ग़ज़ल

  • तुम्हारी बात का | Tumhari Baat Ka

    तुम्हारी बात का ( Tumhari Baat Ka ) तुम्हारी बात का जिस पर नशा है ।उठाने को तेरा घूंघट खड़ा है ।।१ नज़र भर देख भी ले जो तुम्हें अब ।कहाँ फिर होश में रहता खड़ा है ।।२ तुम्हें जो छू रही है बे-इजाजत ।वही मगरूर अब देखो हवा है ।।३ किसी के जो बुलाने…

  • वो चार लोग थे | Wo Char Log The

    वो चार लोग थे ( Wo Char Log The ) झूठों के बादशाह थे मक्कार लोग थेहमको सही जो कहते थे वो चार लोग थे इल्ज़ाम झूठा हम पे लगाते थे बेसबबक़ातिल थे ख़ुद ही और गुनहगार लोग थे वल्लाह बेज़ुबा थे यूँ मज़लूम भी बड़ेरहते थे बंदिशों में भी लाचार लोग थे चालें समझते…

  • अजनबी बन के | Ajnabi Ban ke

    अजनबी बन के ( Ajnabi ban ke ) शाइरी तेरी लगे मख़मली कोंपल की तरहकूकती बज़्म में दिन रात ये कोयल की तरह अजनबी बन के चुराई है नज़र जब वो मिलेमुझको उम्मीद थी लगते वो गले कल की तरह ख्वाहिशें दफ़्न हैं साज़िश है बदनसीबी भीज़ीस्त वीरान हुई आज है मक़्तल की तरह मुस्तक़िल…

  • सितम का वार है | Sitam ka Vaar Hai

    सितम का वार है ( Sitam ka Vaar Hai ) उसकी जानिब ही सितम का वार हैआदमी जो वक़्त से लाचार है जिसको रब की नेमतों से प्यार हैवो ख़िजाँ में भी गुल-ओ-गुलज़ार है जिसके दम से हैं बहारें हर तरफ़अब उसी की सिम्त हर तलवार है लुट रही सोने की चिड़िया जा ब जाआज…

  • अपनी तकदीर | Apni Taqdeer

    अपनी तकदीर ( Apni Taqdeer ) अपनी तकदीर में जुदाई थीयार की हो रही विदाई थी आग चाहत की जो लगाई थीहमने अश्क़ो से फिर बुझाई थी हाथ हाथों में फिर आकर छूटाकैसी तेरी खुदा लिखाई थी क्यूँ करूँ याद उस सितम गर कोप्यार में जिसके बेवफाई थी एक वो ही पसंद था मुझकोअब जो…

  • आपकी आश्की | Aapki Aashiqui

    आपकी आश्की ( Aapki Aashiqui ) खुशबुओं से भरी आपकी आश्कीताजगी भर गई आपकी आश्की बात ही बात में बात बनने लगीप्यार से भर गई आपकी आश्की खूब हँसते रहे और हँसाते रहेगीत में ढल गई आपकी आश्की । हर जगह तुम दिखे नूर अपना लिएसूफियाना हुई आपकी आश्की ।। राह तकते रहे उम्र भर…

  • एक ग़ैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल | वो चाहता तो

    वो चाहता तो तसकीन उसके दिल को मिलती मुझे रुलाकेपूरी जो कर न पाऊं फरमाइशें बताके। वो चाहता तो चाहे कब उसको है मनाहीदिक्कत वो चाहता है ले जाना दिल चुरा के। मंजिल जुदा जुदा है जब उसकी और मेरीतब दिल का हाल उसको क्या फायदा सुना के। कहता है उंसियत में इज़हार है ज़रूरीरूठा…

  • परिवार अपना | Parivar Shayari

    परिवार अपना ( Parivar Apna ) जहाँ से निराला है परिवार अपनाइसी पे लुटाता रहूँ प्यार अपना कदम बेटियों के पड़े घर हमारेमहकने लगा है ये संसार अपना ये बेटे बहू कब हुए है किसी केजो इनपे जताऊँ मैं अधिकार अपना मजे से कटी ज़िन्दगी भी हमारीचला संग मेरे जो दिलदार अपना करूँ मैं दुआएं…

  • ख्वाबों में आ बहकाते हो | Khwab Shayari

    ख्वाबों में आ बहकाते हो ( Khwabon mein Aa Bahakate Ho ) ख्वाबों में आ बहकाते हो फुसलाते हो।मीठी नींद से बेरहमी से उठा जाते हो। भूलना चाहा मैंने जिस ग़ज़ल कोख्यालों में आ उसे गुनगुनाते हो । जो जाते कहां लौट कर आते हैं।याद में उनकी क्यों अश्क बहाते हो। पड़ता नहीं फर्क उन्हें…

  • पास बैठो | Paas Baitho

    पास बैठो ( Paas Baitho ) पास बैठो दो घड़ी मेरे सनमगर न बैठे तो तुम्हें दूंगी कसम जिंदगी में मौज ही सबकुछ नहींध्येय को भी सामने रखना बलम खुद के पैरों पर ही चलना ताकि येकह सको इस जग को हैं खुद्दार हम मुस्कुराकर प्रेम से हर फ़र्ज़ कोगर निभाओगे सफल होगा जनम राक्षसों…