Saadgi par chhand

सादगी | Saadgi par chhand

सादगी

( Saadgi ) 

मनहरण घनाक्षरी

 

सत्य शील सादगी हो,
ईश्वर की बंदगी हो।
आचरण प्रेम भर,
सरिता बहाइये।

 

संयम संस्कार मिले,
स्नेह संग सदाचार।
शालीनता जीवन में,
सदा अपनाइये।

 

बोल मीठे मीठे बोलो,
मन की अंखियां खोलो।
जीवन की नैया भैया,
पार कर जाइए।

 

अभिमान तज सारे,
हरि नाम भज प्यारे।
मन में विश्वास भर,
सब सुख पाइये।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

सहोदर | Sahodar par chhand

Similar Posts

  • कुंठायें जीवन का अवसान | Kuntha par chhand

    कुंठायें जीवन का अवसान ( Kunthaye jeevan ka avsan )      चिंता चिता समान है, कुंठायें हैं अवसान। जीवन को आनंद से, जरा भर लीजिए।   सब को खुशी बांटिये, नेह मोती अनमोल। घुटन भरे कुंठाएं, थोड़ा प्रेम कीजिए।   हर्ष मौज आनंद की, गर चाहो बरसात। ईर्ष्या द्वेष लोभ मद, जरा त्याग दीजिए।…

  • क्षमा | Poem in Hindi on Kshama

    क्षमा ( Kshama )  रूपहरण घनाक्षरी   दया क्षमा हो संस्कार, सदाचार और प्यार। परोपकार गुण को, घट नर ले उतार। व्यक्तित्व को चार चांद, यश कीर्ति हो अपार। क्षमा बड़ों का गहना, भव सागर दे तार। बड़े वही जगत में, छोटों को करते माफ। तारीफ में ताकत है, परचम ले विस्तार। क्षमा वीरों को…

  • कालरात्रि | Chhand kalratri

    कालरात्रि ( Kalratri ) मनहरण घनाक्षरी   काली महाकाली दुर्गा, भद्रकाली हे भैरवी। चामुंडा चंडी रुद्राणी, कृपा मात कीजिए।   प्रेत पिशाच भूतों का, करती विनाश माता। सिद्धिदात्री जगदंबे, ज्ञान शक्ति दीजिए।   अग्नि ज्वाला से निकले, भयानक रूप सोहे। खड्ग खप्पर हाथ ले, शत्रु नाश कीजिए।   रूद्र रूप कालरात्रि, पापियों का नाश करें।…

  • जीवन एक पहेली | Chhand jeevan ek paheli

    जीवन एक पहेली ( Jeevan ek paheli )   सुख-दुख के डोर सी, बड़ी सुहानी भोर सी। जीवन एक पहेली, जीते चले जाइए।   हंसती खिलखिलाती, मंद मंद सी मुस्काती। पल-पल आनंद के, खुशी से बिताइए।   प्रेम की बहती धारा, खुशियों भरी बहार। महकती चमन की, खुशबू को पाइए।   समस्या समाधान भी, यश…

  • जीत | Jeet

    जीत ( Jeet )  मनहरण घनाक्षरी   दिल जितना चाहो तो, दिल में उतर जाओ। मीठे बोल प्यार भरा, गीत कोई गाइए। जग जितना चाहो तो, लड़ना महासमर। शौर्य पराक्रम वीर, कौशल दिखाइए। औरों के हित जो लड़े, समर जीत वो जाते। दीन हीन लाचार को, गले से लगाइए। जीतकर शिखर से, अभिमान ना करना।…

  • कोहरा | Kohara par Chhand

    कोहरा ( Kohara  )    मनहरण घनाक्षरी   ठंडी ठंडी हवा चली, शीतलहर सी आई। ओस पड़ रही धुंध सी, देखो छाया कोहरा। ठिठुरते हाथ पांव, बर्फीली हवाएं चली। कुदरत का नजारा, कांप रही है धरा। धुआं धुआं सा छा रहा, धुंधली दिखती राहें। कोहरा की भरमार, संभल चले जरा। पड़ रही ओस बूंदे, पत्तों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *