आखरी सत्य

आखरी सत्य | Kavita Aakhri Satya

आखरी सत्य

( Aakhri Satya )

बहुत दिनों से मेरी
फड़क रही थी आँखे।
कोई शुभ संदेश अब
शायद मिलने वाला है।
फिर एकका एक तुम्हें
आज यहाँ पर देखकर।
दिल अचंभित हो उठा
तुम्हें सामने देखकर।।

बहुतों को रुलाया हैं
जवानी के दिनों में।
कुछ तो अभी जिंदा है
तेरे नाम को जपकर।
भले ही लटक गये हो
पैर कब्र में जाने को।
पर उम्मीदें जिंदा रखे है
आज भी अपने दिलमें।।

यहाँ पर सबको आना है
एक दिन जलने गढ़ने को।
कितने तो पहले ही यहाँ
आकर जल गढ़ चुके है।
तो तुम कैसे बच पाओगें
जीवन के अंतिम सत्य से।
यही मिला है सबको यारो
समानता का अधिकार।।

यहाँ जलते गड़ते रहते है
सुंदर मानव शरीर के ढाचे।
जिस पर घमंड करते थे
और इतराया करते थे।
पर अब जीवन का तुम्हें
सत्य समझ आ गया।
इसलिए अंत में आ गये
चाहने वालों के बीच में।।

Sanjay Jain Bina

जय जिनेंद्र
संजय जैन “बीना” मुंबई

यह भी पढ़ें :-

सावन में मिलन | Kavita Sawn Mein Milan

Similar Posts

  • अन्नदाता

    अन्नदाता   क्यूँ ! तुम जान लेने पर आमादा हो इन बेकसूर और भोले भाले किसानों की ये अन्नदाता ही नहीं है, देश की रीढ़ भी है ये ही नहीं रहेंगे तो देश कैसे उन्नति करेगा……!   ये तो यूँ भी मर रहे हैं कर्ज़ तले दब कर कभी फाँसी, कभी ज़हर, कभी ऋण कभी…

  • खुशियों की फुलझड़ी जलाओ | Deepawali ke geet

    खुशियों की फुलझड़ी जलाओ ( Khushiyon ki phuljhadi jalao )   आई दिवाली नाचो गाओ खुशियों की फुलझड़ी जलाओ दीप प्रेम के रोशन करते स्वागत में सब घर सजाओ खुशियों की फुलझड़ी जलाओ   प्यार के मोती जग लुटाओ स्नेह सुधारस खूब बहाओ दीन हीन को गले लगाकर मानवता का धर्म निभाओ खुशियों की फुलझड़ी…

  • जिन्दगी का गुलिस्तां | Zindagi ka Gulistan

    जिन्दगी का गुलिस्तां ( Zindagi ka gulistan )    झुकता है आसमां उसे झुकाकर तो देखो, रूठने वाले को भी मनाकर तो देखो। प्यार में होती है देखो! बेहिसाब ताकत, एक बार जीवन में अपनाकर तो डेखो। सिर्फ दौलत ही नहीं सब कुछ संसार में, किसी गरीब का आंसू पोंछकर तो देखो। दुनिया की किसी…

  • सावन मास है आया | Sawan Mahina

    सावन मास है आया ( Sawan mass hai aya )   हरा भरा यह दृश्य देखकर मन सभी का हर्षाया, खुशियों की प्यारी सौगातें सावन मास है लाया। दुल्हन सी आज सजी वसुंधरा इंद्रदेव जो आया, मन की बातें हम लिखें इसलिए क़लम चलाया।। उमड़ घुमड़कर बादल आएं धरती को महकाया, आसमान से इन्द्रदेव ने…

  • बोलो वो कैसे जीता होगा | Bolo vo Kaise

    बोलो वो कैसे जीता होगा ( Bolo vo kaise jeeta hoga )   देखा न हो जिसने, जीवन में खुशियां बोलो वो कैसे जीता होगा । ह्रद्दय हो जिसका खारे मय का सागर बोलो वो कैसे पीता होगा ।। पेट के खातिर, दिन में टहले रात अंधेरी घर को दहले, बिन स्याही के कलम न…

  • तमन्नाएं | Tamannayen

    तमन्नाएं ( Tamannayen )  निकला था आकाश को छू लेने की ख्वाहिश मे तमन्ना थी सितारों के साथ बादलों संग खेलूं चांद की धरती पर सूरज से बाते करूं पर, अचानक ही धरती डोल गई,और मैं गिरा गहरी खाई मे बहुत देर बाद समझा की मैं हनुमान नही था ऐसे ही ठंड की कंपकंपाती रातों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *