Chhand karva chauth

करवा चौथ | Chhand karva chauth

करवा चौथ

( Karva chauth )

 

सुहागनें नारी सारी,
करवा चौथ मनायें।
कर सोलह श्रंगार,
गौरी चांद मना रही।

मनमीत प्रियतम,
प्राण प्यारे भरतार।
लंबी जीए उम्र जग,
मंगल कामना कहीं।

दिलों का पावन रिश्ता,
टूटे ना तकरार से।
प्रीत का झरना बहे,
प्रेम की सरिता बही।

धवल चांदनी सुधा,
उमड़ा सागर प्रेम।
पिया मन भाए प्रीत,
मुखड़ा चांद सा वही।

?

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

सजना है मुझे सजना के लिए | Kavita sajna hai mujhe sajna ke liye

Similar Posts

  • बसंत | मनहरण घनाक्षरी | Basant ritu par chhand

    बसंत   हर्षाता खुशियां लाया, सुहाना बसंत आया। बहारें लेकर आया, झूम झूम गाइए।   मधुमास मदमाता, उर उमंगे जगाता। वासंती बयार आई, खुशियां मनाइए।   पीली सरसों महकी, खिली कलियां चहकी। फूलों पे भंवरे छाए, प्रेम गीत गाइए।   प्रीत के तराने छेड़े, मुरली की तान मीठी। मदन मोहन बंसी, मधुर बजाइये।     कवि…

  • गाँव | Gaon par chhand

    गाँव ( Gaon ) मनहरण घनाक्षरी   टेडी मेडी पगडंडी, खलिहानों की वो क्यारी। ठंडी-ठंडी बहारों में, गांव चले आइए।   मीठे मीठे बोल मिले, सद्भाव प्रेम गांव में। हरे भरे पेड़ पौधे, ठंडी छांव पाइए।   खुली हवा में सांस लो, हरियाली का आनंद। चौपाल में चर्चा चले, प्रेम बरसाइये।   सुख-दुख बांटे सब,…

  • स्कंदमाता | माहिया छंद

    स्कंदमाता ( Skandmata )   स्कंदमाता कल्याणी पर्वत निवासिनी रक्षा करें दुर्गा मां   गूंजता दरबार मां जयकार हो रही जले अखंड ज्योत मां   यश वैभवदात्री दो वरदान भवानी सुनो महागौरी मां   जय माता जगदंबे मां शेरावाली आओ दानव दलनी   दुर्गा माता रानी कमल नयन वाली मां जगत की करतार   तुम…

  • कण कण पाए हरि | Narayan Hari

    कण कण पाए हरि ( Kan kan paye hari ) हरिहरण घनाक्षरी   घट घट वासी हरि, रग रग बसे हरि। रोम रोम रहे हरि, सांस सांस मिले हरि। कण कण पाए हरि, जन मन भाए हरि। घर घर आए हरि,भजो राम हरि हरि। पीर हर लेते हरि, भव पार करे हरि। यश कीर्ति देते…

  • तुलसीदास जी | Chhand Tulsidas Ji

    तुलसीदास जी ( Tulsidas Ji ) मनहरण घनाक्षरी   तुलसी प्यारे रामजी, राम की कथा प्यारी थी। प्यारा राम रूप अति, रामलीला न्यारी थी।   राम काव्य राम छवि, नैनों में तुलसीदास। रामचरितमानस, राम कृपा भारी थी।   चित्रकूट चले संत, दर्शन को रघुनाथ। रामघाट तुलसी ने, छवि यूं निहारी थी।   राम नाम रत…

  • दर्पण | Darpan par Chhand

    दर्पण ( Darpan )   गोरा गोरा गाल गोरी, दर्पण रही निहार। सांवरी सूरत मोहि, मोहन रिझाइए। हाथों में ले गगरिया, गांव चली गुजरिया। दर्पण सा मन मेरा, प्रियतम आइए। चाल चले मतवाली, चंचल नैनो वाली। मन में हिलोरें लेती, आईना दिखाइए। दर्पण दिखा देता है, मन में छिपे भावों को। फागुन महीना आया, फाग…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *