कविताएँ

  • तेरे साथ ये लम्हे | Tere Sath ye Lamhe

    तेरे साथ ये लम्हे ( Tere Sath ye Lamhe )   बुझते को ज्योति हो जैसे, भूखे को रोटी हो जैसे, तेरे साथ ये लम्हे ऐसे, सीप मे मोती हो जैसे, श्री हरि की पौड़ी जैसे, राधा कृष्ण की जोड़ी जैसे, इन लम्हों मे मै हो जाऊॅ चंदा की चकोरी जैसे, मिसरी की मीठी डलियों…

  • अवध के धाम जाएंगे

    अवध के धाम जाएंगे   अवध के धाम जाएंगे, राम के दर्शन पाएंगे। उत्सव मिल मनाएंगे, झूम-झूम नाचे गाएंगे। अवध के धाम जाएंगे शब्दाक्षर मंच पावन, संगम होने वाला है। मनोरम छटा भावन, मोती पिरोने वाला है। राष्ट्र के गीत गुंजेंगे, राष्ट्रीय सम्मेलन होगा। कवि मुखर सुनाएंगे, फनकार मिलन होगा। शब्दाक्षर हुआ सिरमौर, पदाधिकारी आएंगे।…

  • हममें राम, तुममे राम

    जय श्री राम हममें राम, तुममे राम सबमे राम, सबके राम जहाँ भि देखो राम हि राम बोलो जय श्री राम राम हि धरती राम हि अम्बर राम हि बूंद, राम समंदर देखा जैसा, पाया वैसा कोई अलग नहीं उनका धाम बोलो जय श्री राम त्यागी राम, वैरागी राम सकल शृष्टि के अनुरागी राम सत्य…

  • भोलेनाथ है मतवाला | Kavita Bholenath

    भोलेनाथ है मतवाला ( Bholenath Hai Matwala )   औघड़ दानी शिव भोले हैं वरदानी। भस्म रमाए बैठे शिवशंकर ध्यानी। काशी के वासी बाबा है अविनाशी। बम बम भोले शिवशंकर हे कैलाशी। शिव डमरू वाले हैं बाघाम्बर धारी। सर्पों की माला शिव महिमा है भारी। जटा गंग साजे चंद्रमा मस्तक साजे। शंकर गौरी संग बैठे…

  • सालासर बालाजी धाम | Kavita Salasar Balaji Dham

    सालासर बालाजी धाम   मनोकामनाएं पूर्ण हो रहीं, सालासर दरबार में राजस्थान सुजानगढ़ अवस्थित, बाला जी महाराज परम स्थल । हर कदम दिव्यता स्पंदन, आध्यात्म ओज प्रभाव सकल । दर्शन अनुपमा हर्षल प्रियल, अनंत खुशियां भक्त वत्सल चमत्कार में । मनोकामनाएं पूर्ण हो रहीं, सालासर दरबार में ।। शुभ स्थापना श्रेय मोहन दास , मूर्ति…

  • पारा हुआ पचास | Para Hua Pachas

    पारा हुआ पचास ( Para Hua Pachas )   वृक्ष बड़े अनमोल हैं, ये धरती- श्रृंगार। जीव जन्तु का आसरा, जीवन का आधार।। वृक्ष,फूल,पौधे सभी, जीवन का आधार। इनसे धरा सजाइये, करिये प्यार दुलार।। नदिया, झरने, ताल सब, रोज रहे हैं सूख। पर मानव की है कहाँ, मिटी अभी तक भूख।। है गुण का भंडार…

  • जमाना आजकल | Jamana Aaj Kal

    जमाना आजकल ( Jamana Aaj Kal )   जमाना आजकल बदल रहा है, जो कल था,वह आज नहीं रहा है हो रहा है, नित नया प्रयास हर रोज बंध जाती है, जीने की आस l कैसा बीत रहा है आज कल की खबर नहीं क्या होगा कल आज जी को मस्ती भरे नगमे गा लो…

  • संदीप कुमार की कविताएं | Sandeep Kumar Hindi Poetry

    अधूरी चाहत, अमर प्रेम तेरे लिए दिल हमारा,कल की तरह ही धड़कता है।साँसें सँवरकर, रुक-रुक कर,तेरी ही बातों पर मरता है। रूप तेरा चाँद-सा,चाहत में हर पल निखरता है।पतझड़, बसंत, बहार-सा,गुलशन में याद तिरी महकता है। धूप में तन्हा, उदास,जल-जलकर मन रह जाता है।तू बदल जा, जा बेख़ौफ़,लेकिन दिल तुझ पर तरसता है। यह दिल…

  • गंगा की पावन धरती | Ganga ki Pawan Dharti

    गंगा की पावन धरती ( Ganga ki Pawan Dharti )   गंगा की पावन धरती को , हम-सब स्वर्ग बनाएंगे! भ्रष्टाचार मिटाकर जगसे , रामराज्य अब लाएंगे !! दीन-दुखी ना कोई होगा, स्वस्थ सुखी होंगे प्यारे ! दैहिक दैविक संतापों से , बच जाएंगे हम सारे !! देखेगी दुनियाँ सारी जब , परचम अपना फहराएंगे…

  • लोग | Kavita Log

    लोग ( Log )   टेढ़ा मेढ़ा कटाक्ष, लिखा फिर भी, समझें लोग, सीधा सीधा मर्म, लिखा ही लिखा, जरा न समझें लोग। वक्तव्यों मे अपने, सुलझे सुलझे, रहते लोग, मगर हकीकत मे, उलझे उलझे, रहते लोग, खातिरदारी खूब कराते, मेहमानी के, शौकीन लोग, खातिरदारी जरा न करते, मेजबानी से, डरते लोग, अपना समझें और…