Samosa par Bhojpuri Kavita

समोसा | Samosa par Bhojpuri Kavita

समोसा

( Samosa ) 

 

आज खड़ा रहनी हम बजार में
भिंड भरल रहे अउर सबे रहे अपना काम में
दुकानदार चि‌‌ललात रहे हर चिज़ के दाम के
तले एगो ल‌इका ले उडल कवनो समान के

चोर चोर कह सभे चिल्ला उठल
का चोर‌इले रहे ना केहु के पता चलल
उ ल‌इका आवाज सुन डेरा ग‌इल
भागल जोर से अउर गली में लुका ग‌इल

डरल सहमल अउर ऊ दुबकल रहे
जाके देवाल के कोना में चिपकल रहे
तनी देर बाद जब मामला ठंढा ग‌इल
जेब से निकाल उ समोसा खा ग‌इल

 

कवि – उदय शंकर “प्रसाद”
पूर्व सहायक प्रोफेसर (फ्रेंच विभाग), तमिलनाडु
यह भी पढ़ें:-

गिर के उठनी | Bhojpuri Kavita Gir ke Uthani

Similar Posts

  • बेलना-चौकी | Belana-chauki par Bhojpuri kavita

    बेलना-चौकी ( Belana-chauki )   तोहरा का बनेके बा बेलना या चौकी बेलना दबावेला, बजावेला, घुमावेला चौकी देखेला, सहेला, निभावेला चौकि जानेला, मानेला, पहचानेला बेलना कुचलेला, उछलेला, ठुकरायेला बेलना जब-जब फिसलेला चौकि तब-तब रोकेला बेलना बार-बार उमड़ के जायेला चौकि ‌‌‌रुक शांत हो मुसकरायेला दुनु के क‌इसन मेल बा बेलना अउर चौकि के क‌इसन खेल…

  • |

    पहचान | Pahchan par Bhojpuri Kavita

    पहचान ( Pahchan )    हम बिगड़ ग‌इल होती गुरु जी जे ना मरले होते बाबु जी जे ना डटले होते भ‌इया जे ना हमके समझ‌इते आवारा रूप में हमके प‌इते बहिन जे ना स्नेह देखाइत माई जे ना हमके खियाइत झोरी में ना बसता सरीयाइत आवारा रूप में हमके पाइत सुते में हम रहनी…

  • जंगल | Jungle par Bhojpuri kavita

    ” जंगल “ ( Jungle )    जंगल हऽ देश के थाथी जे में रहे हाथी गाछ, पेड़ बरसाती चिता, शेर अउर क‌ई गो जाती जंगल हऽ देश के थाथी जे में रहे सब जानवर के निवास सब चिड़ियन के रहे वास जड़ी बुटी के सब प्रजाती जंगल हऽ देश के थाथी सब फल के…

  • हडिया | Haria Bhojpuri Kahani

    ” हडिया ” ( Haria )  एगो गांव में एगो लड़की रहे उ बहुत सुन्दर रहे लेकिन उ बहुत झगडाईन रहे । गांव के सारा लोग ओकरा से परेशान रहे। रोज-रोज उ केहु ना केहु से झगड़ा फंसा लेत रहे । ओके घर वाला लोग भी बहुत परेशान रहे ओके ठिक करेके सारा उपाय अपना…

  • पागल | Pagal Bhojpuri kavita

    ” पागल “ ( Pagal )    दरद के आग बा ओके दिल में, रोये ला दिन रात देख- देख के लोग कहेला, पागल जाता बडबडात   रहे उ सिधा साधा, माने सबके बात लूट लेलक दुनिया ओके, कह के आपन जात   आज ना कवनो बेटा-बेटी, नाही कवनो जमात नाही पाकिट में एगो रोपया,…

  • बारिश के चढ़ल बा पानी | Barish ke Chadhal ba Pani

    बारिश के चढ़ल बा पानी ! ( Barish ke chadhal ba pani )    अरे रामा! बारिश कै चढ़ल बा पानी, करत मनमानी ए हरी। ( 2) गाँव -शहर ऊ नदिया डूबल, मक्का,अरहर,धान ऊ डूबल। अरे रामा! देवरा करत छेड़खानी, चढ़ल बा पानी ए हरी। अरे रामा! बारिश कै चढ़ल बा पानी, करत मनमानी ए…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *