Home कविताएँ

कविताएँ

प्रवास

प्रवास   अश्रुधारा हृदय क्रंदन दहन करता। प्रिय तुम्हारा प्रवास प्राण हरन करता।।   नभ में देखा नीड़ से निकले हुये थे आंच क्या थोड़ी लगी पिघले हुये  थे, उदर अग्नि...

कुमार के मुक्तक

कुमार के मुक्तक   १ बहते   हुए  जल   पे  कभी  काई नहीं आती, बिना  उबले   दूध  पर   मलाई   नहीं  आती। थोङी  बहुत  शायरी  तो  सभी  कर  लेते  हैं, "कुमार"दर्द से...

बोल कर तो देखो

बोल कर तो देखो   सुनो- तुम कुछ बोल भी नहीं रहे हो यहीं तो उलझन बनी हुई है कुछ बोल कर दूर होते तो चल सकता था…..     अब बिना बोले...

और क्रंदन

और क्रंदन     थकित पग में अथक थिरकन  और क्रंदन। आंसुओं का बरसा सावन और क्रंदन।।   हृदय से उस चुभन की आभास अब तक न गयी। सिंधु में गोते...

लक्ष्य

लक्ष्य   है दुनिया में ऐसा कौन? जिसका कोई लक्ष्य न हो।   तृण वटवृक्ष सिकोया धरा धरणीपुत्र गगन हो।   प्रकृति सभी को संजोया कण तन मन और धन हो।   खग जल दिवा-रजनी...

अपना भारत फिर महान हो जाता

अपना भारत फिर महान हो जाता ********   ऊंची मीनारों में रहने वालों जरा रहकर इक व्रत देख लेते एहसास हो है जाता  भूख होती है क्या? मजलूम मजदूरों का निवाला  छीन...

बरसाती मेंढक!

बरसाती मेंढक! *** माह श्रावण शुरू होते ही- दिखते टर्र टर्र करते, जाने कहां से एकाएक प्रकट होते? उधम मचाते, उछल कूद करते। कभी जल में तैरते, कभी निकल सूखे पर हैं...

रक्षक

रक्षक जन्म लेकर जब वह आंख खोलती है देख कर दुनिया जाने क्या सोचती है   भरकर बाहों में है प्यार से उठाता शायद इसे ही मां कहा जाता   चारों...

निद्रा

निद्रा     शांत क्लांत सुखांत सी पुरजोर निद्रा। धरती हो या गगन हो हर ओर निद्रा।।   विरह निद्रा मिलन निद्रा सृष्टि निद्रा प्रलय निद्रा, गद्य निद्रा पद्य निद्रा पृथक...

नवरात्र

नवरात्र (नवरात्र पर विशेष )     भूलो मत अपना नाता । माता-पिता जिसे भुला दे बालक जग में चैन कहां पाता।।   ममतामयी तुम करूणामयी तुम प्रेम तुम्हारा विख्याता। कपूत...