बान की लोगों ने दी मिसाल मेरे खानदान की मैं हूँ ज़मीन का वो परी आसमान की कैसे मिटेगी दूरी भला दर्मियान की देखूं मैं उसके नखरे या माँ बाप की तरफ़ सर पर खड़ी हुई है बला इम्तिहान की…

  • आप की परछाईं | Aap ki Parchhai

    आप की परछाईं ( Aap ki Parchhai ) आप की परछाईं जब खुद आपसे डर जायेगीहै यक़ीं के यह भी तोहमत मेरे ही सर जायेगी मैं चिराग़ -ए- ज़िन्दगी हूँ मत छुओ मेरा बदनमैं अगरचे बुझ गया तो रोशनी मर जायेगी मेरी तस्वीर – ए- वफ़ा मत टाँगिये दीवार परयह किसी की आँख में पैदा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *