जीवन के रंग
आवा-गमन जो आया जग में अंत जाना है,जो जाया जग में अंत जाना है। प्रकृति की रचना प्रबल आवा-गमन अडिग,चौरासी लाख योनियों का उत्पन्न पतन अडिग। चार खानें चित्त अजर अमर कोई नहीं,सबके अंदर सांसें अता पता कोई नहीं। काम क्रोध लोभ मोह अहंकार पांच प्रमुख,भिन्न-भिन्न रंग रूप तीन ताप संताप सुख। दस इन्द्रियां सबका…










