भर भर दुआ देने लगे

भर भर दुआ देने लगे

भर भर दुआ देने लगे

हम बुज़ुर्गों पर तवज्जो जब ज़रा देने लगे
वो मुहब्बत से हमें भर-भर दुआ देने लगे

घर के आँगन में खड़ी दीवार जब से गिर गयी
नाती पोतों के तबस्सुम फिर मज़ा देने लगे

मिट गये शिकवे गिले जब भाइयों के दर्मियाँ
एक दूजे के मरज़ में वो दवा देने लगे

आ रहींं हैं लौट कर क्या फिर यहाँ पर रौनक़े
जो थे रूठे लोग कल तक वो सदा देने लगे

क्या गजब की चाशनी तहरीर में घोली गयी
ख़त पुराने हैं मगर मतलब नया देने लगे

लग रहा है डर मुझे यह जल न जाये आशियाँ
छोड़ कर चिंगारियाँ दुश्मन हवा देने लगे

बस इसी इक बात से साग़र हूँ मैं हैरतज़दा
क्यों मेरी परवाज़ को वो हौसला देने लगे

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • आज़ाद है

    आज़ाद है कहने अपनी बात को अब हर सुख़न आज़ाद हैबंदिशें कोई नहीं अब हर कहन आज़ाद है हर गली हर शह्र और आज़ाद है ये हर पहरसाँस लेते चैन से हम ये पवन आज़ाद है नफ़रतों के दायरों को तोड़ डालो मिल के सबइल्तिजा बस अम्न की है, अब वतन आज़ाद है टूटी ज़जीरें…

  • प्रेम कभी झूठ नहीं बोलता

    प्रेम कभी झूठ नहीं बोलता प्रेम कभी झूठ नहीं बोलताना ही किसी का वो बुरा सोचता शांत कुशल सौम्य एवं संयमीशब्द बिना मौन से है बोलता साथ की आदत है एसी पड़ गयीपल भी अकेला वो नहीं छोड़ता दूर ही रहता है विवादों से वोफूट चुकी मटकी नहीं फोड़ता यार सृजनशील है सपने में भीखंडहरो…

  • झूठी बातों को फिर हवा देंगें

    झूठी बातों को फिर हवा देंगें   मौत को मेरी सब दुआ देंगें । झूठी बातों को फिर हवा देंंगें ।। बाद तेरे करूँ गिला मैं क्यूँ । प्यार दिल में तिरा दिखा देंगें ।। जो न खोजे कसूर है किसका । वे ही निर्दोष को सजा देंगें ।। तुम ही कर लो वफ़ा जरा…

  • किशन बाँसुरी तूने जब भी बजाई

    किशन बाँसुरी तूने जब भी बजाई किशन बाँसुरी तूने जब भी बजाई तेरी राधिका भी चली  दौड़ी आई नहीं और कुछ देखने की तमन्ना तुम्हारी जो  मूरत है मन में समाई हुई राधिका सी मैं भी बाबरी अब कथा भागवत माँ ने जब से सुनाई रहे भक्त तेरी शरण में सदा जो भंवर से उसी…

  • ज़िन्दगी खत्म हुई | Poem Zindagi Khatam hui

    ज़िन्दगी खत्म हुई ( Zindagi khatam hui )    जिंदगी खत्म हुई उन्हें पुकारते हुए उनको जीतते हुए हमको हारते हुए क़ौल वो क़रार जो उन्हें तो याद भी नहीं बस उसी क़रार पर उमर गुज़ारते हुए । चार दिन के प्यार का चढ़ा हुआ जो कर्ज़ था हाथ कुछ बचा नहीं उसे उतारते हुए।…

  • बारिश | Baarish Poem

    बारिश ( Baarish )    आई है सौ रंग सजाती और मचलती ये बारिश रिमझिम रिमझिम बूंदों से सांसों में ढलती ये बारिश। दर्द हमेशा सहकर दिल पत्थर के जैसे सख़्त हुआ सुन कर दर्द हमारा लगता आज पिघलती ये बारिश। याद हमें जब आते हैं वो उस दिन ऐसा होता है पांव दबाकर नैनो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *