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कविताएँ

फैशन का भूत

फैशन का भूत ***** फैशन का भूत बड़ा मजबूत, साड़ी पर भारी पड़ गया सूट; इसके नाम पर मची है लूट। ठगे जा रहे युवक युवतियां, फंस पछता रहे युवा...

न जाने कौन हूं मैं

न जाने कौन हूं मैं   न जाने कौन हूं मैं...... गहन तिमिरान्ध में प्रकाश हूं मैं, छलकते आंसुओं की आस हूं मैं गृहस्थ योगी यती संन्यास हूं मैं, विरह...

चक्षुजल

चक्षुजल बुभुक्षित कम्पित अधर का सार है यह। चक्षुजल है प्रलय है अंगार है यह।। तुंग सिंधु तरंग अमृत छीर है यह, प्रस्तरों को को पिघला दे वो...

इंसान स्वयं को तू पहचान!

इंसान स्वयं को तू पहचान! ******* ऐ इंसान स्वयं को तू पहचान! जन्म हुआ किस हेतु तुम्हारा ? इस दुनिया जहान में, मानव खुद को तू पहचान रे। पेश करो...

ज़िंदगी भर ज़िंदगी की जुस्तजू की

ज़िंदगी भर ज़िंदगी की जुस्तजू की   ज़िंदगी भर ज़िंदगी की जुस्तजू की प्यास से गुज़रे मगर फिर आरज़ू की   मुफ़लिसी में दर बदर फिरते रहे पर आबरू लेकिन...

मधुरिम अहसास

मधुरिम अहसास तुम समझते हो मेरी इस पीर को क्या वह सुखद अहसास बासन्ती सुमन वह कूल कालिंदी कदम तरु का मिलन वह कुछ अनकहे से अनछुये अहसास...

फिर भी मेरा मन प्यासा

फिर भी मेरा मन प्यासा   मृगतृष्णा वासना न छूटी छूटी निज जिज्ञासा‌। कितने सरोवर मन में बसते फिर भी मेरा मन प्यासा।‌।   जीवन को ज्वाला में तपते...

एक मुहिम चलाऐं

# एक मुहिम चलाऐं    एक मुहिम चलाऐं सबको अपना मीत बनाने की। सब मिलकर शुरुआत करेंगे ऐसी रीत चलाने की।।   बदले वाली भावना सब को, मन से दूर...

सफलता हेतु हंसना जरूरी है

सफलता हेतु हंसना जरूरी है ***** कठिन परिश्रम से तू ना मुंह मोड़, हंसना भी न छोड़ तू बंदे, हंसना भी ना छोड़। मेहनत करो जी तोड़,बंद राहों...

पशीना

पशीना   चाहे हो ऋतुराज अथवा सरस सावन का महीना। रक्त जलता है तब बनता है पशीना।। स्वेद रस में सनके ही रोटी बनी है। ये भवन अट्टालिका चोटी...