धीरे-धीरे

Kavita धीरे-धीरे

धीरे-धीरे

( Dhire Dhire )

 

 

साजिश का होगा,असर धीरे-धीरे।

फिजाँ में घुलेगा ,जहर धीरे-धीरे।

 

फलाँ मजहब वाले,हमला करेंगे,

फैलेगी शहर में,खबर धीरे-धीरे।

 

नफरत की अग्नि जलेगी,हर जानिब,

धुआँ-धुआँ होगा,शहर धीरे-धीरे।

 

मुहल्ला-मुहल्ला में,पसरेगा खौप,

भटकेंगे लोग दर,बदर धीरे-धीरे।

 

सियासत के गिद्ध,मँडराने लगेंगे,

लाशों पर फिरेगी,नज़र धीरे-धीरे।

✍️

कवि बिनोद बेगाना

जमशेदपुर, झारखंड

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