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कविताएँ

Kavita | वृक्ष कहे तुमसे

वृक्ष कहे तुमसे ( Vriksh Kahe Tumse )   मन  में  यदि हो सेवा भाव हर अवसर पर वृक्ष लगाओ वृक्ष  लगाकर  इस धरती को उसकी धरोहर तुम लोटाओ।।   माना  बन ...

Kavita | तेरा दर मुझे लागे प्यारा

तेरा दर मुझे लागे प्यारा ( Tera dar mujhe lage pyara )   दीन दुखियों को तेरा सहारा सजा   मां  दरबार  तुम्हारा सबकी  झोली  भरने  वाली तेरा  दर  मुझे ...

Deshbhakti Kavita | चल चल रे

चल चल रे ( Chal Chal Re )   चल चल रे नोजवान चल चल रे जरा उठ के तू चल उस पथ पे तू चल जहां देश रहा जल...

Kavita | चुनाव क्यों न टले : नेता जी कहें

चुनाव क्यों न टले : नेता जी कहें ( Chunav Kyon Na Tale : Neta JI Kahen )   एक महीने का भाग दौड़, पांच साल मौज ही...

Kavita | कागज की कश्ती

कागज की कश्ती ( Kagaz ki kashti )   कागज की कश्ती होती नन्हे  हाथों  में  पतवार कौन दिशा में जाना हमको जाने वो करतार आस्था विश्वास मन में जाना  है  उस ...

Kavita | वाह रे जिन्दगी

वाह रे जिन्दगी ( Wah re zindagi )   भरोसा तेरा एक पल का नही, और नखरे है, मौत से ज्यादा।   जितना मैं चाहता, उतना ही दूर तू...

Kavita | आधुनिकता

आधुनिकता ( Aadhunikta )   चाँद की हो गई, दुनिया दीवानी । तारों में बसने लगे, शहरे हमारी ।। ख्वाहिश  पूरी  हुई , इंसानो  की । दुनिया छोड़ दी,घर बनाने...

Kavita | गुनाह

गुनाह ( Gunaah )   सद्भावों की पावन गंगा सबके   मन  को भाए वाणी के तीखे बाणों से कोई घायल ना हो जाए   प्रेम के मोती रहा लुटाता खता   यही    संसार ...

Kavita | दबे हुए अरमान

दबे हुए अरमान ( Dabe hue armaan )   हर बार देख कर तुमकों क्यों,अरमान मचल जाते है। तब  भाव  मेरे  आँखों  मे आ, जज्बात मचल जाते...

संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान

संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान   संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान   गाइडलाइन जारी कर दी दिल्ली बड़ा-बड़ा फरमान संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान 2   मुंह पर...