भोजपुरी

  • काहे कहेल दुनिया बाटे खराब | Duniya bate Kharab Bhojpuri Kavita

    काहे कहेल दुनिया बाटे खराब  ( Kahe kahel duniya bate kharab )    दुख के घड़ी में सभे याद आइल सुख के घड़ी में जब सभे भुलाईल तब केके सहारा चाहि हो यार काहे कहेल दुनिया बाटे खराब पइसा घमडे तु मरत रहलऽ दुसरा के देख के तू जरत रहलऽ नाहिं जनलऽ तू कथी कहल…

  • अनहार | Anhar par Bhojpuri Kavita

    “अनहार, दिया आऊर आस “ ( Anhar, diya aur aas )    दीया जला देहनी हऽ ओहिजा काहे से उहवा रहे अनहार जहवां से कइगो राही गुजरे जाने कब केहू उहवा जाए हार एगो, दुगो, तिन गो, नाही चार, उहवा से राही गुज़रेला हर बार मगर केहु न जाने किस्मत के कब कहवां के खा…

  • श्मशान | Shamshan par Bhojpuri Kavita

    ” श्मशान ” भोजपुरी कविता ( Shamshan )    चार कंधा पे पड़ाल एगो लाश रहे फूल ,पईसा के होत बरसात रहे राम नाम सत्य ह सब केहू कहत जात रहे केहु रोआत रहे केहू चिल्लात रहे भीड़ चलत रहे ओके साथ मे जे समाज से अलग रहे, आज हांथ में आग ले सब कुछ…

  • महल | Mahal Bhojpuri Kavita

    महल ( Mahal )    धूल में मिल के सब धूल भईल का पताका , का सिंघासन कवन भुल भईल आज दुनिया देख रहल चुप चाप ओके छप पन्ना में पढ़ल इतिहास भईल शान, शौकत आऊर तमाशा सब खाक भईल का पता कवन आग में जल के राख भईल तोप दागत रहे कबो सलाम ओके…

  • समय | Samay par Bhojpuri Kavita

    ” समय ” भोजपुरी कविता ( Samay par Bhojpuri Kavita )   झकझोर देलऽक दुनिया ओके झोर के लूट लेलऽक मिठ ओ से बोल के अउर तुडलक ओके मडोड के आज हसेला लोग देख के ओके जोर से झकझोर देलक दुनिया ओके झोर के सब केहू ग‌इल ओके छोड़ के दरद ओके खायेला खोर-खोर के…

  • हडिया | Haria Bhojpuri Kahani

    ” हडिया ” ( Haria )  एगो गांव में एगो लड़की रहे उ बहुत सुन्दर रहे लेकिन उ बहुत झगडाईन रहे । गांव के सारा लोग ओकरा से परेशान रहे। रोज-रोज उ केहु ना केहु से झगड़ा फंसा लेत रहे । ओके घर वाला लोग भी बहुत परेशान रहे ओके ठिक करेके सारा उपाय अपना…

  • समोसा | Samosa par Bhojpuri Kavita

    समोसा ( Samosa )    आज खड़ा रहनी हम बजार में भिंड भरल रहे अउर सबे रहे अपना काम में दुकानदार चि‌‌ललात रहे हर चिज़ के दाम के तले एगो ल‌इका ले उडल कवनो समान के चोर चोर कह सभे चिल्ला उठल का चोर‌इले रहे ना केहु के पता चलल उ ल‌इका आवाज सुन डेरा…

  • गिर के उठनी | Bhojpuri Kavita Gir ke Uthani

    ” गिर के उठनी “ ( Gir ke uthani )   आज उठे के समय हमरा मिलल देख हमरा के कवनो जल उठल खिंच देलक गोंड हमर ऐ तरह से गिर ग‌इनी देख दुनिया हंस पड़ल का करती हम अभीन उठल रहनी मंजिल रहे दूर मगर अब ना सुतल रहनी देख इ हंसी अब हम…

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    पहचान | Pahchan par Bhojpuri Kavita

    पहचान ( Pahchan )    हम बिगड़ ग‌इल होती गुरु जी जे ना मरले होते बाबु जी जे ना डटले होते भ‌इया जे ना हमके समझ‌इते आवारा रूप में हमके प‌इते बहिन जे ना स्नेह देखाइत माई जे ना हमके खियाइत झोरी में ना बसता सरीयाइत आवारा रूप में हमके पाइत सुते में हम रहनी…

  • भारत | Bharat par Bhojpuri Kavita

    भारत, भोजपुरी कविता ( Bharat Bhojpuri Kavita )   भारत देश हमार, जेके रुप माई समान चेहरा काशमीर, मुडी हिमालय मुकुट के पहचान बायां हाथ अरु, आसाम मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, मनिपुर,नागा अउर मुटान दाहिना हाथ गुजरात अउर राजसथान गोड कर्नाटक, आंध्रा, तमिलनाडु, केरला शितलता के प्रमाण इनके ढेरों ल‌इका विर अउर विद्वान पंजाब अउर हिमाचल…