Duniya bate Kharab Bhojpuri Kavita

काहे कहेल दुनिया बाटे खराब | Duniya bate Kharab Bhojpuri Kavita

काहे कहेल दुनिया बाटे खराब 

( Kahe kahel duniya bate kharab ) 

 

दुख के घड़ी में सभे याद आइल
सुख के घड़ी में जब सभे भुलाईल
तब केके सहारा चाहि हो यार
काहे कहेल दुनिया बाटे खराब

पइसा घमडे तु मरत रहलऽ
दुसरा के देख के तू जरत रहलऽ
नाहिं जनलऽ तू कथी कहल जाला प्यार
त काहे कहेलऽ दुनिया बाटे खराब

न भाई-बहिन, माता-पिता चीन्हाईल
न साथी-संगति कबो याद आईल
अईसन तू कईलऽ सबके संघे हो यार
तऽ काहे कहेलऽ दुनिया बाटे खराब

कबो दूधे से रहलऽ तुहु नहात
सोने के थारी में रहलऽ तू खात
आपन केहू नाहीं आवे हो याद
तऽ काहे कहेल दुनिया बाटे खराब

अब पश्तईले पस्तावा का होई
दुख के घड़ी में सभे यादें आईल
अईसन दुबारा ना करिहऽ हो यार
अउर न कहिय दुनिया बाटे खराब

 

रचनाकार – उदय शंकर “प्रसाद”
पूर्व सहायक प्रोफेसर (फ्रेंच विभाग), तमिलनाडु
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