ये नफ़रत की दुनिया
ये नफ़रत की दुनिया संभालो तुम अपनी ये नफ़रत की दुनिया।बसानी है हम को मुह़ब्बत की दुनिया। लड़ाती है भाई से भाई को अकसर।अ़जब है तुम्हारी सियासत की दुनिया। नहीं चाहिए अब , नहीं चाहिए अब।ये दहशत की दुनिया ये वहशत की दुनिया। फंसी जब से नर्ग़े में यह बातिलों के।तमाशा बनी है सदाक़त की…










