कविताएँ

  • नहीं घबराना है | Kavita Nahi Ghabrana Hai

    नहीं घबराना है ( Nahi Ghabrana Hain )   समय कि दिशा व दशा को देख नहीं घबराना है हर स्थिति से लड़ते आगे बढ़ते जाना है नहीं रखना मन में किना स्वच्छ सुंदर भाव जगाना है निश्छल तन, मन से राह पर बढ़ते जाना है आज कठिन है तो कल सुलभ होगा यही सोच…

  • बुद्ध पूर्णिमा | Kavita Buddha Purnima

    बुद्ध पूर्णिमा ( Buddha Purnima )   समरसता श्री वंदन, गौतम बुद्ध उपदेशों में धर्म कर्म आध्यात्मिक क्षेत्र, नर नारी महत्ता सम । जाति विभेद उन्मूल सोच, मानव सेवा परम धम्म । क्रोध घृणा द्वेष अनुचित, नेह समाधान उग्र आवेशों में। समरसता श्री वंदन,गौतम बुद्ध उपदेशों में ।। सम्यक दृष्टि संकल्प वचन, कर्म आजीविका परम…

  • गौतम बुद्ध पर कविता

    गौतम बुद्ध पर कविता   बुद्ध पूर्णिमा के दिन जन्मे बुद्ध पूर्णिमा के दिन पाया ज्ञान ‘ । बुद्धपूर्णिमा के दिन ही हुआ जिनका महापरिनिर्वाण ‘ । उसे ही हम गौतम बुद्ध कहते है । अक्रोध से क्रोध को भलाई से दुष्ट को दान से कंजूस को सच से झूठ को जीतना सिखाता जो उसे…

  • भानुप्रिया देवी की कविताएँ

    भगवान बुद्ध में भगवान बुद्ध में दया,करुणा कूट-कूट कर भरा हुआ था। सबके लिए उमड़ती चिंता मन में, सभी के कष्ट को अपना कष्ट। इसलिए तो मृत,रोगी,वृद्ध देख मन हुए दर्वित,दु:खी,उदासी । मनुष्य को इतना दुर्दशा है, पता नहीं कब किया होगा , क्यों ना हम जन्म के मूल मातृत्व का चक्कर बंधन से ही…

  • बुद्ध वाणी | Kavita Buddha Bani

    बुद्ध वाणी ( Boudha Bani )   सुन प्राणी बुद्ध की वाणी बुद्ध शरण गच्छामि सुन प्राणी धम्म शरण गच्छामि संघ शर्ण गच्छामि सुन प्राणी चार आर्य सत्य दुख कारण निदान वह मार्ग जिससे होता दुख का पूर्ण निदान पंचशील प्रमुख जान हत्या चोरी व्यभिचार असत्य मधपान अष्टांगिक मार्ग के जीवन सुखमय बनाने के सोपान…

  • नदिया | Kavita Nadiya

    नदिया ( Nadiya )   नदिया बही जा रही धीरे धीरे दरिया की ओर बढ़ी जा रही धीरे धीरे लगी है भीड़ नहाने की देखो कोई डूब रहा कोई डूबा रहा देखो चली ये कैसी हवा धीरे धीरे जहर हि दवा बनी धीरे धीरे बचना नहीं है किसी को नदी से चली आ रही हकीकत…

  • है बहुत कुछ | Kavita Hain Bahot Kuch

    है बहुत कुछ ( Hain Bahot Kuch )   है बहुत कुछ मन में कहने को लेकिन मन में संभाल कर रखा हूं तेरे पास अपना दिल गिरवी मैने देख भाल कर रखा हूं तुम्हें क्या लगती है अंजान में तुम्हें चुना हूं नहीं नहीं मैंने बहुत कुछ देखा फिर तेरे लिए ख्वाब बुना हूं…

  • अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस

    अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस   प्रकृति से प्रीत कर,खुशियों को पंख लगाएं पेड़ पौधे जीव जन्तु, सदैव मनुज परम मित्र । नदी पर्वत व सागर सह, स्वर्ग सदृश सुनहरे चित्र । सहेज मातृ वत्सल आभा, परिवेश उत्संग आनंद पाएं । प्रकृति से प्रीत कर,खुशियों को पंख लगाएं ।। नैसर्गिक सानिध्य अंतर, जीवन सदा आह्लादित ।…

  • पर्यावरण बचाना है

    पर्यावरण बचाना है पर्यावरण बचाना है तो , पीपल, बरगद, नींम लगाएं ! तपती धरती को अपने हम, आवर्षण से मुक्ति दिलाएं !! जाड़ा, गर्मी, बरसात और ऋतु चक्र सही हो जाएगा ! रोग दोष से मुक्ति मिलेगा, घर खुशियों से भर जाएगा !! पर्यावरण संतुलित होगा, धरती हरी भरी होगी ! लहराएंगी फसलें चहुंदिश,…

  • भानुप्रिया देवी की कविताएं | Bhanu Priya Devi Hindi Poetry

    ताजमहल सा इश्क ताज महल सा इश्क जीवन में दुर्लभ सबको। नसीब से मिलता है धरा से गुजर जाने के बाद भी हृदय में यादें और दिल में स्थान। उनके बारे में अच्छी सोच, अजूबा सा ताजमहल बना जाते हैं,यादगार स्वरूप। जीवन पर्यंत देख उसे मल्लिका की जिंदगी को याद कर करते जीवन ताजा। शहंशाह…