ग़ज़ल

  • ये नफ़रत की दुनिया

    ये नफ़रत की दुनिया संभालो तुम अपनी ये नफ़रत की दुनिया।बसानी है हम को मुह़ब्बत की दुनिया। लड़ाती है भाई से भाई को अकसर।अ़जब है तुम्हारी सियासत की दुनिया। नहीं चाहिए अब , नहीं चाहिए अब।ये दहशत की दुनिया ये वहशत की दुनिया। फंसी जब से नर्ग़े में यह बातिलों के।तमाशा बनी है सदाक़त की…

  • सँभलना जो सिखातें हैं

    सँभलना जो सिखातें हैं सँभलना जो सिखातें हैं यहाँ बापू मिले मुझको ।बिठाकर काँध पर घूमें वही चाचू मिले मुझको ।।१ जहाँ में ज्ञान सच्चा जो सिखाये सीख लेता हूँ ।मुझे जो राह पे लाये वही अब गुरु मिले मुझको ।।२ तमन्ना आखिरी अब यह कहीं मैं तीर्थ पे जाऊँ ।वहाँ भगवान के ही रूप…

  • काम कोई दुआ नहीं आई

    काम कोई दुआ नहीं आई वक़्त पर जब दवा नहीं आईकाम कोई दुआ नहीं आई मुझको गूंगी लगी ये दुनिया फिरएक आवाज़ क्या नहीं आई कितना फूटा हौआ है भाग मेरावो गया और क़ज़ा नहीं आई झूट बोलो तो झूट सच ही लगेएक बस ये अदा नहीं आई फ़ायदा कुछ नहीं मिला मुझकोबेवफ़ा को वफ़ा…

  • शबाब आया नया – नया है

    शबाब आया नया – नया है शबाब आया नया -नया हैसुरूर गहरा नया- नया है करें गिले किस तरह बताओबना ये रिश्ता नया -नया है कहें तुझे कैसे अलविदा हमअभी नजारा नया- नया है पिला दे उल्फ़त के जाम साकीहुआ दिवाना नया -नया है भडक रहे हैं जिगर में शोलेउठा ये पर्दा नया- नया है…

  • रंग ए हयात बाक़ी है | Rang e Hayat Baki Hai

    रंग ए हयात बाक़ी है ( Rang e Hayat Baki Hai ) अब भी रंग-ए-हयात बाक़ी हैहुस्न की इल्तिफ़ात बाक़ी है आ गये वो ग़रीबख़ाने तकउनमें पहले सी बात बाक़ी है चंद लम्हे अभी ठहर जाओऔर थोड़ी सी रात बाक़ी है तोड़ सकता नहीं वो दिल मेराउसमें इतनी सिफ़ात बाक़ी है हाँ यक़ी है मिलेंगे…

  • हमने देखी है | Hamne Dekhi Hai

    हमने देखी है ( Hamne Dekhi Hai ) वह्म जैसी कोई बला ही नहीं।इस मरज़़ की कहीं दवा ही नहीं। हमने देखी है हम बताएंगे।हिज्र जैसी कोई सज़ा ही नहीं। लाख कोशां रहे अ़दू लेकिन।क़द हमारा कभी घटा ही नहीं। ज़ुल्म ढाता है रात दिन फिर भी।उसकी नज़रों में ये ख़ता ही नहीं। अ़हदे ह़ाज़िर…

  • पयाम-ए-इश्क़ | Payaam-e-Ishq

    पयाम-ए-इश्क़ ( Payaam-e-Ishq ) पयाम-ए-इश्क़ है ये दिल्लगी नहीं प्यारेहै दिल की बात कोई सर-ख़ुशी नहीं प्यारे गुनाह वो करें लेकिन सज़ा मिले हमकोये फ़ैसला भी ख़ुदा का सही नहीं प्यारे चमन से रुठी बहारें हैं एक मुद्दत सेयहाँ पे डाली कोई अब हरी नहीं प्यारे सुनाते दर्द ही दिल का हमेशा महफ़िल मेंये शायरी…

  • बिठाये पहरे हैं | Bithaye Pahre Hain

    बिठाये पहरे हैं ( Bithaye Pahre Hain ) दर पे मुर्शिद बिठाये पहरे हैंइन के सर पर भी अब तो ख़तरे हैं दाग़ दामन पे लाख हों इनकेफिर भी उजले सभी से चेहरे हैं जब्र करता है इसलिए जाबिरलोग गूंगे हैं और बहरे हैं तुम भी दिल में हमारे बस जाओइसमें कितने ही लोग ठहरे…

  • हमने अब स़ख़्त जान कर ली है

    हमने अब स़ख़्त जान कर ली है हमने अब स़ख़्त जान कर ली हैदूरी अब दरमियान कर ली है मिट गयी आन बान है सारीख़तरे में और जान कर ली है करने दीदार हमने हूरों काआस्माँ पे दुकान कर ली है इस परिंदे ने माँ से मिलने कोआज लंबी उड़ान कर ली है रोज़ कह…

  • देश की अज़्मत बढ़ानी चाहिए

    देश की अज़्मत बढ़ानी चाहिए बात तो अहल-ए-ख़िरद यह भी सिखानी चाहिएहर बशर को देश की अज़्मत बढ़ानी चाहिए ऐ मेरे मालिक ये तेरी मेहरबानी चाहिएकाम आये सब के ऐसी ज़िंन्दगानी चाहिए दे गया मायूसियाँ फिर से समुंदर का जवाबजबकि मेरी प्यास को दो बूँद पानी चाहिए क्यों भला पकड़े हुए हो रहबरों की उँगलियाँराह…