दोहे

  • भावानुवाद विधा दोहा

    भगवान शिव और पार्वती के मध्य हुए रोचक वार्तालाप का भावानुवाद प्रस्तुत है ! कवि का वक्रोक्ति-चमत्कार द्रष्टव्य है। मूल श्लोक इस प्रकार है — कस्त्वं शूली मृगय भिषजं नीलकण्ठ: प्रियेSहम् केकामेकां कुरु पशुपति: नैव दृष्टे विषाणे। स्थाणुर्मुग्धे ! न वदति तरु: जीवितेश: शिवाया: गच्छाटव्यामिति हतवचा पातु वश्चन्द्रचूड़ ।। शिव -गौरा संवाद द्वार बंद शिव…

  • निवातिया के दोहे | Nivatiya ke Dohe

    राखी का त्यौहार चरणों अपने राखिये, मूरख हमको जान । प्रथम राखी आपको, परम पिता भगवान ।। रेशम की डोरी लिए, कुमकुम रोली साथ । रक्षा वचन में बांधती, बहना राखी हाथ ।। राखी सबको बांधिये, गैर सखा हो कोय । जनक, तनय या तात सम, रिश्ता जोई होय ।। राखी के त्यौहार में, रखना…

  • प्रभु श्रीराम पर दोहे | Prabhu Shri Ram Par Dohe

    प्रभु श्रीराम पर दोहे ( Prabhu Shri Ram Par Dohe )   कल्प-कल्प अवतार ले,किए विविध प्रभु कर्म। नित प्रति लीला गान से,रघुवर निभता धर्म।।1 रघुवर लीला गान सुन,कवि रचता नव काव्य। श्रेय मिला जग में उसे,हुआ सहज संभाव्य।।2 युगों-युगों होता रहा,पाप पुण्य का खेल। लेखा जोखा की नियति, राम कराएँ मेल।।3 छोड़ द्वंद्व मन…

  • महेन्द्र सिंह प्रखर के दोहे | Mahendra Singh Prakhar ke Dohe

    महेन्द्र सिंह प्रखर के दोहे ( 39 ) पीर छुपाकर जो हँसें , दें जीवन को दान । औरत ही क्यूँ मान तू , आदि शक्ति भी जान ।। प्रीत जताती हूँ सखी , करती हूँ मनुहार । गात सजानें को नहीं , करती हूँ शृंगार ।। आँसू ही हथियार है , कहते क्यों हो…

  • कलियुग का दोहा | Kalyug ka Doha

    कलियुग का दोहा ( Kalyug ka Doha )   फूल रोपिए शूल पाईए झूठ बोलिए सुख रहिए जान लीजिए माल पाइए भला कीजिए बुरा झेलिये पानी मिलायिये रबड़ी खाइये फ़रेब कीजिए कुबेर अरजिए आंचल फैलायिये अस्मिता गंवायिये ठगते रहिए दनदनाते रहिए महल ठोकिए रहम भूलिए दूसरो खाइये आपन बिसारिये देह दिखाईए द्रव्य दर्शाईये शेखर कुमार…

  • डॉ. सत्यवान सौरभ के पच्चास चर्चित दोहे

    डॉ. सत्यवान सौरभ के पच्चास चर्चित दोहे   आज तुम्हारे ढोल से, गूँज रहा आकाश। बदलेगी सरकार कल, होगा पर्दाफाश।। छुपकर बैठे भेड़िये, लगा रहे हैं दाँव। बच पाए कैसे सखी, अब भेड़ों का गाँव।। नफरत के इस दौर में, कैसे पनपे प्यार। ज्ञानी-पंडित-मौलवी, करते जब तकरार।। नई सदी ने खो दिए, जीवन के विन्यास।…

  • राम नाम है हर जगह | Ram Naam hai Har Jagah

    राम नाम है हर जगह { प्रभु श्रीराम की स्तुति में बाईस दोहे }   राम नाम है हर जगह, राम जाप चहुंओर। चाहे जाकर देख लो, नभ तल के हर छोर।। *1 नगर अयोध्या, हर जगह, त्रेता की झंकार। राम राज्य का ख्वाब जो, आज हुआ साकार।। *2 रखो लाज संसार की, आओ मेरे…

  • राम के दोहे | Ram ke Dohe

    राम के दोहे  ( Ram ke Dohe )    घट-घट में रावण बसे, करे राम का जाप ! द्वेष भाव मन से मिटा, राम मिलेंगे आप !!   राम जगत के देव है, देते सबको नाम ! मूरख प्राणी है चला, देने उनको धाम !!   राम नाम की लहर में, तरते दुर्जन आम !…

  • वायदों का झांसा | दोहा

    वायदों का झांसा ( Waydon ka jhansa )   वायदों का झांसा देते नेता जुमले बाज़! जान चुकी जनता इन्हें पोल खुली है आज!! देंगे सबको कहता था पंद्रह पंद्रह लाख! सिंहासन पर बैठ गया चुरा रहा अब आंख!! सत्ता में गुंडे -मवाली बैठे नेताओं संग! भ्रष्ट्रचारी ही लड़ रहे भ्रष्ट्रचार की जंग!! मंदिर -मस्जिद…

  • गुलिया के दोहे | Gulia ke Dohe

    गुलिया के दोहे ( Gulia ke Dohe ) ( 2 )  कभी-कभी ये सोचकर, आता है आवेश। मिला कहाँ बलिदान को, वो सपनों का देश।। लोकतंत्र को हो गया, जाने कैसा मर्ज़। बात करें अधिकार की, लोग भूलकर फर्ज़।। अब लोगों के बीच से, गायब हुआ यकीन। साँच – झूठ का फैसला, करने लगी मशीन।।…