कविताएँ

  • मतलबी | Kavita Matlabi

    मतलबी ( Matlabi ) मतलबी म+तलबी मत+लबी मतल+बी म त ल बी । म=मैं त=तुम ल=लगन बी=बीतना अर्थात मेरा या तुम्हारा किसी लगन में बीत जाना खरच हो जाना क्या ग़लत है किसी का मतलबी हो जाना।। डॉ. जगदीप शर्मा राही नरवाणा, हरियाणा। यह भी पढ़ें :- गुरु ज्ञान की ज्योत | Guru Gyan ki…

  • ख़ुद पर विश्वास क्यों नहीं करते | Kavita Khud Par

    ख़ुद पर विश्वास क्यों नहीं करते ( Khud par vishwas kyon nahi karte ) ख़ुद पर विश्वास, क्यों नहीं करते? जो करना है, आज क्यों नहीं करते ? छूना चाहते हो आकाश यदि, तो फिर तुम,प्रयास क्यों नहीं करते ? कुछ भी नहीं , इस जग में असंभव। इस बात पर, विश्वास क्यों नहीं करते…

  • जीवन एक यात्रा | Kavita Jeevan ek Yatra

    जीवन एक यात्रा ( Jeevan ek yatra )  जीवन एक यात्रा है, सपनों का साज है, खुशियों की बगिया है, दुखों का भी राज है। उजालों की मस्तियाँ हैं, अंधेरों का ख्याल है, कभी-कभी कांटों की चुभन, कभी फूलों की माल है। राहें हैं कठिनाइयों की, संघर्ष का मैदान है, हिम्मत से जो चले यहाँ,…

  • मन का सावन | छंदमुक्त गीत

    मन का सावन ( Man ka Sawan ) कोकिला, पपीहा के मधुर बोल, बारिश की रिमझिम, हरियाली चहुँओर। साजन की याद सताये, रह-रहकर, आया सावन माह देखों झूमकर–2 झूले पड़ गये, डाली-डाली बम-बम बोले, हर गली-गली–2 कजरी की धुन,लगे मनभावन–2 बहुत सताता है ये, मन का सावन –2 मादकता में ,अवगाहन धरती, वर्षा का रस…

  • सावन में मिलन | Kavita Sawn Mein Milan

    सावन में मिलन ( Sawn Mein Milan ) आ गई हुई सावन में कुछ दिनों के लिए मायके। जिया लग नही रहा मेरा अब उनके बिना यहाँ। मिलने की राह में हम बहुत व्याकुल हो रहे। करें तो क्या करें अब की मिलन हमारा हो जाये।। पिया की राह में आँखें उन्हें निहार रही है।…

  • गला कटे तत्काल | Gala Kate Tatkal

    गला कटे तत्काल ( Gala Kate Tatkal ) कत्ल करे दुश्मन बने, बदल गई वो चाल। करके देखो नेकियाँ, गला कटे तत्काल।। जो ढूंढे हैं फायदा, उनका क्या परिवार। संबंधों की साधना, लुटती है हर बार।। नकली है रिश्ते सभी, नहीं किसी में धीर। झूठी है सद्भावना, समझेंगे क्या पीर।। सब कुछ पाकर भी रहा,…

  • नाकाम | Kavita Nakaam

    नाकाम ( Nakaam ) दुनिया की उम्मीदों पर खरा ना उतर सका मैं। ज़िंदा रहते खुद को मरा ना समझ सका मैं। अपने कद का अंदाज़ा सदा रहा मुझे। अफसोस है कि खुद से बड़ा ना बन सका मैं। एक उनके लिए, और दूसरा अपने लिए ऐसे दोहरे चरित्र का प्रहसन ना पहन सका मैं।…

  • सावन मनभावन | Sawan Manbhavan

    सावन मनभावन ( Savan Manbhavan ) झूम झूम के सावन आया, घूम-घूम के खुशियां लाया। झन~झन करे झंकार , आवारा बदरा बरसाया। घन-घन गरजती बौछारें धूम धड़का कर धमकाए l गर्जन-तर्जन करे दामिनी, पुलक-पुलक पुलकाए l चढ़ गई मौज बदरा को, तो नदिया भर-भर लाये। नाले-डबरे सारे भर गए, गली में पानी बहता जाए l…

  • कविता तू | Kavita tu

    कविता तू ( Kavita tu ) कविता, तू शब्दों की माला, भावनाओं का रंग, तेरे बिना दिल की गहराई, रहती है सुनी और थकी। तू लफ्जों में छुपी, सजीवता की छाया, हर स्वर में बसी, प्रेम और स्नेह की माया। तेरे हर पंक्ति में बसी, दिल की अनकही बात, हर छंद में छुपा है, जीवन…

  • बस थोड़ा सा प्यार चाहिए | Bas Thoda sa Pyar Chahiye

    बस थोड़ा सा प्यार चाहिए ( Bas Thoda sa Pyar Chahiye ) बस थोड़ा सा प्यार चाहिए। जीने का ही आधार चाहिए। बहती रहे अनुरागी सरिता। प्रीत फुहार रसधार चाहिए। मधुरम बहती बहार चाहिए। खुशियों की भरमार चाहिए। दिल तक दस्तक दे जाए वो। हमको ऐसा दिलदार चाहिए। भाव जड़ित हमें हार चाहिए। सुरभित भीनी…