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कविताएँ

दहलीज | Dahleez kavita

दहलीज ( Dahleez )   दहलीज वो सीमा रेखा मर्यादाएं जिंदा रहती है आन बान और शान की सदा कहानी कहती है   घर की दहलीज से बेटी जब ससुराल...

जमीं अपनी है | Poetry of Dr. Kaushal Kishore Srivastava

जमीं अपनी है ( Zamee apni hai )   पार कर कांटो को कली फूल बनी है । तपिश मिट्टी की ही तो हीरे की कनी है ।।   राह...

गुलशन | Gulshan geet

गुलशन ( Gulshan )     गुल खिले गुलशन खिले खिलती चले बहार महकती फिजायें सारी चमन हुआ गुलज़ार   दिल की हसीं वादियो में फूलों का डेरा है खुशबूओं से भरा...

शीशों के घर | Sheeshon ke ghar kavita

शीशों के घर ( Sheeshon ke ghar )     शीशों के घर लड़ते हैं । पत्थर हम पर पड़ते हैं ।।   कहने के ही पत्थर हैं । शीशों से भी...

नहीं होती | Nahi hoti kavita

नहीं होती ( Nahi hoti )   जिन्दगी कहानी नहीं होती । एक सी रबानी नहीं होती ।। उधारी बाप और बेटे में । आज मुंह जबानी नहीं होती ।। इबादत...

दया धर्म का मूल है | Kavita

दया धर्म का मूल है ( Daya dharm ka mool hai )     दया भाव जीवो पर रखे दया धर्म का मूल है दीन दुखी निर्धन सताना मानव...

वक़्त | Kavita waqt

वक़्त ( Waqt )   जब से छाया गुनाहों की पड़ने लगी । रूह मेरी ही मुझसे झगड़ने लगी ।।   तेज आंधी से जंगल जब हिलने लगे । सूखे पेड़ों...

पुरानी तस्वीर | Purani tasveer kavita

पुरानी तस्वीर ( Purani tasveer )   अतीत के पन्ने खोले पुरानी तस्वीर हमारी कैसे बदला दौर सारा कहती कहानी सारी   क्या थे कहां हम आए क्या खोया क्या...

अखबार | Akhbar kavita

अखबार ( Akhbar )     आज की ताजा खबर लेकर आता अखबार देश विदेश के समाचार प्रिय अपनों का प्यार   राजनीति के दांव पेच संग सत्ता की बातें लाता कुर्सी...

उदासी | Udasi kavita

उदासी ( Udasi )   बादल  जैसी  छाई  उदासी । घिर- घिर कर फिर आई उदासी ।।   दिन-दिन बढ़ती ही जाती है । जैसे  हो  महंगाई  उदासी ।।   सूने दिल में...