Desh Mein

देश में | Desh Mein

देश में

( Desh Mein ) 

 

प्यार के हर घड़ी गुल खिले देश में
बस अमन प्यार हर पल रहें देश में

हो मुबारक आजादी सभी को सदा
एकता की ताक़त बस बने देश में

मुख पर जय हिंद जय हिंद जय हिंद हो
ये ही आवाज़ यारों उठे देश में

नाम रोशन हमेशा ही हो भारत का
काम अच्छे हमेशा करे देश में

कोई भूखा न सोये दुआ है ये ही
रोटियां हर चूल्हे पर पके देश में

मार गिराये अदू देश से वो सभी
देखिये वीर पुरुष हुये देश में

नफ़रतों का ज़रा भी नहीं हो असर
प्यार से ही गले सब मिले देश में

प्यार की हो फुवारे हमेशा आज़म
नफ़रत से घर न कोई जले देश में

 

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

देश से | Desh se

Similar Posts

  • छोड़ो | Chhodo

    ‘छोड़ो’ किसी बहाने जब देखो छज्जे पर आना-जाना छोड़ोआता देख मुझे खिड़की में आकर बाल बनाना छोड़ो क्या नाता है तुमसे मेरा क्यों अपनापन जता रहे होहँस हँस के यूँ बार-बार नैनों से तीर चलाना छोड़ो मैं नसीब का मारा मुझको पाकर होगा हासिल क्याअपने दिल के बालू पर बरसाती फसल उगाना छोड़ो आहें भरना…

  • अ़हदो पैमान की स़दाक़त को

    अ़हदो पैमान की स़दाक़त को अ़हदो पैमान की स़दाक़त को। आज़मा ले मिरी मुह़ब्बत को। यूं न पर्दा हटा ह़सीं रुख़ से। क़ैद रहने दे इस क़यामत को। उनकी नज़रों से पी ले जो वाइ़ज़। भूल जाए वो राहे जन्नत को। आ गई नींद अब मुझे दिलबर। अब न आना मिरी अ़यादत को। पैरवी जिसने…

  • तेरा इक दिवाना हूँ

    तेरा इक दिवाना हूँ तेरा इक दिवाना हूँ क़ाफ़िर नहीं हूँअसल में जो मैं हूँ वो जाहिर नहीं हूँ जुबाँ हूँ अदा-ए-फिजा हूँ फ़ना हूँयक़ीनन मैं जो हूँ क्यों आखिर नहीं हूँ जहाँ तक तिरा साथ मुझको चलूँगायुँ कुछ वक्त का मैं मुसाफ़िर नहीं हूँ लिखूँगा मैं लिखता नया ही रहूँगाथकूँ राह में ऐसा शाइर…

  • तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दी

    तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दी तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दीबुलंदी की हर इक निशानी लुटा दी ख़ुदा ने सँवारा सजाया चमन कोगुलों पे सभी मेहरबानी लुटा दी फ़िजाओं में नफ़रत का विष घोल कर केमुहब्बत की सारी कहानी लुटा दी ख़ज़ाना किया सारा खाली उन्होंनेकि हासिल हुई राजधानी लुटा दी करें रोज़ क़ुदरत…

  • वो सपनों में आकर सताने लगे हैं

    वो सपनों में आकर सताने लगे हैं वो सपनों में आकर सताने लगे हैंमेरी धड़कनों को बढ़ाने लगे हैं बनाया था तिनकों से जो आशियानाअदू आके उसको जलाने लगे हैं क़यामत कहीं आ न जाए यहाँ परसितमगर को हम याद आने लगे हैं ज़माने ने ठोकर लगाई है उनकोतभी होश उनके ठिकाने लगे हैं कहीं…

  • फ़ौरन संभाल लेता है

    फ़ौरन संभाल लेता है वो गुफ़्तगू में मिसालों को डाल लेता हैबिगड़ती बात को फौरन संभाल लेता है बढ़ेगा कैसे मरासिम का सिलसिला उससेज़रा सी बात पे आँखे निकाल लेता है छुपाना उससे कोई राज़ है बड़ा मुश्किलवो बातों बातों में दिल भी खंगाल लेता है कशिश अजीब सी रहती है उसके लहजे मेंहरेक शख़्स…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *