Kalyug ka Doha

कलियुग का दोहा | Kalyug ka Doha

कलियुग का दोहा

( Kalyug ka Doha )

 

फूल रोपिए
शूल पाईए
झूठ बोलिए
सुख रहिए
जान लीजिए
माल पाइए
भला कीजिए
बुरा झेलिये
पानी मिलायिये
रबड़ी खाइये
फ़रेब कीजिए
कुबेर अरजिए
आंचल फैलायिये
अस्मिता गंवायिये
ठगते रहिए
दनदनाते रहिए
महल ठोकिए
रहम भूलिए
दूसरो खाइये
आपन बिसारिये
देह दिखाईए
द्रव्य दर्शाईये

Shekhar Kumar Srivastava

शेखर कुमार श्रीवास्तव
दरभंगा( बिहार)

यह भी पढ़ें :- 

मै अयोध्या हूं | Kavita Main Ayodhya Hoon

Similar Posts

  • सागर फैला दर्द है पर्वत फैली पीर | Dohe Sagar Phaila Dard

    सागर फैला दर्द है पर्वत फैली पीर ( Sagar phaila dard hai parwat phaile peer )    सागर फैला दर्द है, पर्वत फैली पीर। अश्रुधार मोती बरसे, नैना बरसे नीर। मन मेरा घायल हुआ, चित्त थोड़ा बेचैन। अंधियारी निशा हुई, कैसे गुजरे रैन। संकट के बादल घने, बरसे मूसलाधार। पीर हर लो परमात्मा, कर दो…

  • महेन्द्र सिंह प्रखर के दोहे | Mahendra Singh Prakhar ke Dohe

    महेन्द्र सिंह प्रखर के दोहे ( 39 ) पीर छुपाकर जो हँसें , दें जीवन को दान । औरत ही क्यूँ मान तू , आदि शक्ति भी जान ।। प्रीत जताती हूँ सखी , करती हूँ मनुहार । गात सजानें को नहीं , करती हूँ शृंगार ।। आँसू ही हथियार है , कहते क्यों हो…

  • दीपिका रुखमांगद के दोहे | Deepika Rukmangad ke Dohe

    दीपिका रुखमांगद के दोहे ( Deepika Rukmangad ke Dohe ) रटती शिव का नाम हैं,रसना दिन अरु रात। सावन में मन डूबता,डूब गई है गात।। रिमझिम बरसी है घटा, बुझती धरती प्यास। सावन झूला झूलते,गौरी शंकर पास।। प्यारा लगता मास है,शिव मिलने की आस। सावन का मेला लगा, सभी भक्तों को खास।। शिव की पूजा…

  • स्वाध्याय | Svadhyaya par doha

    स्वाध्याय ( Svadhyaya )   स्वाध्याय जो नित्य करें, मनन करें सुविचार। चित उज्जवल पावन बने, बहे नेह रसधार। उर उजियारा हो सखे, जगे ज्ञान यशदीप। महके चमन जीवन का, मधुर बजे संगीत। पठन अरू पाठन करे, मनन करे दिन-रात। बुध्दिबल यश वैभव बढ़े, मिले सुधीजन साथ।   रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन नवलगढ़ जिला झुंझुनू ( राजस्थान…

  • साग़र के दोहे

    साग़र के दोहे 1.सर्दी के आवेग से ,निकली सबकी हाय ।ऐसे में सब ने कहा ,हो जाये अब चाय ।।2.सर्दी में सूझा यही ,सबको एक उपाय।गरम गरम पिलवाइये ,साहब हमको चाय।।3.ठन्डा ,वन्डा रख दिया ,सबने आज उठाय ।सबके मन को भा रही , गरम गरम ही चाय ।।4.सर्दी में क्या पूछना , क्या है किस…

  • ऊँ जय माँ शारदे!

    ऊँ जय माँ शारदे! 1माँ दुर्गा ममतामयी, अद्भुत है श्रृंगार।दुर्गा दुर्गविनाशिनी, भक्त करें जयकार।। 2माँ मेरी विनती सुनें, हरेन सकल संताप।वरद हस्त धर शीश पर, हृदय विराजें आप।। 3दुर्गा दुर्गति दूर कर, सुगम बनातीं राह।रोगनाशिनी तारिणी, करतीं पूरी चाह।। 4पापमोचनी कालिका, मंगलमय हैं काम।दुर्गम की संहारिणी, तब से दुर्गा नाम।। 5घट- घट वासी मातु से,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *