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भोलेनाथ है मतवाला | Kavita Bholenath

भोलेनाथ है मतवाला

( Bholenath Hai Matwala )

 

औघड़ दानी शिव भोले हैं वरदानी।
भस्म रमाए बैठे शिवशंकर ध्यानी।

काशी के वासी बाबा है अविनाशी।
बम बम भोले शिवशंकर हे कैलाशी।

शिव डमरू वाले हैं बाघाम्बर धारी।
सर्पों की माला शिव महिमा है भारी।

जटा गंग साजे चंद्रमा मस्तक साजे।
शंकर गौरी संग बैठे नंदेश्वर विराजे।

त्रिनेत्र त्रिशूलधारी भोलेनाथ त्रिपुरारी।
नीलकंठ नटराज हरे शंभु पीर हमारी।

भोलेनाथ है मतवाला तांडव निराला।
महाकाल है दयालु सबका रखवाला।

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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