Seema par Chhand

सीमा | Seema par Chhand

सीमा

( Seema ) 

मनहरण घनाक्षरी

 

सरहद पे जवान, चलते सीना तान।
देश का सम्मान वीर, रखते संभाल के।

लड़ते वीर सीमा पे, गोलाबारी गोली से।
दुश्मन को मात देते, तिलक है भाल के।

अटल सेनानी वीर, महा योद्धा रणवीर।
पराक्रम दिखाते वो, तेवर कमाल के।

भारतमाता के लाल, शूरवीर है कमाल।
बुलंद हौसले होते, धरती के लाल के।

 

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

मन शिवालय हो जाए | Geet Man Shivalay ho Jaye

 

 

 

Similar Posts

  • शिव महिमा -शिवगौरा

    शिव महिमा -शिवगौरा ( राधेश्मामी छंद ) शिव गौरा मुख बैठे नंदी, ये सावन लगा सुहाना है।अविनाशी की महिमा प्यारी,अब हर-हर भोले गाना है।झंकृत डमरू नाद सुरीला, वो बम बम भोला लहरी है।रम कर बैठे भोले बाबा,मन बसा प्रेम की नगरी है। गंगा धारण करने वाले,वो बम भोले भंडारी है।जो भी इनको मन से ध्याया,तो…

  • नैनो में सावन | कुण्ड़लिया छन्द

    नैनो में सावन ( Naino mein sawan ) नैनो में सावन लिए , करती हूँ मनुहार । ऐसे मत छेड़ो पिया , लगती जिया कटार ।। लगती जिया कटार , बूँद सावन की सारी । आ जाओ इस बार , विरह की मैं हूँ मारी ।। भीगूँ तेरे संग , यही कहता मनभावन । नही…

  • उपवास | Upwas chhand

    उपवास ( Upwas ) मनहरण घनाक्षरी   नेम धर्म व्रत करे विश्वास श्रद्धा भाव से प्रभु सुमिरन कर उपवास कीजिए   जब तप योग ध्यान सर्व शक्ति हरि मान दुर्गुण दोष मन से त्याग सुधा दीजिए   मन से करें जो पूजा व्रत निराहार रख कामना पूरी कर दे माला जप लीजिए   उपवास बड़ा…

  • भगवान जय श्री परशुराम जी

    भगवान जय श्री परशुराम जी ( छंद-मनहरण घनाक्षरी ) जमदग्नि रेणु सूत ,अति बलशाली पूत,छठे अवतार विष्णु ,राम  कहलाए है! अक्षय तृतीया आई,अटल मुहुर्त लाई,रामभद्र जन्मोत्सव ,जगत मनाए है। राम  बसे श्वास श्वास, करने अधर्मी नाश,हाथ में सदैव अस्त्र,परशु उठाए है । शिव धनु तोड़े राम , हर्ष हुआ चारों धाम,विलोकित राम-राम ,दोनों मुस्कुराए है। डॉ कामिनी व्यास…

  • Chhand Shailputri | शैलपुत्री

    शैलपुत्री   मनहरण घनाक्षरी   शैलपुत्री वृषारूढ़ा, गिरिराज प्रिय सुता। त्रिशूलधारी भवानी, दुख हर लीजिए।   मंगलकारणी माता, दुखहर्ता सुखदाता। कमल नयनी देवी, वरदान दीजिए।   पार्वती मां हेमवती, शिव गौरी जगदंबे। यश कीर्ति वैभव दो, माता कृपा कीजिए।   सजा दरबार तेरा, अखंड ज्योति जलती। शक्ति स्वरूपा अंबे, शरण में लीजिए।   रचनाकार : रमाकांत…

  • रोजगार | Rojgar chhand

    रोजगार ( Rojgar ) मनहरण घनाक्षरी छंद   रोजगार नौकरी हो, कारोबार कारीगरी।। कौशल कलायें कई, काज शुभ कीजिए।।   नौकरी या व्यवसाय, रोजगार काज करो। परिवार फले फूले, ऐसा काम कीजिए।।   हर हाथ काम मिले, यश कीर्ति नाम मिले। दुनिया में काम वही, बढ़चढ़ कीजिए।।   काम कोई छोटा नहीं, कर्मठ को टोटा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *