जय मां शारदे | Kavita Jai Maa Sharda

जय मां शारदे

( Jai Maa Sharda )

हाथ जोड़ विनती करूं
सुनिए चित लगाय l
सर्वप्रथम पूजन करूं
माँ आप होएं सहाय l

सुनिए माँ विनती मेरी
करो मन में प्रकाश l
आन विराजो जिव्हा में
मीठी बोली हो ख़ास
ह्रदय में ज्ञान की
ज्योति जला दो l
नित गढ़ूं में
नये आयाम l

करबद्ध विनती करूं
सुमिरन करूं
मैं आठो याम l
मां तेरी कृपा से
मुझको मिले
विद्या का उच्च मुक़ाम।

हे माँ शारदा पूर्ण
करो सब काम l

राजेंद्र कुमार रुंगटा
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

यह भी पढ़ें:-

निवातिया के दोहे | Nivatiya ke Dohe

Similar Posts

  • ज़माना है ना | Zamana hai Na

    ज़माना है ना! ( Zamana hai na )   हंसो यारो हंसो खुल के ,रुलाने को ज़माना है करो बातें बुलंदी की ,गिराने को ज़माना है ॥ नहीं होगा कोई भी खुश ,ऊंचाई देख कर तेरी गगन उन्मुक्त में उड़ लो, डिगाने को ज़माना है॥ लगाओ सेंध बाधाओं में, तोड़ो बेड़िआं सारी निरंतर चल पड़ो,पीछे…

  • अलविदा से स्वागत

    अलविदा से स्वागत गुज़रा साल बहुत ही अच्छा था,हर हाल में इतिहास वह रचा था;गुजरा कल सारा वो भी सच्चा था,हर पल जो ख़ुशीओं में बीता था। वक्त आएगा और निकल जाएगा,सोच अपनी अपनी कैसे जिएगा;गर बुरी आदतों को छोड़कर रहेगा,अच्छी आदतों से खुशियां पाएगा। अब सारी बुराइयां हम मिटा देंगे,जीवन में सदा सभ्यता को…

  • यह आंखें | Aankhen Poem in Hindi

    यह आंखें ( Yah Aankhen )    यें ऑंखें कुछ-कुछ कहती है, लगता है जैसे मुॅंह बोलती है। अचूक निशाना साधे रहती है, ऐसे लगता है जैसे बुलाती है।। यें शर्माती है और घबराती है, दीवानी मद-होश कातिल है। फिर भी सबको यह प्यारी है, यही काली ऑंखें निराली है।। चाहें तुम्हारी है चाहें हमारी…

  • पदचिन्ह | Kavita Padachinh

    पदचिन्ह ( Padachinh )   पदचिन्हों का जमाना अब कहां पदलुपतों का जमाना अब जहां परमसत्ता को शब्द-सत्ता से च्युत करने की साजिश है जहा तिनका-तिनका जलेगा मनुज अपने ही कर्मों को ढोते-ढोते शब्द-पराक्रम की महिमा वशिष्ट ने राम को समझायी अंश मात्र जो आज हम अपनाते क्लेश नामों-निशान मिट जाता शेखर कुमार श्रीवास्तव दरभंगा(…

  • बचपन का गाँव | Bachpan ka Gaon

    बचपन का गाँव ठण्डी-ठण्डी छांव मेंउस बचपन के गाँव मेंमैं-जाना चाहती हूँ।तोडऩा चाहती हूँबंदिश चारों पहर की।नफरत भरी येजिन्दगी शहर की॥अपनेपन की छायामैं पाना चाहती हूँ।उस बचपन के गाँव मेंमैं-जाना चाहती हँ हूँ॥घुट-सी गयी हूँइस अकेलेपन मेंखुशियों के पल ढूँढ रहीनिर्दयी से सूनेपन मेंइस उजड़े गुलशन कोमैं महकाना चाहती हूँ।उस बचपन के गाँव मेंमैं-जाना चाहती…

  • शिक्षक सदा परम अभिनंदन | Shikshak ke Liye Kavita

    शिक्षक अनुपम अनुदानों का ( Shikshak anupam anudano ka )    शिक्षक अनुपम अनुदानों का, जीवन सदा आभारी ************ पितृत्व ममत्व आभा धर, ज्ञानामृत अनंत प्रवाह । तेज प्रभाव गुरु सिंहासन, अज्ञान तिमिर स्वाह । मोहक अनूप व्यक्तित्व , दिशा बोध पथ सदाचारी । शिक्षक अनुपम अनुदानों का, जीवन सदा आभारी ।। अथक परिश्रम मूल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *