कविताएँ

  • धीरे-धीरे | Poem Dhire Dhire

    धीरे-धीरे ( Dhire Dhire ) धीरे-धीरे शम्मा जलती रही, रफ्ता-रफ्ता पिंघलती रही ! दिल तड़पता रहा पल पल, रूह रह-रह मचलती रही ! शोला-जिस्म सुलगता रहा, शैनेः शैनेः रात ढलती रही ! ख़्वाब परवान चढ़ते रहे, ख़्यालो में उम्र टलती रही ! धड़कने रफ्तार में थी ‘धर्म’ सांसे रुक-रुक चलती रही !! डी के निवातिया…

  • औरों से कैसी बातें…?

    औरों से कैसी बातें…? अब आकर तुम्हीं बतादो, हम गीत कहां तक गायें। पाकर एकान्त बहे जो, वे आंसू व्यर्थ न जायें। इस भांति प्रतीक्षा में ही, बीतेगीं कब तक घड़ियां। बिखरेंगी बुझ जायेंगी, आशाओं की फुलझड़ियां। मरुथल में आ पहुंची है, बहती जीवन की धारा। तुम दयासिंधु हो स्वामी, किसका है अन्य सहारा। भौतिक…

  • जय मां शारदे | Kavita Jai Maa Sharda

    जय मां शारदे ( Jai Maa Sharda ) हाथ जोड़ विनती करूं सुनिए चित लगाय l सर्वप्रथम पूजन करूं माँ आप होएं सहाय l सुनिए माँ विनती मेरी करो मन में प्रकाश l आन विराजो जिव्हा में मीठी बोली हो ख़ास ह्रदय में ज्ञान की ज्योति जला दो l नित गढ़ूं में नये आयाम l…

  • खाद्य सुरक्षा जागरुकता

    खाद्य सुरक्षा जागरुकता सुरक्षित भोजन बेहतर स्वास्थ्य के लिए, लिया गया है ये संज्ञान, ना हो दूषित खान पान, खाद्य सुरक्षा का रखे ध्यान, खाद्य का हो ऐसा भंडारन, जहाॅ पोषकता मे कमी न आए, पौष्टिकता और संतुलित आहार का, जहाॅ से जन जन लाभ उठाए, जागरुकता है बहुत जरूरी, मिलावटखोरों पर नजर हो पूरी,…

  • कितनी दूर तक जाना होगा

    कितनी दूर तक जाना होगा   कितनी दूर तक जाना होगा फासला आज मिटाना होगा। झूठ से बुनियाद हिल जाएगी अपना सच सबसे बताना होगा। काम आए वही है अपना दामन गैरों से बचाना होगा। हम तो चाहत के तलबगार रहें हैं फिर वही धुन बजाना होगा। कुछ भी आसान नहीं है इसमें आग सीने…

  • आओ पेड़ लगाए | Kavita Aao Ped Lagaye

    आओ पेड़ लगाए ( Aao Ped Lagaye )   आओ पेड़ लगाए मिल हरियाली हम लाएं। हरी भरी धरती को आओ हम स्वर्ग बनाए। पर्यावरण के बन प्रहरी कुदरत को संभाले। प्राणवायु देते हमें आओ फर्ज को निभा ले। एक आदमी एक पेड़ संकल्प हमको लेना। एक वृक्ष मेरी ओर से भी बढ़कर लगा देना।…

  • गृहिणी जीवन | Kavita Grhinee Jeevan

    गृहिणी जीवन ( Grhinee Jeevan )   प्रबंधन के प्रेरणा सूत्र,गृहिणी जीवन से स्वस्थ स्वच्छ घर द्वार , अथक श्रम अठखेलियां । अनूप निर्वहन विविध भूमिका, ताकत नजाकत अबूझ पहेलियां । परिवार सम्मान अभिरक्षा ध्येय, सदा मंगल स्तुति चितवन से । प्रबंधन के प्रेरणा सूत्र, गृहिणी जीवन से ।। हर सदस्य रूचि ध्यान, पोशाक खान…

  • पिता का सहारा | Kavita Pita ka Sahara

    पिता का सहारा ( Pita ka Sahara ) जिस भी बच्चे के सिर पर पिता का सहारा होता है, दुनिया में खुशनुमा उसके लिए हर एक नजारा होता है। हर एक इच्छा पूरी करते अपने प्यारे बच्चे की, करते दुगनी मेहनत भरपाई करने उसके खर्चे की। मोमबत्ती सा जलकर पिता बच्चों का जीवन रोशन करता…

  • पर्यावरण और पेड़ | Kavita Paryavaran aur Ped

    पर्यावरण और पेड़ ( Paryavaran aur ped ) आओ मिलकर पेड़ लगाएं, धरा को फिर से स्वर्ग बनाएं। तेज गर्मी हो या अनावृष्टि, प्रकृति की अनियमितता से बचाएं। बरसों से मानव विकास के नाम पर पेड़ों को है काट रहा। अनजाने में ही वो विनाश का आमंत्रण सबको बांट रहा। पेड़ ही नहीं रहेंगे तो…

  • वट सावित्री व्रत | Kavita Vat Savitri Vrat

    वट सावित्री व्रत ( Vat Savitri Vrat ) ( 2 ) अल्पायु सत्यवान का, सावित्री संग व्याह हुआ, दृढ़ संकल्पित सावित्री को, इस बात से भय जरा न हुआ, महाप्रयाण के दिन यमराज, लेने आए जब प्राण सत्यवान, संग सावित्री भी चलीं, तब दिए यमराज वरदान, थी ज्येष्ठ मास की अमावस्या, वट के नीचे सावित्री…