राम के दोहे | Ram ke Dohe

राम के दोहे 

( Ram ke Dohe ) 

 

घट-घट में रावण बसे, करे राम का जाप !

द्वेष भाव मन से मिटा, राम मिलेंगे आप !!

 

राम जगत के देव है, देते सबको नाम !

मूरख प्राणी है चला, देने उनको धाम !!

 

राम नाम की लहर में, तरते दुर्जन आम !

कलयुग के पापी चलें, वेष बना के राम !!

 

दशरथ नगरी हो उठी, सजधज के तैयार !

राम लला देखन चलें, देश संग परिवार !!

 

जग-मग नगरी हो रही, महके कौशल धाम !

जित-जित को नैना उठे, दिखे राम ही राम !!

 

DK Nivatiya

डी के निवातिया

यह भी पढ़ें:-

माहिया | Mahiya

Similar Posts

  • ‘रजनी’ के दोहे | Rajni ke Dohe

    पहले जैसे अब नहीं पहले जैसे अब नहीं, घर चौबारा गेह!गली गाँव बातें कहाँ, मुस्काता वह नेह? नयन टुकटुकी बाँध कर, पथ को रहे निहार!वह रिमझिम बारिश कहाँ, गया कहाँ वह प्यार? दीपों की टिमटिम मदिर, मलिन वदन का फूल!भँवरों का गुंजन नहीं, कहाँ सरित का कूल? चित्र उकेरे भित्ति पर, याद करूँ हर बैन।बरगद…

  • प्रेम | Prem Ke Dohe

    प्रेम  ( Prem )   १) प्रेम की बंसी सुमधुर,मंत्रमुग्ध करी जाए। सुध-बुध का न पता चले,एकांत समय बिताए।।   २) जीवन में प्रेम महान, कुछ न इसके समान। मान सम्मान जहां मिले,वही है स्वर्ग स्थान।।   ३) नमन से नयन मिलाओ, आंखें कर लो चार। प्रेमरोग में जो पड़े,छुट जावे संसार ।।   ४)…

  • वायदों का झांसा | दोहा

    वायदों का झांसा ( Waydon ka jhansa )   वायदों का झांसा देते नेता जुमले बाज़! जान चुकी जनता इन्हें पोल खुली है आज!! देंगे सबको कहता था पंद्रह पंद्रह लाख! सिंहासन पर बैठ गया चुरा रहा अब आंख!! सत्ता में गुंडे -मवाली बैठे नेताओं संग! भ्रष्ट्रचारी ही लड़ रहे भ्रष्ट्रचार की जंग!! मंदिर -मस्जिद…

  • निवातिया के दोहे | Nivatiya ke Dohe

    राखी का त्यौहार चरणों अपने राखिये, मूरख हमको जान । प्रथम राखी आपको, परम पिता भगवान ।। रेशम की डोरी लिए, कुमकुम रोली साथ । रक्षा वचन में बांधती, बहना राखी हाथ ।। राखी सबको बांधिये, गैर सखा हो कोय । जनक, तनय या तात सम, रिश्ता जोई होय ।। राखी के त्यौहार में, रखना…

  • कलियुग का दोहा | Kalyug ka Doha

    कलियुग का दोहा ( Kalyug ka Doha )   फूल रोपिए शूल पाईए झूठ बोलिए सुख रहिए जान लीजिए माल पाइए भला कीजिए बुरा झेलिये पानी मिलायिये रबड़ी खाइये फ़रेब कीजिए कुबेर अरजिए आंचल फैलायिये अस्मिता गंवायिये ठगते रहिए दनदनाते रहिए महल ठोकिए रहम भूलिए दूसरो खाइये आपन बिसारिये देह दिखाईए द्रव्य दर्शाईये शेखर कुमार…

  • सुशीला जोशी के दोहे | Sushila Joshi ke Dohe

    सुशीला जोशी के दोहे ( Sushila Joshi ke Dohe ) मेरा भारत देश सूरज की पहली किरण,गति ऊषा सन्देश । अंगड़ाई ले जगता,मेरा सुंदर देश ।। 1।। झरनों में जीवन बसा,नदियों में आदेश । प्रगति राह पर दौड़ता, देखो भारत देश ।। 2।। सुमन शूल का साथ ले, धर जोगी का वेश । सूर्य उजाला…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *