कविताएँ

  • जय गणतंत्र

    जय गणतंत्र सभी देशवासियों का एक ही मूल मंत्र ।संविधान की सुरक्षा हो जय गणतंत्र ।जय गणतंत्र! जय गणतंत्र! जय गणतंत्र! ना कोई भूखा रहे ना कोई प्यासा रहे ।स्वस्थ रहे भारत आरोग्य पाचन तंत्र ।जय गणतंत्र! जय गणतंत्र! जय गणतंत्र! सभी को न्याय मिले सभी को समता ।भेदभाव ना रहे ऐसा हो शासन तंत्र…

  • कविता जीवन की परिभाषा है

    कविता जीवन की परिभाषा है दिल को छूकर कविता धड़कन बन जाती हैजुदाई में किसी रूह की तड़पन बन जाती हैबच्चा हंसता है तो कविता होठों पर मुस्काती हैहर किसी की आह में खुदा का खत बन जाती है। जब कोई बच्ची बस पानी पीकर सो जाती हैभूख की दारुण दशा देख कविता रो जाती…

  • गौरवान्वित भारत

    “गौरवान्वित भारत” गौरवान्वित भारत का इतिहास लिखों,सर्वसम्मानित भारत की बात लिखों, उन बलिदानियों की राख सेदुश्मनों का विनाश लिखों, छल कपट से रहित अपने नयेभारत का इतिहास लिखों, गुलामी के जंजीर को तोड़वीरता का पहचान लिखों, रण में बैठी उन विरांगनाओं का त्याग लिखों, देश की आन के खातिर जान देने वालों का बारम्बार इतिहास…

  • खो-खो की विश्वविजय गाथा

    खो-खो की विश्वविजय गाथा खो-खो के वीरों वीरांगनाओं को बधाई अपार।जिन्होंने एक साथ विश्वकप जीत लिया संसार।खो-खो विश्व कप की ये जीत क्षितिज तक जाए।भारत देश की जय-जयकार हर दिल में समाए।1तेजी,फुर्ती,जज्बे का ये सिलसिला थमने न पाए।हर गाँव गली से एक नया सितारा उभरकर आए।अभी तो बस शुरुवात है खो खो की विश्व पटल…

  • इन्सान तेरे-मेरे में उलझ जाता है

    ‘इन्सान तेरे-मेरे में उलझ जाता है’ हे इन्सान तू अकेला ही आता है,तथा अकेला जहाँ से चला जाता है।तू यहाँ सदैव कुछ खोता व पाता है,नित तेरे-मेरे में उलझता जाता है। हे इन्सान तू स्वयं का भाग्य-विधाता है,साँसों की चलती रहती है कहानी।मिलते तथा बिछड़ते हैं इस पथ में,तू छोड़ जाता है अपनी निशानी। केवल…

  • भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’ की कविताएं | Bhagwan Das Sharma Poetry

    मां भारती के सपूत राष्ट्र सेवा में समर्पित,दीप बनकर मैं जलूं।तुम भी सेवा भाव रखो,देश दीपक में बनूं।। बनूं दीपक भारती के,पुण्य वैभव गान का।जन्म पावन इस धरा पे,ईश्वरीय वरदान का।। कामना पुनः जन्म लूं तो,देश भारत में जनूं।तुम भी सेवा भाव रखो,देश दीपक मैं बनूं।। सजग प्रहरी बन खड़े जो,देश का अभिमान है।हो गए…

  • माँ का भय

    माँ का भय मैंने बेटा जनाप्रसव पीड़ा भूल गयी वह धीरे-धीरे हँसने-रोने लगामैंने स्त्री होना बिसरा दिया उसने तुतली भाषा में माँ कहामैं हवा बनकर बहने लगी वह जवान हुआमैं उसके पैरों तले की मिट्टी वारती फिरूँ उसके सिर सेहरा बंधामुझे याद आयामैं भी एक रोज ब्याहकर आयी थीइसके पिता संग कुछ दिनों बाद मैंने…

  • ग्रहों का कुंभ

    ग्रहों का कुंभ नीलाभित नभ में लगा, कुंभ ग्रहों का मीत।रूप राशि शशि को पुलक शुक्र निहारे रीत।। दिनकर हँस स्वागत करे, उषा रश्मि शुभ स्नान।सिंहासन आसीन गुरु, पा श्रद्धा-सम्मान।। राई-नौन लिए शनि, नजर उतारे मौन।बुध सतर्क हो खोजता, राहु-केतु हैं कौन? मंगल थानेदार ने, दिया अमंगल रोक।जन-गण जमघट सितारे, पूज रहे आलोक।। हर्षल को…

  • इतिहास बदल कर रख दूंगा

    इतिहास बदल कर रख दूंगा माना अभी नहीं उछला है,सिक्का मेरी किस्मत का,पर जिस दिन ये उछलेगा, इतिहास बदल कर रख दूंगा. पत्थर पर पत्थर लगते हैं,सपने टूटा करते हैं.खुद से रोज बिखर जाते हैं,खुद हीं जुटा करते हैं. बादल, बिजली, तूफानों को,झेल – झेल कर बड़े हुए.काल कर्म की चक्की में,अक्सर हम कूटा करते…

  • हमारे नेता जी

    हमारे नेता जी 23 जनवरी 1897 को कटक उड़ीसा में जन्म हुआ,जो पढ़ लिखकर अपने कला कौशल से अंबर छुआ।पिता जानकी नाथ बोस मां प्रभावती का पुत्र था जो,आजाद हिंद फौज बनाई और जय हिंद का नारा दिया।। देखकर भारत मां की दुर्दशा को बौखला गए नेताजी,1942 में आजाद हिंद फौज का गठन किए नेताजी…