Geet Bhole Baba Ki Chali Re Baraat

भोले बाबा की चली रे बारात | Geet Bhole Baba Ki Chali Re Baraat

भोले बाबा की चली रे बारात

( Bhole Baba Ki Chali Re Baraat )

 

भोले बाबा की चली रे बारात झूमो नाचो रे
देवन असुर हो लिये साथ गण सारे आओ रे

 

भोलेनाथ औघड़ दानी होकर चले नंदी असवार
भूत प्रेत पिशाच निशाचर जीव जंतु होकर तैयार

 

सारे जग से बड़ी निराली बनकर बाराती गाओ रे
शादी में शिव शंकर गौरी भोले महादेव मनाओ रे
भोले बाबा की चली रे बारात

 

नाग लपेटे नीलकंठ गले में डाले सर्पों की माला
डमरू वाला विश्वनाथ जग में सब का रखवाला

 

भांति भांति स्वांग रचाए शिवगण सारे आओ रे
यक्ष रक्षा भैरव पिशाचों संतो मौज मनाओ रे
भोले बाबा की चली रे बारात

 

शिव शक्ति का मिलन हो रहा सारी सृष्टि हरसाई
देवों ने की पुष्प वर्षा संत मुनि जयकार लगाई

 

चहल-पहल मची दक्ष द्वारे शंख नगाड़े बजाओ रे
अलबेली बारात भोले की भक्तों दर्शन पाओ रे
भोले बाबा की चली रे बारात

 

मस्तक पे चंद्रमा सोहे जटा बहती गंगा धारा
त्रिनेत्र सर्प जनेऊ त्रिशूलधारी भोला प्यारा

 

नर मुंडो की माला पहने नंदी भृंगी गण आओ रे
मनमौजी नटराज निराले शिव महादेव मनाओ रे
भोले बाबा की चली रे बारात

 

सर्प कपाल भस्म गहने डमरू वाला भोलेनाथ
हाथी घोड़े बैल आए सब कैलाशपति के साथ

 

बेढंगे से सब बाराती, सब झूमो नाचो गाओ रे
धूम मची है सारे जग में सज धज सारे आओ रे
भोले बाबा की चली रे बारात

?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :- 

तेरी मेरी यारी | Poem teri meri yaari

Similar Posts

  • शेखर की कविताएं | Shekhar Hindi Poetry

    पृथ्वी आज रोती पृथ्वी आज रोती करती हमसे विनती मत कर मेरा दोहन मैं हूं तेरा संजीवन पेड़-पौधे हैं मेरे वास मत कर इसका उपहास हिमनद हैं मेरी संरचना कर तू इसकी  अर्चना मत कर तू अबीर लगा एक पेड़ जरूर देर सबेर,देर सबेर टेर पर टेर,टेर पर टेर धरा का मैं नीला सागर धरा…

  • हमसफ़र

    हमसफ़र   हमसफ़र वही हमराज वही, उनका अलग अंदाज सही। सुख-दुख में जो रहें साथ , परिवार पर तनिक न आए आंच। बल कई गुणा बढ़ जाए विपत्ति आए टिक न पाए न अंधकार हमें डराए जीवन सरलता से कट जाए सतरंगी बहार सदा रछाए जब शुभ आगमन इनका हो जाए असूल की हैं पक्की…

  • छत्तीसगढ़ी भाखा | Chhattisgarhi Bhakha

    छत्तीसगढ़ी भाखा ( Chhattisgarhi Bhakha )  गजब मीठ लागे भईया छत्तीसगढ़ी भाखा गजब मीठ लागे, ये सुग्घर छत्तीसगढ़ी भाखा ला बोलईया अपन कस लागे। गुरतुर सुग्घर ये बोली हा सुनईया के कान मा मीठ घोले, देस रहे चाहे परदेस अलग चिन्हारी पाए जेन एला बोले। छत्तीसगढ़ी के सात सुर मा करमा ददरिया सबला नचावय, सुग्घर…

  • समर | Samar

    समर ( Samar )    हर दर्द की दवा नहीं मिलती हर डालियों में फूल नहीं खिलते हर चमन से आती है बहार, मगर हर चमन को माली नहीं मिलते कभी और से तो कभी खुद से भी सफल शुरू करना जरूरी होता है जरूरी है उजाला भी रात के अंधेरे में मगर चांद से…

  • कोई हमको राह बता दे | Koi Humko Rah Bata De

    कोई हमको राह बता दे ( Koi Humko Rah Bata De )   कोई हमको राह बता दे, मिल जाए सुख चैन जहां। खुशियों के पल हमें ढूंढने, जाए तो हम जाएं कहां। बोलो नदिया पर्वत बोलो, नील गगन के सब तारे। अपनापन अनमोल खो रहा, रिश्ते टूट रहे सारे। प्यार भरे दो बोल मीठे,…

  • दिलों की दिवाली | Diwali Poem 2021

    दिलों की दिवाली ( Dilon ki diwali )   खुशियों के दीप जलाओ घर-घर मौज मनाओ दिलों  की  दिवाली  आई प्यार भरे गीत गाओ   आओ जी आओ आओ सारे घर वाले आओ रंगों  से  रोशन करके दीपों से घर सजाओ   आस्था  विश्वास नेह से चंदन थाल सजा लेना धूप दीप पावन आरती सारे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *