कविताएँ

  • हमारा पर्यावरण | Kavita Hamara Paryavaran

    हमारा पर्यावरण ( Hamara Paryavaran )   मान रखो पर्यावरण का, करो प्रण वृक्षारोपण का, तभी प्रकृति मुस्काएगी, जीवन मे खुशियाॅ लाएगी, पेंड़ पौधे फल फूल क्यारियों से, वन बाग उपवन वाटिका विभूषित हो, नदी झरने ताल समुन्दर स्वच्छ हो, हमारा पर्यावरण दूषित न हो, स्वच्छ साफ धरा रहे, कानन हरा भरा रहें, पर्वत प्रहार…

  • विश्व पर्यावरण दिवस रोज मनाएं

    विश्व पर्यावरण दिवस रोज मनाएं   विश्व पर्यावरण दिवस रोज मनाएं आओ चलो एक पेड़ लगाएं। सबकी रक्षा धर्म हमारा चलो पीपल ,बरगद ,नीम लगाएं। एक पेड़ लगाएं। सावन भादो ढूंढ के लाएं गौरैया, गिलहरियां आंगन बुलाएं। एक पेड़ लगाएं। पेड़ हमारा जीवन है इसकी रक्षा करना है धरती उजड़े इससे पहले हरियाली को पुनः…

  • कुर्सी | Kavita Kursi

    कुर्सी ( Kursi ) पद एवं कुर्सी का मुद्दा देशभक्ति, रोज़ी -रोटी से भारी हो गया ऐसा फ़रमान दिल्ली से जारी हो गया मर चुकी जन सेवा देश सेवा की भावना कुर्सी एवं पद के लिए ओछे हथकंडे घटिया दांव -पेंच कल का जनसेवक कलियुग का जुआरी हो गया वास्तविकता पर जब भी चलाई है…

  • परिमार्जक प्रकृति | Kavita Parimarjak Prakriti

    परिमार्जक प्रकृति   चलायमान सृष्टि को  गौर से देखो कभी  मंद -मंद सुरभित बयार,  सभी को प्राण वायु से भरती  दिनकर की प्रखर रश्मियांँ  सृष्टि को जीवंतता प्रदान करती । चढ़ते, उतरते चांँद से  शीतलता, मृदुलता की शुभ वृष्टि,  हरी – भरी वसुंधरा जो सभी का पोषण है करती रंग-बिरंगे पांँखी,  मधुर तान सी छेड़…

  • सच के साथ चल देना | Sach ke Sath Chal Dena

    सच के साथ चल देना   सच के साथ चल देना, जमाना साथ होगा। भला करते चलिए, खुशियों में हाथ होगा। सच्चाई की डगर पे, तो मुश्किलें हजार होगी। मिल जाएगी मंजिलें, सब बाधाएं पार होगी। सत्य का यह मार्ग, चलना संभल संभल के। संघर्षों की कहानी, रचना फिर राही चल के। जीत होगी सत्य…

  • ईवीएम मशीन दुखियारी

    ईवीएम मशीन दुखियारी बिना बात के ही हैं कोसी जाती , फिर भी चुपचाप सब सह जाती मशीन हैं इसलिए कुछ न कह पाती झूठे सारे आरोप ये दुनिया लगती ।। यही ईवीएम जब किसी पक्ष को जीताती तो उस पक्ष की ये फिर सगी बन जाती वही विपक्ष से तब ये खाती हैं गाली…

  • युवा | Kavita Yuva

    युवा ( Yuva ) युवा एक उम्र नहीं, सकारात्मक सोच है अंतर्मन अथाह आशा उमंग, दृढ़ इच्छा शक्ति अपार । वैचारिकी चिन्मय स्फूर्त, अभिव्यक्ति पट ओज धार । उरस्थ राष्ट्र समाज उज्ज्वल छवि, सतत श्रम साधना मंत्र प्रेरणा कोच है । युवा एक उम्र नहीं, सकारात्मक सोच है ।। ह्रदय हिलोर गर्वित इतिहास, आचरण परिध…

  • हो आगमन तुम्हारा | Ho Aagaman Tumhara

    हो आगमन तुम्हारा ( Ho Aagaman Tumhara ) मेरा नहीं है कुछ भी सब कुछ है तुम्हारा मैं तो बस परछाई हूं साजन तुम साज तुम्हारा। माटी की तुम भीनी खुशबू अंतर का तुम भेद भेद मिटे तन का मन का हो आगमन तुम्हारा। मीठे सपनों की बगिया तुम इच्छा मेरी डूबी उसमें नहीं जागना…

  • मौसम क्यों बदलता है

    मौसम क्यों बदलता है कभी-कभी ख्याल आता है मौसम क्यों बदल जाता है फागुन का सुहाना मौसम भी जेठ में क्यों जल जाता हैl जमाना बदलता है हर रोज ठिकाने बदल जाते हैं मौसम बदलता है जब कभी दीवाने बदल जाते हैं। जो याद करते हैं कभी वह कभी याद आते हैं कौन अपना कौन…

  • प्रित का प्रेम | Prit ka Prem

    प्रित का प्रेम ( Prit ka Prem )   मैं तुम्हें लफ्जों में समेट नही सकती क्योंकि– तुम एक स्वरूप ले चुके हो उस कर्तार का– जिसे मैं हमेशा से ग्रहण करना चाहती हूं किन्तु– समझा नही पाती तुम्हें कि– अपने विजन को छोड़कर यथार्थ जीने का द्वंद्व वाकई में किंतना भयप्रद है। नकार देती…